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डी गुकेश ने जीता चेस का 'सबसे बड़ा टूर्नामेंट', 40 साल पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ डाला!

D Gukesh ने FIDE Chess Candidates 2024 का खिताब जीत लिया. Gukesh ने Garry Kasparov के 40 साल पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया.

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डी गुकेश कैंडिडेट्स चेस टूर्नामेंट के विजेता बने (फोटो: PTI)

भारत के युवा ग्रैंडमास्टर डी गुकेश (D Gukesh) ने इतिहास रच दिया है. 17 वर्ष के गुकेश ने कैंडिडेट्स शतरंज टूर्नामेंट (FIDE Chess Candidates 2024) का खिताब अपने नाम कर लिया है. गुकेश इस टूर्नामेंट को जीतने वाले दुनिया के सबसे युवा प्लेयर बन गए हैं. उन्होंने महान गैरी कास्परोव (Garry Kasparov) के 40 साल पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया. कास्परोव ने साल 1984 में ये खिताब जीता था. तब उनकी उम्र 22 साल की थी. गुकेश अब साल के आखिर में वर्ल्ड चैंपियन बनने के लिए चीन के डिंग लिरेन के खिलाफ मुकाबले में उतरेंगे.

गुकेश ने 14वें और आखिरी दौर में अमेरिका के हिकारू नाकामुरा के खिलाफ ड्रॉ खेला. इस टूर्नामेंट में गुकेश के नाम सबसे ज्यादा 9 अंक रहे. आखिरी राउंड से पहले अंकतालिका में वो टॉप पर थे. नाकामुरा के खिलाफ ड्रॉ खेलने के बाद गुकेश को इयान नेपोमनियाची और फाबियानो कारुआना के बीच हुए मैच का इंतजार करना पड़ा. लेकिन दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ और गुकेश चैंपियन बन गए. गुकेश को 88500 यूरो ( करीब 78.5 लाख रुपये ) इनाम के तौर पर मिले.

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गुकेश ने जीता खिताब

गुकेश, विश्वनाथन आनंद के बाद इस टूर्नामेंट को जीतने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं. पांच बार के विश्व चैंपियन आनंद ने 2014 में खिताब जीता था. गुकेश की इस शानदार उपलब्धि के बाद आनंद ने भी उन्हें बधाई दी है. आनंद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा,

“सबसे कम उम्र के चैलेंजर बनने के लिए डी गुकेश को बधाई. आपने जो कारनामा किया, उस पर @WacaChess परिवार को बहुत गर्व है.आपने जिस तरह से कठिन परिस्थितियों को संभालते हुए जीत हासिल की. मुझे उसपर बेहद नाज है.”

क्या है टूर्नामेंट का फॉर्मेट?

इस टूर्नामेंट की बात करें तो महिला और पुरुष दोनों वर्ग में 8-8 खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं. हर खिलाड़ी एक-दूसरे का दो-दो बार सामना करता है. जीतने पर एक अंक और ड्रॉ होने पर 0.5 अंक दिए जाते हैं. टूर्नामेंट के आखिर में अंकतालिका में टॉप पर रहने वाला खिलाड़ी चैंपियन बनता है. इस टूर्नामेंट का विजेता मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन को चैलेंज करता है. इस मुकाबले का विजेता वर्ल्ड चैंपियन बनता है.

गुकेश की बात करें तो वो 12 साल, सात महीने, 17 दिन की उम्र में भारत के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बन गए थे. वो महज 17 दिन से सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बनने से चूक गए थे. वहीं इसी टूर्नामेंट में भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंद सात अंक लेकर पांचवें स्थान पर रहे. जबकि विदित गुजराती छठे स्थान पर रहे. महिला वर्ग में वैशाली रामबाबू और कोनेरू हंपी 7.5/14 अंक के साथ महिला वर्ग में संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहीं.

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