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‘मिस्टेकन आइडेंटिटी’ क्या बला है, जिसने अर्जेंटीना को सेमीफाइनल में पहुंचाया!

स्विटजरलैंड के फुटबॉलर ब्रील एम्बोलो (Breel Embolo) FIFA World Cup 2026 में नए नियम का पहला शिकार बने. उन्हें अर्जेंटीना के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले में मिस्टेकन आइडेंटिडी (Mistaken Identity) की वजह से मैच से बाहर भेज दिया गया. उनकी गलती का खामियाजा टीम को भी भुगतना पड़ा. अर्जेंटीना ने क्वार्टर फाइनल में स्विटजरलैंड को 3-1 से हराकर सेमीफाइनल में एंट्री की.

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ब्रील एम्बोलो ग्राउंड छोड़ते वक्त काफी भावुक हो गए थे. (फोटो- Reuters)

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  • FIFA वर्ल्ड कप 2026 में स्विट्जरलैंड के ब्रील एम्बोलो को मिस्टेकन आइडेंटिटी नियम के तहत ग्राउंड से बाहर भेजा गया क्योंकि उन्हें दो येलो कार्ड मिले जो कि रेड कार्ड के बराबर हैं।
  • मिस्टेकन आइडेंटिटी तब होती है जब रेफरी किसी खिलाड़ी को गलती से येलो या रेड कार्ड दे देता है, और खेल के दौरान VAR से समीक्षा करके इसका पता लगाया जाता है।
  • इस नियम के लागू होने के बाद एम्बोलो को बाहर भेजा गया जिससे स्विट्जरलैंड का क्वार्टर फाइनल कमजोर हुआ और अर्जेन्टीना ने सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

FIFA World Cup 2026 में पहली बार ‘मिस्टेकन आइडेंटिटी’ नियम के तहत किसी प्लेयर को ग्राउंड से बाहर भेजा गया. यह प्लेयर स्विटजरलैंड के ब्रील एम्बोलो ( Breel Embolo) थे. 12 जुलाई को अर्जेंटीना के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मैच में उन्हें दो बाहर येलो कॉर्ड मिला. पहला येलो कार्ड पहले हाफ में और दूसरा येलो कार्ड उन्हें दूसरे हाफ में दिया गया. एम्बोलो 'मिस्टेकन आइडेंटिटी' के चलते मैदान से बाहर भेजे जाने वाले पहले खिलाड़ी हैं. FIFA World Cup 2026 यह नया रूल 'मिस्टेकन आइडेंटिटी' क्या बला है, आइए जानते हैं.

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क्या है 'मिस्टेकन आइडेंटिटी'?

मैच में ‘Mistaken Identity’ तब होती है, जब रेफरी मैच में किसी प्लेयर को गलती से येलो या रेड कार्ड दे दे. लेकिन, असल में फाउल दूसरी टीम के खिलाड़ी ने किया हो, तो वो फैसला बदला जा सकता है. मैच रेफरी यह जानने के लिए VAR से रिव्यू ले सकते हैं कि क्या उन्होंने सही फैसला लिया था? अगर यह पता चलता है कि फाउल गलत प्लेयर को दिया गया था, तो इसे ‘मिस्टेकन आइडेंटिटी’ कहा जाता है.

ब्रील एम्बोलो के मामले में क्या हुआ?

अर्जेंटीना के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले में एम्बोलो और लियांड्रो परेडस के बीच टक्कर हुई. मैच रेफरी जोआओ पिनहेइरो ने माना कि यह लियांड्रो पारेडस का फाउल है. इसलिए रेफरी ने पारेडस को येलो कॉर्ड दिया. क्योंकि, ऐसा लग रहा था कि पारेडस ने एम्बोलो को गिराया है.

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येलो कार्ड मिलने के बाद, लियांड्रो पारेडस ने VAR मांगा. रीप्ले में VAR रेफरी ने माना कि एम्बोलो ने पारेडस के आगे जानबूझकर डाइव लगाई थी. इसलिए मैच रेफरी ने अपना फैसला बदलते हुए ये येलो कार्ड एम्बोलो को थमा दिया. इससे पहले, एम्बोलो को पहला येलो कार्ड भी परेडेस के कारण ही मिला था. 

