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उस टीम इंडिया की कहानी, जब टैलेंट नहीं, राजा होने की वजह से कप्तान बनाया जाता था!

जब मैच से चंद घंटों पहले कप्तान के खिलाफ पूरी टीम इंडिया ने कर दी बगावत!

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पहली भारतीय टीम. तस्वीर: ट्विटर
आज भारत वनडे की नंबर दो और टेस्ट की नंबर एक टीम है. एक नहीं, दो-दो विश्वकप भारत के हक में हैं, जबकि एक बार आईसीसी चैम्पियन्स ट्रॉफी जीतकर भारत दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बना है. लेकिन 25 जून का दिन बहुत खास है. खास इसलिए, क्योंकि अगर आज के दिन भारतीय टीम मैदान पर कदम नहीं रखती, तो हम क्रिकेट में इतनी बड़ी शक्ति नहीं होते.
25 जून 1932. ये वो तारीख है, जिस दिन भारतीय क्रिकेट का जन्मदिन होता है. आज़ादी से 15 साल पहले, पहली भारतीय टीम इसी तारीख को क्रिकेट के इतिहास में दर्ज हुई थी. इसी दिन इंग्लैंड के खिलाफ आधिकारिक टेस्ट मैच खेलकर भारत टेस्ट खेलने वाला दुनिया का छठा देश बना था.
लेकिन उस पहले टेस्ट में क्या हुआ, उसे जानने से पहले ये जानना ज़रूरी है कि इन सबकी शुरुआत कैसे और कहां से हुई.
पहले भारतीय कप्तान कर्नल सी.के. नायडू
एमएस धोनी से कपिल देव और विराट कोहली तक. भारतीय क्रिकेट की मशाल थामे चले इन सितारों को सुपरस्टार कहा जाता है. लेकिन भारतीय क्रिकेट का पहला सुपरस्टार अगर कोई था तो, वो थे कर्नल सी.के. नायडू. 1895 को नागपुर में जन्म और फिर 20 साल की उम्र से फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में कदम. लेकिन भारतीय टीम के उदय के पीछे कर्नल नायडू का बड़ा योगदान है.
Ck Nayudu
पहले भारतीय कप्तान कर्नल सीके नायडू.

जब नायडू को भारतीय टीम की कप्तानी मिली, तो उनकी उम्र 37 साल थी. यानी आज जिस उम्र के आस-पास एमएस धोनी के संन्यास की बातें हो रही हैं, उस उम्र में कर्नल नायडू ने इंडिया के लिए डेब्यू किया था. कर्नल लंबे-चौड़े कद के अटैकिंग बल्लेबाज़ थे. छक्के मारना उनकी अलग ही पहचान थी. जब भी लोग उन्हें मैदान पर देखते, तो सिर्फ एक ही एक बात कहते थे
''CK Sixer...CK Sixer''
कैसे शुरू हुई भारतीय टीम के बनने की चर्चा
भारत 1932 में क्रिकेट खेलने से पहले घर में ही धर्मों वाली टीमें बनाकर खेलता था. जैसे हिन्दूज़, पार्सीज़, क्रिश्चयन्स, मुस्लिम्स. लेकिन अंग्रेज़ों की गुलामी के बीच ही क्रिकेट भारत में पैर पसार रहा था. इसी बीच सन 1926 में इंग्लैंड के अधिकारियों ने ये तय किया कि अब एक टीम भारत में भी भेजी जानी चाहिए.
साल 1926 में MCC की टीम ने भारत का दौरा किया. इंग्लैंड के पूर्व एशेज़ कप्तान आर्थर गिलिगन टीम के कप्तान और इस टीम में कई टेस्ट क्रिकेटर भी मौजूद थे. इस टूर पर 26 फर्स्ट-क्लास मैच खेलने आई MCC की टीम का एक मैच एक दिसंबर को बॉम्बे के जिमखाना में हिन्दूज़ के खिलाफ था. इस मैच में सी.के. ने छक्कों का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा और 11 छक्के लगाए, जबकि 13 चौकों के साथ उन्होंने ऐसी 153 रनों की शानदार पारी खेली. उस मैच में सी.के. ने इंग्लिश गेंदबाज़ मोरिस एस्टल और टेट जैसे खिलाड़ियों के खिलाफ ये प्रदर्शन किया था.
Arthur Gilligan
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान.

