भारतीय पोल वॉल्टर देव मीणा एशियन गेम्स में मेडल नहीं जीत सके. उन्हें गाइड करने के लिए नागोया में कोई भारतीय कोच नहीं था. इसके बावजूद, देव ने नेशनल रिकॉर्ड बना दिया. देव ने बताया कि फाइनल्स की रात जब कोई नहीं था, तब विदेशी कोच ने उनकी मदद की. यह वही विदेशी कोच थे, जिनके खिलाड़ी ने टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीता. देव ने अपने इन एशियन गेम्स कैंपेन के बारे में लल्लनटॉप से एक्सक्लूसिव बात की.
एशियन गेम्स में बनाया नेशनल रिकॉर्ड पर नहीं जीत सके मेडल, पोल वॉल्टर देव मीणा ने बताया अपना दर्द
भारत के पोल वॉल्टर देव कुमार मीणा ने एशियन गेम्स में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया. उन्होंने 5.60 मीटर को क्लीयर करने का प्रयास किया, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाए. मीणा सातवें स्थान पर रहे.

5.60 मीटर की ऊंचाई पार करने के लिए मैंने अपनी पूरी जान लगा दी थी. मैंने अपना सब कुछ झोंक दिया. इसे पार करने की पूरी कोशिश की. लेकिन, मौसम ठीक नहीं था और मैं पूरी तरह थक चुका था. इसीलिए मैंने 5.20 मीटर से शुरुआत की. 5.50 मीटर पार करने के बाद, मैं वैसा अटेंप्ट नहीं कर पाया.
जब मैंने नेशनल रिकॉर्ड बनाया, तो मेरे मन में बस यही बात थी कि ज़्यादा उत्साहित नहीं होना है. मैं 5.50 मीटर पर ही नहीं रुकना चाहता था. मैं यहां 5.60 मीटर के लक्ष्य के साथ आया था. भले ही मैं मेडल न जीत पाता, लेकिन मेरा लक्ष्य 5.60 मीटर पार करना ही था.
इसका श्रेय मैं अपने कोच, घनश्याम सर को दूंगा. उन्होंने मेरे लिए बहुत मेहनत की है. अगर मैं अकेला होता, तो शायद यह सब हासिल नहीं कर पाता. उन्होंने छोटी-छोटी चीजों में भी मेरा साथ दिया है. वो हमेशा मेरे साथ खड़े रहे हैं.
यह भी पढ़ें- टेस्ट मैच में पिंक बॉल फेंकने की मंजूरी, ICC के नए नियम जान लीजिए
सवाल: क्या 5.60 मीटर का लक्ष्य हासिल करने लायक लगा?अगली बार मैं निश्चित रूप से 5.60 मीटर पार करूंगा. मैं अचानक से बहुत बड़ी छलांग नहीं लगाना चाहता और फिर आगे कुछ भी हासिल करने के लिए संघर्ष नहीं करना चाहता. मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहता हूं. इस प्रतियोगिता में आते समय भी मेरे मन में यही बात थी.
मैं सोच रहा था कि मुझे कम से कम 5.60 मीटर पार करना चाहिए. लेकिन दुर्भाग्य से, मैं ऐसा नहीं कर पाया. जब मैंने 5.50 मीटर पार किया, तो मेरी तकनीक एकदम सही नहीं थी. मैं उस तरह से छलांग नहीं लगा पाया जैसा मैं चाहता था. उस समय पोल भी थोड़ा असंतुलित हो गया था.
सवाल: वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडलिस्ट EJ ओबिएना के खिलाफ पहली बार मुकाबला करने पर कैसा लगा?जापान में EJ ओबिएना के नए कोच ने मेरी बहुत मदद की. उन्होंने मुझे कई बातें बताईं, और मुझे उम्मीद है कि कभी न कभी मुझे उनके साथ ट्रेनिंग करने का मौका मिलेगा. घनश्याम सर और मैं ट्रेनिंग के लिए वहां जाने और उनसे सीखने के बारे में सोच रहे हैं. मैं विदेश में ट्रेनिंग करना चाहता हूं.
अगर मुझे कुछ बेहतरीन वॉल्टर्स के साथ ट्रेनिंग करने का मौका मिलता है, तो इससे मुझे बेहतर बनने में मदद मिलेगी. EJ ओबिएना एशिया के बेहतरीन वॉल्टर्स में से एक हैं. उनके कोच भी मुझसे प्रभावित हुए. उन्होंने मेरा मार्गदर्शन किया. साथ ही मेरे पोल में बदलाव करने में भी मेरी मदद की.
घनश्याम सर भारत से मेरा मार्गदर्शन कर रहे थे. लेकिन, मैंने ओबिएना के कोच से भी मदद मांगी. मेरे कोच मेरे साथ वहां नहीं थे. ओबिएना भी मुकाबला कर रहे थे. लेकिन, इसके बावजूद उन्होंने मेरी मदद के लिए समय निकाला. मुझे उनकी यह बात बहुत अच्छी लगी.
वीडियो: टीम इंडिया के पेसर्स वेस्ट इंडीज के सामने हुए फ्लॉप?