फर्स्ट हाफ के एंड में एंबोलो ने परेडस पर ही फाउल किया था. तब रेफरी ने उन्हें पहला येलो कार्ड दिखाया था. इसलिए मैच के 72वें मिनट में जब उन्हें दूसरा येलो कार्ड मिला, उन्हें ग्राउंड से बाहर भेज दिया गया. नियम के मुताबिक, जब एक मैच में किसी प्लेयर को दो येलो कार्ड मिल जाते हैं, तो उसे रेड कार्ड माना जाता है.

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भावुक हुए एम्बोलो

रेड कार्ड मिलने के बाद, स्विट्जरलैंड के फॉरवर्ड ब्रील एम्बोलो काफी भावुक हो गए. ग्राउंड छोड़ते वक्त उनकी आंखों में आंसू थे. इस दौरान टीम के साथी उन्हें सांत्वना देते नजर आए. एम्बोलो ने अगर यह गलती न की होती तो हो सकता मैच का नतीजा कुछ और होता.

एम्बोलो को रेड कार्ड मिलने से स्विस टीम के कोच मुरात याकिन सहमत नहीं थे. मैच के बाद उन्होंने कहा,

एम्बोलो को येलो कार्ड देने का कोई कारण नहीं था. यह नुकसान न पहुंचाने वाली स्थिति थी. एम्बोलो को खेलने देना चाहिए था.

कोच ने आगे कहा,

हमको एक ऐसे नियम की वजह से सजा मिली, जो बिल्कुल गलत है. मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा. बिना जरूरत के बीच में दखल देना बेहद दुखद है. इस नियम का फुटबॉल से कोई लेना-देना नहीं है.

सेमीफाइनल में पहुंचा अर्जेंटीना

12 जुलाई को कन्सास में खेले गए क्वार्टर फाइनल मुकाबले में अर्जेंटीना ने स्विट्जरलैंड को 3-1 से हराकर सेमीफाइनल में एंट्री की. पहले हाफ में अर्जेंटीना ने 10वें मिनट में गोल करके बढ़त बनाई. मैक एलिस्टर ने कॉर्नर से मिले मेसी के क्रॉस पर गोल किया था.

इसके बाद, 67वें मिनट में स्विट्जरलैंड ने कमबैक किया. डैन एनडॉय ने गोल करके स्विट्जरलैंड को 1-1 से बराबरी पर ला दिया. फिर, निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें 1-1 से बराबरी पर रहीं. इंजरी टाइम में भी कोई गोल नहीं हुआ.

इसके बाद मैच एक्स्ट्रा टाइम में गया. अतिरिक्त समय में अर्जेंटीना ने जोरदार हमला बोला. 112वें मिनट में जूलियन अल्वारेज को मौका मिला. उन्होंने अविश्सनीय गोल करके अर्जेंटीना को 2-1 की लीड दिला दी. उनके इस गोल को टूर्नामेंट का बेस्ट गोल माना जा रहा है.

120+1वें मिनट में अर्जेंटीना ने फिर काउंटर अटैक किया. स्विट्जरलैंड के कॉर्नर के दौरान बने इसे मूव में थ‍ियागो अल्माडा तेजी से गेंद को आगे लेकर बढ़े. लेकिन, स्वि‍स गोलकीपर ग्रेगोर कोबेल ने ब्लॉक कर गेंद को अंदर जाने से रोक दिया. बॉल उनके पैरों में लगकर रिबाउंड कर गई. तब तक लाउतारो मार्टिनेज स्विस पेनल्टी एरिया में पहुंच चुके थे. उन्होंने बॉटम राइट कॉर्नर पर तीर की रफ्तार में गोल दागकर अर्जेंटीना को सेमीफाइनल में पहुंचा दिया. इसी के साथ क्वार्टर फाइनल मुकाबला अर्जेंटीना ने 3-1 से अपने नाम कर लिया.

स्विट्जरलैंड की टीम 1954 के बाद पहली बार क्वार्टर फाइनल में पहुंच थी. लेकिन इस बार भी टीम का सफर क्ववार्टर फाइनल में ही थम गया. अब सेमीफाइनल में अर्जेंटीना की टीम इंग्लैंड से खेलेगी. यह मुकाबला 16 जुलाई को होगा.

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