इस पारी के बाद इंग्लिश कप्तान गिलिगन ने भारतीय क्रिकेट के बारे में सोचना शुरू कर दिया. गिलिगन ने क्रिकेट अथॉरिटीज़ से खुद ये बात कही कि
''अब भारत टेस्ट क्रिकेट के लिए तैयार है और उसे टेस्ट स्टेट्स मिलना चाहिए.''
इस मैच के तुरंत बाद गिलिगन ने भारतीय क्रिकेट के कर्ता-धर्ता पटियाला के महाराजा भूपेन्द्र सिंह से दिल्ली में इस बारे में बात की, और फिर जल्दी दी भारतीय क्रिकेट बोर्ड की स्थापना हुई.
राजा-महाराजाओं के दौर का क्रिकेट
भारतीय खिलाड़ियों ने ये दिखाया था कि अब भारत पहला टेस्ट खेलने के लिए तैयार है. लेकिन इस वक्त ना तो स्पॉन्सर्स होते थे, ना ही कमाई के बाकी साधन. इसलिए बोर्ड को भी क्रिकेट चलाने के लिए महाराजाओं के रहमो-करम पर निर्भर होना पड़ता था.
इसलिए उस दौर में किसी टीम का कप्तान भी एक राजा ही होता था. हालांकि टीम बनने की योजना के बीच ऐसी चर्चाएं भी हुईं कि भारतीय टीम का कप्तान किसी अंग्रेज को बनाया जाए, जिससे कि टीम में हिन्दू, मुस्लिम या अन्य धर्मों के लोग विद्रोह न कर सकें. लेकिन ये सब बातें तभी नकार दी गईं.
भारतीय टीम का पहला इंग्लैंड दौरा
1932 में ये बात चली कि टीम इंडिया को इंग्लैंड के दौरे पर जाना है, जहां पर टीम 26 फर्स्ट-क्लास मैच और एक ऑफिशियल टेस्ट मैच खेलेगी. लेकिन अब भी बड़ा सवाल ये कि टीम की कप्तानी कौन करेगा.
चर्चा हुई कि इस दौरे की कप्तानी नवाब पटौदी सीनियर को दी जाए. चर्चा में नाम आया कि रणजीत सिंह के भांजे, दिलीप सिंह जी को भी कप्तान बनाया जा सकता है. लेकिन ये दोनों ही उस दौरे में इंग्लैंड के लिए खेलते थे. इन दोनों के नाम से चर्चा आगे बढ़ी, तो फिर पटियाला के महाराज या विजयानगरम के महाराज को कप्तानी का ऑफर दिया गया.
लेकिन भारतीय टीम का जो पूरा दौरा था वो अप्रैल से शुरू होकर अक्टूबर तक चलना था. इसलिए पटियाला और विजयानगरम के महाराजाओं ने अपने राज्यों को नहीं छोड़ने के इरादे से दौरे पर जाने से इनकार कर दिया.
पहले दौरे के लिए 2 अप्रैल 1932 को बॉम्बे के पोर्ट से 'स्ट्रेथनेवर' जहाज़ से टीम निकली. इस टीम में सात हिन्दू, पांच मुस्लिम, चार पारसी और दो सिख खिलाड़ियों को शामिल किया गया. जबकि कप्तानी का जिम्मा मिला पोरबंदर के महाराजा को. हालांकि उन्हें ये जिम्मेदारी उनके खेल की वजह से नहीं, बल्कि अच्छा बोलने की वजह से मिली थी.
Maharaja Of Porbandar
पोरबंदर के महाराज.

लेकिन जैसे ही टीम ब्रिटेन पहुंची और प्रैक्टिस या वार्मअप मैच खेले गए, तो ये साफ हो गया कि टीम को संभालना या कप्तानी पोरबंदर के महाराज के बस की बात नहीं है. उन्हें लेकर उस समय इस तरह के मज़ाक भी उड़ाए गए-
''पोरबंदर के महाराजा के पास रोल्स रॉयस ज्यादा हैं और रन कम.''
मैच से एक दिन पहले 24 जून 1932
ऐतिहासिक टेस्ट से ठीक एक दिन पहले पोरबंदर के महाराजा ने ये फैसला लिया कि वो कप्तानी से पीछे हटेंगे. साथ ही साथ उन्होंने कप्तानी का जिम्मा टीम के सदस्य कर्नल सी.के. नायडू को सौंप दिया. लेकिन टीम के ज़्यादातर खिलाड़ियों को ऑल इंडिया टीम के कप्तान के रूप में एक महाराजा या नवाब ही स्वीकार थे. फिर सी.के. तो एक आम आदमी थे.
Maharaja Of Patiala Bhupinder Singh Ji
पटियाला के महाराज, भूपिंदर सिंह

