The Lallantop

'बम कैसे बनाऊं?' AI से पूछ रहे अलकायदा और बोको हराम के आतंकी, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

आतंक की ट्रेनिंग से लेकर Explosives बनाने, हमले की प्लानिंग; हर चीज के लिए AI की ट्रेनिंग दी जा रही है. साथ ही आतंकियों को अपनी Online Activity और पहचान छुपाने के लिए VPN और Encrypted Software का इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी जा रही थी.

Advertisement
post-main-image
आतंकी AI का इस्तेमाल करना सीख रहे हैं (PHOTO-AI Generated/Business Today)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • एक नई स्टडी में बताया गया है कि आतंकी संगठन जैसे अलकायदा, ISIS और बोको हराम AI टूल्स का इस्तेमाल कर विस्फोटक बनाने और हमलों की योजना बनाने में लगे हैं।
  • आतंकी संगठनों ने AI के उपयोग के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जिसमें वे VPN, एन्क्रिप्शन, और चैटबॉट सुरक्षा प्रतिबंधों को बायपास करना सीखते थे।
  • CIA समेत कई खुफिया एजेंसियां चेतावनी दे रही हैं कि आतंकवादी समूह AI का इस्तेमाल हथियारों के पुर्जे डिजाइन करने और 3D-प्रिंटिंग में कर रहे हैं, जिससे सुरक्षात्मक खतरे बढ़ रहे हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI. एक ऐसी चीज है जो बड़े से बड़े टास्क को चुटकियों में पूरा कर देता है. लेकिन हर वो चीज जिसका अच्छा इस्तेमाल हो सकता है, उसका बुरा इस्तेमाल होने की गुंजाइश भी उतनी ही होती है. यही AI के साथ भी हो रहा है. एक नई स्टडी से पता चला है कि दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन जैसे अलकायदा, इस्लामिक स्टेट (IS) और बोको हराम भी अटैक की प्लानिंग और बम बनाने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

इस स्टडी के पब्लिश होने से पहले रिसर्चर डॉ जूलिच ने इसे 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' के साथ शेयर किया था. उनकी स्टडी के मुताबिक आतंकी संगठन AI टूल्स का इस्तेमाल करके विस्फोटक बनाने, हथियारों को अपग्रेड करने और दुश्मनों पर हमले के नए तरीके सोचने का काम कर रहे हैं. आतंकी संगठन बोको हराम के सबसे मेन ग्रुप 'इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस' के एक पूर्व कमांडर ने पिछले साल डॉ जूलिच को AI चैटबॉट के इस्तेमाल के बारे में बताया था. उसने डॉ जूलिस से एआई के बारे में बताते हुए कहा,

इसमें आप बस सवाल टाइप करते हैं या बोलकर पूछते हैं और यह आपको डिटेल में जवाब देता है. जैसे 'मैं बम कैसे बना सकता हूँ?' और फिर यह आपको तरीका बता देता है. यह बिल्कुल एक इंसानी रोबोट जैसा है! हमने इसका बहुत इस्तेमाल किया.

Advertisement
Boko Haram के कई सदस्यों ने माना

ऐसा नहीं है कि डॉ जूलिच यूं ही इस नतीजे पर पहुंच गए. उन्होंने अपनी स्टडी के लिए नाइजीरिया में बोको हराम के 27 पूर्व सदस्यों के साथ लगभग 60 इंटरव्यू किए. इसमें से कई लोगों ने बताया कि AI चैटबॉट्स का इस्तेमाल ऐसी टेक्निकल जानकारी पाने के लिए किया जा रहा था, जिससे हथियारों को बेहतर बनाने और हमलों की योजना बनाने में मदद मिल सके. बोको हराम के पूर्व सदस्यों ने बताया कि ग्रुप ने AI की ट्रेनिंग के लिए सेशन आयोजित किए थे. इन सेशंस को कथित तौर पर इस्लामिक स्टेट (ISIS) से जुड़े लोग चला रहे थे. इन सेशंस में AI चैटबॉट्स का ज्यादा असरदार तरीके से इस्तेमाल करना सिखाया जाता था.

VPN इस्तेमाल करना सिखाया गया

डॉ. जूलिच की स्टडी के मुताबिक, ट्रेनिंग सेशन के दौरान ये भी सिखाया जाता था कि अपनी ऑनलाइन एक्टिविटीज को कैसे छिपाया जाए. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि इंटरनेट पर सर्फिंग के दौरान आपका डेटा गुप्त रहे. स्टडी के मुताबिक अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए VPN और एन्क्रिप्टेड सॉफ्टवेयर वाले लैपटॉप का इस्तेमाल किया जाता था. ट्रेनिंग देने वाले ने उन्हें AI अकाउंट बनाना, काम के जवाब पाने के लिए सही तरीके से सवाल पूछना और चैटबॉट्स की सुरक्षा पाबंदियों (Security Restrictions) को बायपास करना भी सिखाया. 

यह भी पढ़ें: कैसे काम करता है दुनिया का सबसे क्रूर आतंकवादी संगठन

Advertisement

रिपोर्ट में ट्यूनीशिया के एक 27 साल के व्यक्ति के मामले का जिक्र किया गया है. उस व्यक्ति को मई में पेरिस में एक म्यूजियम या यहूदी स्थल पर हमले की कथित साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. जांच करने वालों ने बताया कि इस हमले की योजना बनाने में AI का इस्तेमाल किया गया था. जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में आतंकवाद मामलों के एक्सपर्ट डैनियल बाइमैन कहते हैं कि आतंकवादी ग्रुप सिर्फ चैटबॉट पर निर्भर नहीं रहते. इसके बजाय वे ChatGPT, Claude, Gemini, Grok और DeepSeek जैसे अलग-अलग AI प्लेटफॉर्म पर जाते रहते हैं.

आतंकियों के हाथ AI 

इस मामले पर CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने भी अपने विचार रखे थे. बीते दिनों ही उन्होंने कहा था कि आतंकवादी समूहों का AI इस्तेमाल करना डिजिटल परमाणु हथियारों के बराबर है. वहीं अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का कहना है कि कुछ आतंकवादी समूह 3D-प्रिंटेड हथियार के पुर्जे बनाने में मदद के लिए भी AI का इस्तेमाल कर रहे हैं. एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, AI का इस्तेमाल ड्रोन के पुर्जे, हथियार के कंपोनेंट और गोला-बारूद की फिटिंग को डिजाइन और बनाने में भी किया जा रहा है.

वीडियो: आसान भाषा में: अल-कायदा, ISIS के पास पैसे कहां से आते हैं?

Advertisement