बधाई हो! आखिरकार गोल्ड में बदल ही गया मीराबाई चानू का सिल्वर मेडल
रंग लाई 'लॉर्ड वॉल्डेमॉर्ट और उनके दमपिशाचों' की मेहनत.
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डरिए मत, 'तत्क्षण गोल्डासन्न' नामक मंत्र मारकर Mirabai Chanu Silver Medal को Gold में बदल रहे हैं Lord Voldemort (एपी की तस्वीर, वॉर्नर भाइयों से साभार)
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जी हां, आपने सही पढ़ा. भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू के ओलंपिक्स सिल्वर मेडल को गोल्ड मेडल में बदल दिया गया है. इंटरनेशनल ओलंपिक्स कमिटी यानी IOC ने 'ऑल इंडिया स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट असोसिएशन' के सूत्रों की मांग पर यह फैसला किया. बताते हैं कि IOC इन सूत्रों की पहुंच और पकड़ से बेहद प्रभावित है. और उन्हें यह भी लगता है कि एक बार इनके द्वारा घोषणा कर दिए जाने के बाद मीराबाई को गोल्ड ना देने का कोई मतलब नहीं है.
अब आप सोच रहे होंगे कि हम ये क्या ही लिख रहे हैं. लेकिन आपने ये उस वक्त बिल्कुल भी नहीं सोचा होगा, जब वॉल्डेमॉर्ट बनकर मीडिया के एक तबके ने दिन-दहाड़े चानू के सिल्वर को गोल्ड में बदल दिया था. वो भी सूत्रों के दम पर. सूत्र भी कैसे, बिल्कुल दमपिशाचों जैसे. जो अंधेरे से निकलते हैं और सच्ची ख़बरों के प्राण हर लेते हैं. आप सोचते भी क्यों, आपको तो गोल्ड मेडल दिख रहा था.
और भारत में ओलंपिक्स गोल्ड मेडल इतना Uncommon यानी असामान्य है, कि पिछले 61 साल में हमने सिर्फ तीन गोल्ड मेडल देखे हैं. जी हां, 61 साल यानी इतना वक्त, जितने में सामान्यतः तीन पीढ़ियां धरा पर आ जाती हैं. ऐसे में जनता बेताब रहेगी ही. फिर क्लिंट बार्टन उर्फ हॉकआई चाहे जितना ही कहें,
'मुझे उम्मीद मत दो'लेकिन इस बेताब जनता को झूठी उम्मीद देने वालों का क्या? बिना समयमणि के समय बदलने की कोशिश करने वालों का क्या करें? इनने हवा में ख़बरें चलाकर चानू के सिल्वर को गोल्ड में बदल दिया. पूरे दो दिन तक दुनिया में यही ख़बर छाई रही. भले ही IOC और वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी यानी WADA को इस बारे में कुछ नहीं पता था. लेकिन भारत के महान पत्रकारों ने ना सिर्फ चाइनीज गोल्ड मेडल विनर वेटलिफ्टर का डोप टेस्ट करा दिया, बल्कि चानू से शायद उनका सिल्वर मेडल भी मांग लिया, For Exchange purpose... you know. हालात ऐसे बने कि उसी दिन इंडियन ओलंपिक्स कमिटी यानी IOA के जनरल सेक्रेटरी राजीव मेहता साब को खुद सामने आना पड़ा. उन्होंने ट्वीट किया,
'वेटलिफ्टिंग के मामले पर वाडा या IF/oc की ओर से कोई ऑफिशल ख़बर नहीं है.'
लेकिन अफसोस, मेहता साब का यह ट्वीट कुछ दर्जन लोगों तक ही पहुंचा. जबकि दिग्गज पत्रकार लोग मीराबाई के नए मेडल की ख़बरें करोड़ों लोगों तक पहुंचा चुके थे. और इस मामले में उन पत्रकारों को क्या ही दोष दें. कायदे के काम और खानापूर्ति में अंतर तो होता है ना ब्रो? ये जो खानापूर्ति वाले हैं इन्हें क्या पता कि नियम क्या हैं, कायदे क्या होते हैं. इन्हें तो बस कुछ भी, हां भई, कुछ भी रिपोर्ट कर देना है. सीनियर जर्नलिस्ट केपी मोहन ने इस मामले में उसी दिन कायदे की बातें की थीं. उन्होंने ट्विटर पर लिखा था,No official news from wada and IF/oc till now regarding wight lifting issue.
— rajeev mehta (@rajeevmehtaioa) July 26, 2021
'इवेंट के 48 घंटे बाद भी एथलीट का टेस्ट हो सकता है. लेकिन इसका उस इवेंट से कोई मतलब नहीं रहेगा. वो तो हो चुका. यह उस वजन कैटेगरी से जुड़े डोपिंग कंट्रोल प्रोसेस के पूरा होने के साथ ही खत्म हो चुका होता है. यानी यह 24 जुलाई को ही पूरा हो चुका था. सामान्य तौर पर IOC सभी मेडल विनर्स और कुछ अन्य लोगों का भी टेस्ट करता है. कई बार तो यह आठवें और नौवें नंबर तक भी जाता है. और यह पूरी प्रोसेस इवेंट खत्म होने के कुछ घंटों के अंदर ही पूरी हो जाती है. अगर नोटिस के बाद भी सैंपल नहीं मिला तो एथलीट को रोका जा सकता है. यहां तक कि उसके पूरी रात रुकने की व्यवस्था भी होती है. पहले की तरह अब IOC टेस्ट और रिजल्ट के मैनेजमेंट में सीधे नहीं शामिल होता. IOC के लिए यह जिम्मा इंटरनेशनल टेस्ट एजेंसी नाम की संस्था का है.'इतना ही नहीं, फर्स्टपोस्ट स्पोर्ट्स के एडिटर अमित कामत ने तो सीधे इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी के साथ मेल पर हुई बातचीत ही सोशल मीडिया पर रख दी थी. लेकिन समस्या वही, ये चीजें कुछ दर्जन लोगों तक ही पहुंची. अब इससे पहले कि आप पूछो कि हमने 26 जुलाई को कुछ क्यों नहीं किया, तो हम बता दें कि हम मजबूर हैं. जैसे हैरी पॉटर 11वें बर्थडे से पहले हॉगवर्ट्स नहीं जा सकता था, वैसे ही हम सबकुछ नहीं कर पाते, कुछ ना कुछ छूट ही जाता है. लेकिन एक बात तो पक्की है, सिर्फ छूटता है, हम भूलते नहीं. इसलिए आज हमने सोचा कि इस पर बात कर ही लें. वैसे एक बात बताएं, कोई कुछ भी कहे. कितने भी दावे करे कि उसके सूत्रों ने बताया, उसने अपने कानों से देखा या आंखों से सुना. लेकिन सच ये है कि ये वाली अफवाह अमरिक्का में बैठे एक महानुभाव ने शुरू की थी. और उनका इतिहास देखें तो उनका चाइना से जो भी है, पर्सनल है. चाइना के खिलाफ लिखने का कोई मौका नहीं चूकते. बस उनने सिर्फ अपना डे टू डे वर्क किया. और यहां के महान खेल पत्रकार वही लेकर झूल गए.