टीम के खिलाड़ियों ने मैच से पहले वाली रात बगावत कर दी और इस टीम के बागियों ने पटियाला के महाराजा से अपनी नामंजूरी ज़ाहिर की. लेकिन पटियाला के महाराजा भूपेंदर सिंह ने कड़ा आदेश देकर कहा,
''टीम का नेतृत्व नायडू ही करेंगे और जो भी इसके विरोध में है, वो फिर कभी भारत के लिए नहीं खेलेगा.''
ऐतिहासिक तारीख 25 जून 1932
फिर आई वो सुबह, जिसने भारतीय क्रिकेट टीम को जन्म दिया. लॉर्ड्स के मैदान पर डगलस जॉर्डिन के साथ पहले भारतीय कप्तान कर्नल सी.के. नायडू पवेलियन से निकले और सिक्का उछाला. इसके साथ ही भारतीय टीम टेस्ट स्टेट्स हासिल करने वाला दुनिया का छठा देश बन गया.
मैच में क्या हुआ
इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग चुनी. लेकिन मैच के पहले घंटे में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा. इंग्लैंड की टीम ने पहले तीन विकेट सिर्फ 19 रनों पर गंवा दिए. इसके बाद वैली हेमोंड और कप्तान डगलस जॉर्डिन ने टीम को संभाला और 100 रनों के पार पहुंचाया. लेकिन 100 रन पार करते ही वैली हेमोंड 35 के स्कोर पर अमर सिंह की गेंद पर बोल्ड हो गए.
Douglas Jardine
भारत के पहले टेस्ट में इंग्लैंड के कप्तान.

इसके बाद एडी पेन्टर, डगलस जॉर्डन. एक-एक करके पूरी इंग्लिश टीम 105.1 ओवरों में 259 रनों पर ढेर हो गई. इस पारी की खास बात ये रही कि इंग्लिश कप्तान डगलस जॉर्डिन को भारतीय कप्तान कर्नल सी.के. नायडू ने आउट किया था.
साथ ही साथ टेस्ट क्रिकेट की पहली पारी में ही मोहम्मद निसार ने पांच विकेट चटकाए थे. मोहम्मद निसार भारत के पहले तेज़ गेंदबाज़ थे, जिन्होंने उस दौरे पर कुल 71 विकेट चटकाए थे. उनकी और अमर सिंह की पेस जोड़ी हमेशा याद की जाती है.
Mohammad Nissar
भारतीय टीम के पहले तेज़ गेंदबाज़. मोहम्मद निसार.

जब पहली बार खेलने उतरे भारत के बल्लेबाज़
इसके बाद पहली बार भारतीय बल्लेबाज़ मैदान पर उतरे. गावस्कर-श्रीकांत, सचिन-सहवाग, रोहित-शिखर से पहले जो पहली भारतीय ओपनिंग जोड़ी मैदान पर उतरी, वो थी जनार्दन नवले और नाओमल-जिओमल की. इन दोनों ही बल्लेबाज़ों ने अच्छा संयम दिखाया और पहले दिन का खेल खत्म होने तक भारत का एक भी विकेट नहीं गिरने दिया. पहले दिन दोनों ने 30 रन जोड़े.
लेकिन इसके बाद रेस्ट डे हुआ और फिर खेल के दूसरे दिन यानी 27 जून की शुरुआत में ही 39 के स्कोर पर भारत को जनार्दन नवले के रूप में पहला झटका लगा.
इसके बाद सैय्यद वज़ीर अली खेलने उतरे. लेकिन 63 का स्कोर आते-आते ही भारत को दूसरा झटका भी लग गया. नाओमल-जिओमल 33 रन बनाकर आउट हो कर लौट गए. भारत के दोनों ओपनर्स अब पवेलियन लौट चुके थे. अब नंबर चार पर खेलने के लिए उतरे कप्तान सी.के. नायडू. वज़ीर अली साहब और नायडू ने पारी को आगे बढ़ाया. दोनों ने टीम को 100 रनों के पार पहुंचाया और दोनों की बल्लेबाज़ी जब तक जारी थी तो ऐसा लग रहा था कि भारत, इंग्लैंड को कड़ी टक्कर देगा.
Wazir Ali
भारतीय बल्लेबाज़ वज़ीर अली.

