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क्या हिमाचल पुलिस से डरते हैं नितिन गडकरी?

महाराष्ट्र में बिना हेलमेट घूमते हैं, हिमाचल में हेलमेट बिना बाइक पर बैठने से इनकार.

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नितिन गडकरी ने सेना के लिए आपत्तिजनक बातें बोली हैं.
हिमाचल प्रदेश में चुनावी माहौल है. बीजेपी-कांग्रेस के बड़के-बड़के नेता वहां पहुंच रहे हैं. 31 अक्टूबर को पहुंचे बीजेपी के बड़े नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी. कुल्लू जिले के निरमंड क्षेत्र में जनसभा थी. रास्ता दुर्गम था तो जाने के लिए उन्होंने बाइक का इस्तेमाल किया. मगर ये क्या वो हेलमेट लगाए हैं. वो भी तब जब वो ड्राइविंग सीट पर नहीं बल्कि पीछे बैठे हैं. वैसे मैं अचंभित क्यों हूं? वो इसलिए कि उनकी कुछ पुरानी तस्वीरें अलग ही बात बोलती हैं. महाराष्ट्र में उन्हें कई बार बिना हेलमेट देखा गया है. बढ़िया हंसते-मुस्कराते. बाल लहराते. नहीं विश्वास तो ये तस्वीरें देखिए-
महाराष्ट्र में बिना हेलमेट के कई बार देखे जा चुके हैं नितिन गडकरी.
महाराष्ट्र में बिना हेलमेट के कई बार देखे जा चुके हैं नितिन गडकरी.

यहां तो मामला वैसा ही लगा कि जब यूपी वाले दिल्ली दर्शन को आते हैं तो हेलमेट लगाते हैं. बाइक पर आगे बैठे हों या पीछे. हेलमेट लगाना ही पड़ता है. यूपी वाला जलवा तेल लेने चला जाता है. सच कहें तो सब दिल्ली पुलिस का डर है. यहां 'हमारे चाचा विधायक हैं', वाला भौकाल नहीं चलता है. अब नेताजी महाराष्ट्र से हिमाचल आए और हेलमेट लगा लिया तो क्या इसे हिमाचल पुलिस का डर माना जाए. गडकरी साहब हेलमेट लगाकर घूम रहे हैं. देखिए-
कुल्लू में जनसभा में जाने के लिए नितिन गडकरी हेलमेट लगाकर बाइक से गए.
कुल्लू में जनसभा में जाने के लिए नितिन गडकरी हेलमेट लगाकर बाइक से गए.

गडकरी बोले- हेलमेट नहीं है तो बाइक पर नहीं बैठूंगा
गडकरी की सभा जहां थी, वहां कार नहीं जा सकती थी. सो बाइक से ही जाना था. उनको ले जाने के लिए एक बाइक सवार हेलमेट लगाए तैयार खड़ा था. बैठने की बारी आई तो गडकरी ने अपना हेलमेट मांगा. पता चला उनके लिए हेलमेट नहीं है तो उन्होंने बाइक पर बैठने से इनकार कर दिया. बोले- इसके बजाय वे पैदल ही चलना पसंद करेंगे और पैदल चलना शुरू कर दिया. इसके बाद कहीं से जुगाड़ करके उनके लिए हेलमेट लाया गया. तब जाकर वो बाइक पर बैठे.
गडकरी ने हेलमेट ना मिलने पर बाइक पर बैठने से इनकार कर दिया था.
गडकरी ने हेलमेट न मिलने पर बाइक पर बैठने से इनकार कर दिया था.

कितना अच्छा लगा न तस्वीरें देखकर. नेता और अभिनेता लोगों को तो वैसे भी ट्रैफिक नियम मानने चाहिए. काहे से लाखों-करोड़ों उनके पंखे इससे अपने नियम बनाते-बिगाड़ते हैं. खैर गडकरी साहब की मजबूरी समझ सकते हैं. चुनावी टाइम है. वो ठहरे ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर. फालतू में विवाद में काहे फंसना चाहेंगे. वैसे ये रवैया महाराष्ट्र में भी जारी रहे तो कितना अच्छा हो.


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