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भुवी की हुई वापसी, अब शमी की बारी? बुमराह के कारण NZ सीरीज में मिल सकता है मौका

Ind vs NZ : टीम इंडिया में Bhuvneshwar Kumar की वापसी हो गई है. उन्हें न्यूजीलैंड के ख‍िलाफ T20I सीरीज के लिए चुना गया है. ऐसे में अब ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या ODI सीरीज के लिए Mohammed Shami की दोबारा एंट्री हो सकती है.

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भुवनेश्वर कुमार के बाद मो. शमी की भी टीम इंडिया में वापसी हो सकती है. (Courtesy: PTI)

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  • भुवनेश्वर कुमार ने चार साल के इंतजार के बाद भारतीय T20I टीम में वापसी की है, जो न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी सीरीज के लिए चयन का संकेत माना जा रहा है।
  • मोहम्मद शमी ने घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है पर मार्च 2025 के बाद से नेशनल टीम से बाहर हैं, जबकि टीम प्रबंधन जसप्रीत बुमराह का वर्कलोड मैनेज कर सकता है।
  • भुवनेश्वर की वापसी से लंबे समय बाद अनुभवी तेज गेंदबाजों को मौका मिलने की संभावना बढ़ी है और इसके बाद मोहम्मद शमी को भी ODI टीम में शामिल किए जाने पर विचार हो सकता है।

4 साल के लंबे इंतजार के बाद भुवनेश्वर कुमार की भारतीय T20I टीम में वापसी हो गई है. ऐसे में क्रिकेट के गलियारों में एक और नाम की चर्चा तेज हो गई है. मोहम्मद शमी. शमी मार्च 2025 में खेले गए चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल के बाद से नेशनल टीम से बाहर है. लेकिन, इस दौरान वो घरेलू क्रिकेट की पिचों पर लगातार पसीना बहा रहे हैं. ऐसे में क्या न्यूजीलैंड के ख‍िलाफ ODI सीरीज में उनकी भी वापसी संभव है?

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ये सवाल इसलिए क्योंकि पिक्चर में एक बड़ा ट्विस्ट है. न्यूजीलैंड दौरे के लिए ODI और टेस्ट स्क्वॉड का ऐलान अभी बाकी है. सीरीज का चौथा ODI 13 नवंबर और पांचवां वनडे 15 नवंबर को खेला जाना है. वहीं, पहला टेस्ट 19 नवंबर से शुरू होगा. टेस्ट सीरीज की अहमियत को देखते हुए टीम मैनेजमेंट जसप्रीत बुमराह के वर्कलोड को मैनेज करने के लिए आखिरी दो ODI से रेस्ट दे सकता है. ऐसे में बुमराह की जगह ODI स्क्वॉड में मोहम्मद शमी की जगह बन सकती है.

मान लीजिए, अगर अभी सिलेक्शन नहीं होता है. फिर भी भुवी की टीम में एंट्री ने पॉजिटिव संकेत जरूर दे दिए हैं. आगरकर एरा खत्म हो चुका है. इसके साथ ही वो जिद भी खत्म हो गई कि सिलेक्टर्स लंबे समय से बाहर चल रहे पेसर्स को दोबारा मौका देने को तैयार नहीं हैं.

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भुवी IPL में तो शमी घरेलू क्रिकेट में दिखा चुके दम

RCB के साथ IPL के पिछले दो सीजन में भुवी ने गदर काट दिया. उसी का ईनाम उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ T20I सीरीज में मिला है. 2025 और 2026 के सीजन में 30 मैचों में उन्होंने 45 विकेट चटकाए. उनके इस प्रदर्शन को कितने दिनों तक इग्नोर किया जाता?

हालांकि, इस दौरान शमी का IPL में प्रदर्शन थोड़ा फीका रहा. 22 मैचों में वो सिर्फ 18 विकेट चटका सके. उनकी इकॉनमी भी 10 के करीब रही. लेकिन, जब बात घरेलू क्रिकेट की करेंगे तो शमी एकदम अलग जोन में नज़र आते हैं. 2024 के आखिर में चोट से वापसी के बाद से उन्होंने बैटर्स की नाक में दम कर रखा है.

2025-26 के सीजन में 7 रणजी मैचों में शमी ने 37 विकेट चटकाए. उनके इस दमदार प्रदर्शन की बदौलत ही बंगाल सेमीफाइनल में पहुंचा. इसके बाद, विजय हजारे ट्रॉफी के 7 मैचों में 15 विकेट और सैयद मुश्ताक अली के 7 मैचों में 16 विकेट झटके. उन्होंने मौजूदा सीजन की शुरुआत भी दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन के लिए 7 विकेट लेकर की. इसके दम पर टीम 14 साल बाद ये टूर्नामेंट जीतने में कामयाब रही.

