महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ महीनों से NCP के दोनों धड़ों के विलय और एनडीए में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं. बताया जा रहा कि इस पर आखिरी फैसला भाभी सुनेत्रा पवार और ननद सुप्रिया सुले को करना है. अभी ये कहानी अंजाम तक नहीं पहुंची है. इस बीच महाराष्ट्र बीजेपी के एक विधायक ने दावा किया कि एनसीपी (शरद गुट) के नेता रोहित पवार कांग्रेस के पाले में जाने की तैयारी में हैं.
शरद पवार के पोते रोहित पवार के कांग्रेस में जाने का दावा क्यों किया जा रहा?
महाराष्ट्र की सियासत में फिर से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. पिछले हफ्ते खबर आई कि एनसीपी के दोनों गुट एक हो सकते हैं. हालांकि अब तक इसको लेकर कोई बड़ा अपडेट नहीं आया है. इस बीच बीजेपी के एक नेता ने दावा किया कि शरद पवार के पोते रोहित पवार कांग्रेस में जाने की तैयारी में हैं.

बीजेपी विधायक का दावा, ‘सुप्रिया सुले से है अनबन’
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी विधायक परिणय फुके ने 10 सितंबर को दावा किया कि शरद पवार के पोते परिणय फुके कांग्रेस में शामिल होने की तैयारी में है. उन्होंने दावा किया कि रोहित पवार ने महाराष्ट्र कांग्रेस के सीनियर नेता नाना पटोले को खुश करने के लिए भंडारा-गोंडिया का दौरा किया था. रोहित पवार ने भंडारा-गोंडिया में धान की खरीद, बोनस की पेमेंट और रोजगार गारंटी योजना से जुड़ी गड़बड़ियों का सवाल उठाया था.
इसके बाद बीजेपी विधायक फुके ने दावा किया कि सुप्रिया सुले और रोहित पवार के बीच सब ठीक नहीं चल रहा है. वहीं पार्टी के दूसरे नेता भी उनके खिलाफ हो गए हैं. उन्होंने कहा,
मुझे लगता है कि एनसीपी में रोहित पवार और सुप्रिया ताई के संबंध ठीक नहीं हैं. उनकी सुप्रिया ताई से बन नहीं रही है और इसी के चलते पार्टी के सीनियर नेता भी रोहित पवार के खिलाफ हैं. मुझे लगता है कि रोहित पवार कांग्रेस में शामिल होने के बारे में सोच रहे हैं.
हालांकि रोहित पवार ने इन आरोपों का खंडन किया है. उन्होंने कहा कि फुके उनके बारे में निराधार दावे करने के बजाय किसानों के मुद्दे पर ध्यान दें. रोहित पवार ने आगे कहा,
मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि मेरी चिंता मत करो. बात सीधी सी है, परिणय फुके. लोग जानते हैं कि आप देवेंद्र फडणवीस के करीबी हैं. लेकिन आप उस करीबी का इस्तेमाल विपक्षी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई और अवैध रेत खनन में शामिल बीजेपी नेताओं को बचाने के लिए करते हैं.
छात्रों की गूंज कार्यक्रम में लगवाए पोस्टर
रोहित पवार भले ही कांग्रेस में जाने की खबरों को खारिज कर रहे हैं. लेकिन इस अटकल को हवा यूं ही नहीं मिली है. पिछले दिनों पुणे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का आयोजन था. रोहित ने इस कार्यक्रम के प्रचार के लिए सैंकड़ों पोस्टर लगवाए. यही नहीं एक न्यूज प्लेटफॉर्म से बातचीत में उन्होंने कहा,
हम दोनों की पार्टी के नाम में 'कांग्रेस' शब्द है. हमारी विचारधारा में कोई अंतर नहीं है. पवार साहब (शरद पवार) कांग्रेस में थे. वह पार्टी हमारे लिए नई नहीं है. भले ही कागज पर हम अलग हों, लेकिन हम दशकों से सहयोगी रहे हैं. फिलहाल हमारे सामने सबसे जरूरी काम 2029 में राज्य और केंद्र की सत्ता में वापसी करना है.
मार्च में हुई थी राहुल से मुलाकात
रोहित पवार और कांग्रेस की नजदीकियों का सिलसिला इस साल मार्च से शुरू हुआ. जब रोहित पवार दिल्ली गए. वह विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मिलकर उनको कुछ डॉक्यूमेंट्स सौंपना चाहते थे, और अजित पवार की विमान दुर्घटना की निष्पक्ष जांच की मांग के लिए समर्थन जुटाना चाह रहे थे. राहुल ने उनको मिलने का समय दिया. दोनों के बीच एक घंटे से ज्यादा की बातचीत हुई. रोहित ने तब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव केसी वेणुगोपाल से भी मुलाकात की थी.
जूनियर पवार की सिर्फ कांग्रेस आलाकमान से नहीं, पार्टी की स्टेट यूनिट से भी नजदीकियां हैं. खासकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सापकाल से. बारामती उपचुनाव में सापकल से अपनी निकटता का इस्तेमाल करके रोहित ने कांग्रेस को अपनी चाची सुनेत्रा पवार के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ने के लिए राजी कर लिया. उनका यह स्टैंड उनकी बुआ और बारामती की सांसद सुप्रिया सुले के बिल्कुल उलट है, वो गाहे बगाहे महाराष्ट्र कांग्रेस के खिलाफ अपनी आपत्तियों को खुले मंच से जाहिर करती रहती हैं.
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राहुल गांधी के रास्ते पर रोहित
रोहित पवार शरद पवार के बड़े भाई दिनकर गोविंदराव उर्फ अप्पासाहेब पवार के पोते और राजेंद्र पवार के बेटे हैं. वे जामखेड विधानसभा क्षेत्र से एनसीपी (शरद गुट) से विधायक हैं. रोहित ने पूरे महाराष्ट्र की यात्रा करके खुद को राज्य में विपक्ष के प्रमुख चेहरे के तौर पर स्थापित किया है. वे अक्सर अकेले ही सड़क पर उतर बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार की मुखालफत करते हैं. रोहित लगातार किसानों, महिलाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं.
राहुल गांधी की तरह वे भी प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर अपनी बात रखते हैं और भर्ती परीक्षाओं में हो रही कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के मुद्दे उठा रहे हैं. इस हफ्ते उन्होंने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार को निशाने पर लिया. 7 सितंबर को पुणे में हजारों लोगों ने भीमनवार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रोटेस्ट किया था. इन प्रदर्शनकारियों को राहुल गांधी का भी समर्थन मिला.
रोहित पवार के इस रुख की तुलना राहुल गांधी से की जा रही है. कुछ हफ्त पहले, जब एनसीपी के दोनों धड़ों के विलय की अटकलें लग रही थी, तो यह चर्चा चली कि ऐसी स्थिति में रोहित कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं. हालांकि फिलहाल तो रोहित पवार ने इन खबरों का खंडन किया है. लेकिन राजनीति संभावनाओं का खेल है और पिछले कुछ सालों में महाराष्ट्र की राजनीति जिस तरह से चली है, उसे देखते हुए कुछ भी भरोसे से नहीं कहा जा सकता.
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