एक छोर पर नायडू आगे बड़ रहे थे और दूसरे छोर पर वज़ीर अली शानदार बल्ल्बाज़ी कर रहे थे. लेकिन 110 के स्कोर पर वज़ीर अली 31 रन बनाकर ब्राउन की गेंद पर आउट हो गए. कुछ देर बाद 139 के स्कोर तक कर्नल साहब (40 रन) भी रॉबिन्स को कैच दे बैठे. उस मैच में सी.के नायडू को फील्डिंग करते हुए हाथ में ज़ोरदार चोट लगी थी. लेकिन इसके बावजूद वो पूरे मैच में बने रहे. इन दोनों के आउट होने के बाद निचले क्रम में भारतीय बल्लेबाज़ कुछ खास नहीं कर सके. भारतीय टीम 93 ओवरों में 189 के स्कोर पर ऑल-आउट हो गई.
इंग्लैंड की दूसरी पारी की शुरुआत
मैच के दूसरे दिन ही इंग्लैंड की दूसरी पारी शुरू हुई. मेज़बान टीम को अहम 70 रनों की बढ़त मिली. लेकिन जहांगीर खान ने दूसरी पारी में इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों को बांधकर रखा. उन्होंने शुरुआत में ही होम्स (11 रन) और वूली (21 रन) को वापस पवेलियन भेज दिया.
इस पारी में उनका साथ दिया अमर सिंह ने, जिन्होंने सकलिफ को 19 के स्कोर पर कर्नल नायडू के हाथों कैच आउट करवाया. इंग्लैंड की टीम 67 के स्कोर पर 4 विकेट गंवाकर एक बार फिर से मुश्किल में थी. लेकिन इंग्लिश कप्तान जार्डिन और पेन्टर ने टीम को संभाला और दोनों ने अर्धशतक जमाकर टीम को 275 रनों का स्कोर दिया. इंग्लिश कप्तान ने 275/8 रन के बाद पारी घोषित कर दी और भारत के साामने उसका पहला टेस्ट लक्ष्य रहा 346 रनों का.
भारत के सामने Target: 346 रन
चौथी पारी में 346 रनों के दबाव वाले लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम की शुरुआत इतनी खराब नहीं रही. पहला ऑफिशियल टेस्ट खेल रहे जनार्दन नवले और नाओमल जिओमल ने मिलकर पहले विकेट के लिए 41 रन जोड़े. इसके बाद वज़ीर अली ने फिर से अच्छी बल्लेबाज़ी की और 39 रन जड़े, जबकि दूसरी पारी में कप्तान नायडू सिर्फ 10 रन बनाकर आउट हो गए.
100 रन से पहले-पहले 83 के स्कोर तक आधी भारतीय टीम पवेलिनट लौट चुकी थी. इसके बाद 108 के स्कोर तक टीम इंडिया के सात विकेट गिर गए. अब लगने लगा कि इंग्लिश टीम इस मुकाबले को 200 रनों से भी बड़े अंतर से जीतेगी.
लेकिन नौवें नंबर पर खेलने उतरे लाडाभाई अमर सिंह ने अकेले संघर्ष दिखाया और 51 रनों की शानदार पारी खेली. वो भारत के पहले अर्धशतक बनाने वाले बल्लेबाज़ भी बने. इतना ही नहीं, उनकी पारी की बदौलत भारत 187 रन बनाकर आउट हुआ और उसकी 158 रनों से हार हुई.

हारकर भी ऐतिहासक है वो तारीख
भले ही भारतीय टीम उस मैच को हार गई, लेकिन उस दौरे से भारतीय क्रिकेट को बहुत से पॉज़िटिव्स और खिलाड़ी मिले. 1932 के पहले टेस्ट की इस हार का बदला 25 जून के ही दिन भारतीय टीम ने 50 साल बाद लॉर्ड्स के मैदान पर लिया, जब कपिल देव की टीम ने इंग्लैंड में पहला विश्वकप खिताब जीता.
आज़ादी से पहले इकलौते आम आदमी की कप्तानी में भारतीय टीम पहला टेस्ट हार गई. लेकिन उसकी कहानी आज भी भारतीय क्रिकेट को प्रेरणा देती है.


इस भारतीय क्रिकेटर ने पार्क में सोकर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच खेला था 

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