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बुमराह का वर्कलोड मैनेज करने के लिए BCCI का ‘मास्टरप्लान’, कहीं भारी न पड़ जाए?

IPL 2026 में Jasprit Bumrah की शुरुआत अच्छी नहीं रही है. हालांकि, इसी बीच BCCI ने उन्हें लेकर एक मास्टरप्लान बनाया है. अब ये मास्टरप्लान है या बौखलाहट अभी ये कहना जल्दबाजी होगी. क्योंकि इसका असर आगामी ODI वर्ल्ड कप 2027 पर भी पड़ सकता है.

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जसप्रीत बुमराह के वर्कलोड मैनेजमेंट को लेकर BCCI ने बड़ा फैसला लिया है. (फोटो-PTI)

टीम इंडिया के सबसे खतरनाक बॉलर जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) के लिए IPL 2026 अब तक बहुत साधारण ही रहा है. शुरुआती 5 मैचों तक विकेटलेस रहने के कारण चर्चा में रहे बुमराह, एक बार‍ फिर सुर्खि‍यों में हैं. लेकिन, इस बार चर्चा विकेट्स को लेकर नहीं है. चर्चा इसलिए क्योंकि BCCI ने उनके लिए एक ऐसा महाप्लान बनाया है, जिसे सुनकर फैन्स की धड़कनें तेज हो गई हैं. खबर ये है कि BCCI चाहता है कि बुमराह अगले 9 के 9 टेस्ट मैच खेलें. 

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श्रीलंका के खिलाफ 2, न्यूजीलैंड के खिलाफ 2 और फिर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वो ऐतिहासिक 5 मैचों की सीरीज. मकसद साफ है. WTC 2027 फाइनल का टिकट कटाना. लेकिन ये फैसला मास्टरस्ट्रोक है या फिर खतरे की घंटी? पूरा माजरा बारीकी से समझते हैं.

क्या बुमराह का शरीर ये बोझ सह पाएगा?

बुमराह का गेंदबाजी एक्शन जितना घातक है, उनके शरीर के लिए उतना ही डिमांडिंग भी है. उनकी पीठ की चोट के किस्से किसी से छिपे नहीं हैं. 2025 में इंग्लैंड के खिलाफ 5 में से सिर्फ 3 टेस्ट खेल पाए थे. अब बोर्ड उन्हें लगातार 9 टेस्ट खिलाने की बात कर रहा है. ऐसे में ये सवाल उठता है कि क्या हम अपने सबसे बड़े हथियार को ओवरयूज करके फिर से स्ट्रेस इंजरी की तरफ तो नहीं धकेल रहे? अगर ऑस्ट्रेलिया सीरीज के बीच में बुमराह का वर्कलोड बढ़ा और वो चोटिल हुए, तो भारतीय गेंदबाजी का क्या होगा?

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सिर्फ टेस्ट के चक्कर में ODI की बलि?

द टाइम्स ऑफ की इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बुमराह को टेस्ट के लिए फ्रेश रखने के लिए ODI क्रिकेट से आराम दिया जा सकता है. लेकिन, BCCI ये न भूले कि 2027 में ODI वर्ल्ड कप भी है. ODI क्रिकेट में रिदम और वर्कलोड मैनेजमेंट अलग होता है. अगर बुमराह सिर्फ रेड बॉल क्रिकेट खेलेंगे, तो ODI में उनकी वो पुरानी धार बनी रहेगी? ODI क्रिकेट भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि वहां आपको 10 ओवर का स्पेल और अलग तरह की फील्डिंग की जरूरत होती है.

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बुमराह की अपनी प्राथमिकता क्या है?

बुमराह एक स्मार्ट क्रिकेटर हैं. उन्हें पता है कि उनकी यूनिकनेस उनके शरीर की फिटनेस पर टिकी है. वो खुद भी टेस्ट क्रिकेट को सबसे ऊपर रखते हैं, लेकिन क्या वो 9 मैचों के इस मैराथन के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार हैं? बुमराह अक्सर बड़े मैचों को प्राथमिकता देते हैं. लेकिन, यहां हर मैच बड़ा बनाया जा रहा है.

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WTC फाइनल की उम्मीदें ज्यादा तो नहीं?

अब आते हैं कड़वी सच्चाई पर. टीम इंडिया फिलहाल WTC की पॉइंट्स टेबल में छठे नंबर पर है. 9 मैचों में 4 जीत और 4 हार. गणित कहता है कि अगर बुमराह दसों उंगलियों से विकेट भी चटका लें, तब भी फाइनल की राह बहुत पथरीली है. श्रीलंका और न्यूजीलैंड को उनके घर में हराना और फिर ऑस्ट्रेलिया को धूल चटाना. ये कोई बच्चों का खेल नहीं है. सिर्फ एक खिलाड़ी के दम पर आप टेबल के नीचे से टॉप पर नहीं पहुंच सकते. बाकी टीम को भी सुपरमैन बनना होगा.

BCCI का इरादा नेक हो सकता है, लेकिन बुमराह 'मशीन' नहीं हैं. वो प्रेशियस एसेट हैं. कहीं ऐसा न हो कि उन्हें 9 टेस्ट खिलाने के चक्कर में हम उन्हें अगले 1 साल के लिए बेड रेस्ट पर भेज दें. इससे नुकसान सिर्फ WTC का नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य का भी होगा.

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