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'एशियन गेम्स कोई एक्सपोजर टूर नहीं', खेल मंत्री बोले- नहीं भेजी जाएगी फुटबॉल टीम

आपको बता दें कि एशियन गेम्स की शुरुआत 19 सितंबर से होगी. गेम्स में खिलाड़ियों को भेजने के सवाल पर मांडविया ने कहा कि एशियन गेम्स कोई एक्सपोजर ट्रिप नहीं है .

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एशियन गेम्स के लिए आखिरी लिस्ट जारी नहीं की गई है. (Photo-PTI)

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  • भारत इस बार एशियन गेम्स में केवल 600 से कम खिलाड़ियों का दल भेजेगा, जिनमें केवल मेडल की संभावनाएँ रखने वाले खिलाड़ी शामिल होंगे, अन्य खिलाड़ियों को नहीं भेजा जाएगा।
  • खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि एशियन गेम्स केवल एक्सपोजर ट्रिप नहीं है, इसलिए सिर्फ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वाले खिलाड़ियों को ही भेजा जाएगा और फुटबॉल टीम को भेजने से इंकार किया गया।
  • सेलेक्शन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी गई है और मंत्रालय, इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन तथा SAI की मंजूरी के बाद ही खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ की अंतिम सूची तैयार की जाएगी।

एशियन गेम्स में भारत इस बार 600 से कम सदस्यीय दल ही भेजने वाला है. खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने इसकी साफ वजह भी बताई है. उनका कहना है कि इस बार केवल उन खिलाड़ियों को भेजा जाएगा, जो मेडल के दावेदार हैं. खिलाड़ियों को सिर्फ ‘एक्सपोजर’ देने के लिए जापान नहीं भेजा जाएगा.

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एशियन गेम्स में चुनिंदा खिलाड़ियों को मौका

आपको बता दें कि एशियन गेम्स की शुरुआत 19 सितंबर से होगी. गेम्स में खिलाड़ियों को भेजने के सवाल मांडविया ने कहा कि एशियन गेम्स कोई एक्सपोजर ट्रिप नहीं है . यह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों के लिए मंच है. इस दौरे पर खेल मंत्रालय उन खिलाड़ियों को नहीं भेजना चाहता, जो पहले ही दौर में बाहर हो जाएं.

मंसुख मांडविया ने कहा कि खिलाड़ियों को अगर एक्सपोजर देना है तो कहीं और से भी हासिल किया जा सकता है. उसके लिए एशियन गेम्स सही मंच नहीं है. सिर्फ नौकरी पाने के लिए जो लोग एशियन गेम्स खेलना चाहते हैं, उन्हें मंजूरी नहीं मिलेगी. उन्होंने यहां यह भी साफ किया कि फुटबॉल टीम एशियन रैंकिंग में टॉप 6 में नहीं है इसलिए उन्हें नहीं भेजा जाएगा.  

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सेलेक्शन पर क्या बोले मंत्री

खेल मंत्री ने कहा कि इस बार सेलेक्शन प्रोसेस में पूरी ट्रांसपेरेंसी और पारदर्शिता बरती गई है. चयन के आधार पर ही दल चुना गया है. नौकरी पाने के लिए किसी को एशियन या कॉमनवेल्थ गेम्स में शामिल करना या किसी के परिजन को सहयोगी स्टाफ बनाकर भेजना अब नहीं होगा.

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इस बार सेलेक्शन प्रोससे को लेकर कुछ विवाद खड़े हुए थे. इसमें घुड़सवार अनुष अगरवाला और टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा का मामला प्रमुख था. एक सूत्र ने न्यूज एजेंसी को बताया कि मनिका बत्रा को खेल मंत्रालय की तरफ से कोई राहत नहीं दी जाएगी. हालांकि, मंत्रालय घुड़सवार अनुष को टीम में शामिल करने के पक्ष में है.

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अगरवाला और सुदीप्ति हजेला ने अपनी याचिका में उन्हें टीम से बाहर रखने के भारतीय घुड़सवारी फेडरेशन की एडहॉक कमेटी के फैसले को चुनौती दी है. उनकी याचिका दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल जस्टिस बेंच ने खारिज कर दी. लेकिन, अब एक डिविजनल बेंच सुनवाई कर रही है.

खेल मंत्रालय ही देगा आखिरी लिस्ट

मंत्रालय ने यह भी कहा कि चयन ट्रायल के बाद किसी एनएसएफ की ओर से जारी की गई सूची सरकार की ओर से मंजूर की गई सूची नहीं है. मंत्रालय ने कहा कि जो भी लिस्ट स्पोर्ट्स फेडरेशन जारी करती है, उस सूची को सुझाव के तौर पर भेजा जाता है. इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन और SAI इस सूची का आकलन करती है औऱ फिर मंजूरी देती है. सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं बल्कि कोच और सहयोगी स्टाफ के नाम की मंजूरी भी मंत्रालय और आईओए ही देता है.

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