बाबर आज़म. पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान और मौजूदा क्रिकेट की दुनिया के टॉप बैटर्स में से एक. बाबर की कवर ड्राइव के फैन ऑलमोस्ट पूरी दुनिया में हैं. ऑलमोस्ट इसलिए, क्योंकि विराट कोहली अभी खेल रहे हैं. बाबर पर लौटें, तो वह अक्सर ही चर्चा में बने रहते हैं. कभी अपनी बैटिंग, तो कभी कप्तानी के लिए उन्हें सुर्खियों में रहना खूब आता है.
बाबर आज़म के साथ 'नीचता' करने से पहले आंखें तो खोल लेते!
ये चल क्या रहा है?
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लेकिन हाल के कुछ दिनों में वह गलत कारणों से चर्चा में रहे. कारण भी ऐसे, जिनका कोई आधार ही नहीं. किसी पैरोडी अकाउंट ने एक ट्वीट किया और 'ऑल इंडिया स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट असोसिएशन' ने इस ट्वीट को ब्रह्मवाक्य मान इस पर इंट्रो और बॉडी चिपकाते हुए ख़बर दूर-दूर तक फैला दी. लोगों को बता दिया कि बाबर ऐसे हैं, बाबर वैसे हैं.
सूत्रों के आधार पर होने वाला ये जर्नलिज़्म वैसे तो भारत में बहुत प्रचलित है. लेकिन आजकल इस विधा ने नई ऊंचाइयां टाप रखी हैं. ज्यादा दूर नहीं जाते हुए मैं बस अपनी फील्ड में ही रहूंगा. और आज चर्चा ए आम का विषय ऐसी ही पत्रकारिता रहेगी.
'ऑल इंडिया स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट असोसिएशन' जहां कभी सूत्रों के आधार पर प्लेयर्स के करियर बनाए और बिगाड़े जाते हैं, तो कभी पूरी तरह से फ़ेक न्यूज़ फैलाकर देश को सपने बेचे जाते हैं. तमाम ऐसे उदाहरण हैं, जहां किसी प्लेयर का करियर ऐसे सूत्रों ने तबाह कर दिया. और इस तबाही के बाद कभी माफी भी नहीं मांगी.
टोक्यो ओलंपिक्स के दौरान ऐसे ही एक बड़े पत्रकार ने टोक्यो में बैठे-बैठे जादुई छड़ी के जरिए मीराबाई चानू के सिल्वर मेडल को गोल्ड मेडल में बदल दिया. और ऐसा बदला कि पूरा देश खुश हो गया. उछलने लगा, खुशियां मनाई जाने लगीं. हालांकि ये खुशियां बहुत देर नहीं टिकीं. इस फुग्गे में पिन लगी नियमों द्वारा. नियम, जो ये ख़बर ब्रेक करने वाले तथाकथित खेल पत्रकार को मालूम ही नहीं थे.
लेकिन बाबर का केस तो एकदम अलग ही है. एक अकाउंट, जिसके बायो में ही लिखा है कि वह पैरोडी अकाउंट है. जिसका यूजरनेम, डिस्प्ले नेम और प्रोफाइल पिक्चर पहली नज़र में बता देती हैं कि ये अकाउंट भरोसे के योग्य नहीं है. लेकिन हमें इससे क्या? हमारा लक्ष्य तो किसी तरह अपने यहां भीड़ जुटाने का है. भले ही वो भीड़ जुटाने के लिए हमें झूठ बोलना पड़े. या कोई घटिया हरकत करनी पड़े.
एक पैरोडी अकाउंट ने कुछ ट्वीट किया, और हमारे मशहूर खेल पत्रकारों ने इसे हाथों-हाथ लपकते हुए इस पर ख़बर बना दी. यहां तक कि पाकिस्तानी पत्रकार भी इसे लेकर श्योर नहीं थे. वो भी ख़बर नकारने की जगह इन फोटोज और वीडियोज को शेयर ना करने की अपील ही कर रहे थे. यानी भारत और पाकिस्तान दोनों ओर की खेल पत्रकारिता ऐसे ही चल रही है.
या यूं कहें कि बाबर पर लोगों का पूरा ऐतबार नहीं था. लोगों के मन में कहीं ना कहीं शक़ था कि बाबर ऐसा कर सकते हैं. इसीलिए किसी ने उन्हें संदेह का लाभ भी नहीं दिया. लेकिन इसके बावजूद, किसी भी व्यक्ति से जुड़ी ऐसी ख़बर बिना किसी प्रॉपर सूचना के कैसे चलाए जा सकते हैं? सवाल तो यही है. बाबर या कोई भी और बंदा कैसा भी हो, लेकिन बतौर पत्रकार हमें तो सोचना चाहिए.
इस मामले में ना तो कोई शिकायत थी और ना ही कोई सामने आया था. यहां तक कि वायरल वीडियो और तस्वीरें भी भरोसे के योग्य नहीं थीं. क्योंकि उन्हें ट्वीट करने वाला बंदा ही पैरोडी अकाउंट चलाता है. ट्विटर ब्लू के जरिए ब्लू टिक हासिल करने वाले पैरोडी अकाउंट के ट्वीट ने ऐसा हंगामा मचाया कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के साथ काम करने वाले फॉक्स स्पोर्ट्स तक ने इस मुद्दे पर ख़बर छाप दी.
यानी भारत और पाकिस्तान छोड़िए, बड़े-बड़े स्वनामधन्य विदेशी मीडिया हाउस भी इस चक्कर में फंस गए. और क्यों फंसे, क्योंकि उन्होंने हमारे तरफ के खेल पत्रकारों पर भरोसा कर लिया. जो कि उन्हें नहीं करना चाहिए था. क्योंकि हमारे यहां तो खेल पत्रकारिता पार्टटाइम में होती है. फुलटाइम में तो ये लोग जाने कौन से गीत गाते हैं.
लेकिन इन सबके बीच बाबर आज़म ने आपा नहीं खोया. वह शांति से अपना काम करते रहे. यहां तक कि उन्होंने इस पूरे मामले पर कोई कमेंट भी नहीं किया. और हम बाबर जैसे बड़े नाम वाले प्लेयर से इसी की की उम्मीद करते हैं. ब्रावो बाबर!
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