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तरीका अलग, लेकिन इम्पैक्ट दमदार

दोनों पेसर्स के खेलने के तरीके में भी बड़ा फर्क है. भुवी ने अपनी कम होती रफ्तार को कमजोरी नहीं बनने दिया. RCB के लिए उनकी कामयाबी का मंत्र रहा, पावरप्ले में धारदार स्विंग और डेथ ओवर्स में कमाल की वैरिएशन. आंकड़े गवाह हैं. 2025 और 2026 IPL सीजन में पहले 6 ओवरों में भुवी ने 25 विकेट निकाले. वहीं, आखिरी 5 ओवरों में उनके नाम 18 विकेट रहे. ये प्रदर्शन जोश हेजलवुड, जोफ्रा आर्चर और मोहम्मद सिराज जैसे धाकड़ पेसर्स के लेवल का रहा है. RCB के असिस्टेंट कोच ओंकार साल्वी भी भुवी की इस गेम अवेयरनेस के मुरीद हैं. साल्वी ने कहा,

सबसे पहले तो भुवी को वापसी के लिए बधाई. उनकी सबसे बड़ी ताकत है गेम को लेकर उनकी क्लैरिटी. वो चीजों को सिंपल रखते हैं और T20 की जरूरतों के हिसाब से खुद को ढालना जानते हैं.

यही नहीं, भुवी ने RCB के ड्रेसिंग रूम में रसिक सलाम, मंगेश यादव और अभिनंदन सिंह जैसे युवा पेसर्स की भी खूब मदद की है. यहां तक कि जोश हेजलवुड को भी इंडियन कंडीशंस को समझने में भुवी से काफी टिप्स मिले हैं. साल्वी बताते हैं कि भुवी हमेशा अपनी जानकारी बांटने को तैयार रहते हैं, जो उन्हें टीम का अहम हिस्सा बनाता है.

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शमी वापसी के लिए हैं बेताब 

दूसरी तरफ, शमी टीम इंडिया को एक अलग ही धार देते हैं. 64 टेस्ट, 101 ODI और 23 T20 का तगड़ा अनुभव और नई गेंद से अटैक करने की उनकी खूंखार क्षमता. सवाल यही है कि क्या घरेलू क्रिकेट का ये तूफानी प्रदर्शन सिलेक्टर्स का ध्यान खींचेगा? जैसा कि हमने ऊपर बताया, 13 और 15 नवंबर के ODI में बुमराह को रेस्ट मिलने की पूरी गुंजाइश है. ये वो मौका है, जहां शमी ODI स्क्वॉड में बिल्कुल फिट बैठते हैं.

खुद शमी भी वापसी को लेकर अपनी बेताबी छुपा नहीं रहे. चेन्नई में दलीप ट्रॉफी फाइनल के बाद उन्होंने साफ कहा था, 

इस लेवल पर अगर आप खुद से मोटिवेटेड नहीं हैं, तो आपका नज़रिया ही गलत है. आप चाहे कहीं भी खेल रहे हों, नजर हमेशा अगले लेवल पर होनी चाहिए.

बंगाल के कोच लक्ष्मी रतन शुक्ला ने तो शमी का ये जज़्बा उनके शुरुआती दिनों से देखा है. शुक्ला की कप्तानी में ही शमी ने बंगाल के लिए डेब्यू किया था. शुक्ला कहते हैं,

शमी इस सीजन किसी यंग्सटर की तरह बॉलिंग कर रहे हैं. मुझे उम्मीद है कि वो फिर से भारत के लिए खेलेंगे और वहीं अपना करियर खत्म करेंगे. आपने ऐसे कितने बॉलर्स देखे हैं जो अपनी स्टेट टीम के लिए ऐसा कमिटमेंट दिखाते हों? मैंने उन्हें तब से देखा है जब वो सिर्फ एक नेट बॉलर थे. वो मेरे भाई हैं और मुझे यकीन है कि वो आगे चलकर भारत के लिए खेलेंगे.

शमी के लिए क्या होगी आगे की राह?

भुवनेश्वर के चुने जाने से ये गारंटी तो नहीं मिलती कि शमी को भी मौका मिल ही जाएगा. क्योंकि दोनों के रास्ते और टीम की जरूरतें अलग-अलग हैं. लेकिन भुवी की एंट्री ने इतना जरूर साबित कर दिया है कि उम्र का नंबर और टीम से लंबी दूरी, अब वापसी के दरवाजे बंद नहीं करते. शमी घरेलू क्रिकेट में पसीना बहाकर वो सब कर चुके हैं, जो उनके हाथ में था. अब शमी जैसे अनुभवी गेंदबाज के लिए फॉर्मूला एकदम सिंपल है. ऐसे ही विकेट चटकाते रहो और सिलेक्शन का सिरदर्द सिलेक्टर्स पर छोड़ दो.

वीडियो: भुवनेश्वर कुमार ने ठोका सलेक्शन का दावा, क्या टीम इंडिया में अपनी जगह बना पाएंगे?

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