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समय पर नहीं हुआ सरकारी काम तो 5000 का मुआवजा, दिल्लीवालों को मिलेगी बड़ी राहत!

Delhi में नागरिकों को सही समय पर सरकारी सेवा ने देने पाने पर संबंधित अधिकारियों को 5000 हजार तक जुर्माना देना पड़ सकता है. दिल्ली सरकार नया बिल लाने की तैयारी में है. समझें इसके सारे प्रावधान.

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सरकारी काम में देरी करने वाले अधिकारियों को जुर्माना देना होगा. (फोटो- इंडिया टुडे)

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  • दिल्ली सरकार ने 14 जुलाई को 'दिल्ली राइट ऑफ सिटीजन टू टाइम बाउंड एंड ईज ऑफ डिलीवरी सर्विस बिल, 2026' को कैबिनेट से मंजूरी दी है, जो सरकारी काम तय समय में पूरा करने का प्रावधान करता है।
  • इस बिल को पास करने का कारण मौजूदा कानून के तहत अधिकारियों पर जुर्माना कम होना और सरकारी कामों में देरी से आम जनता को होने वाली समस्याएं हैं, जिन्हें कम करने के लिए सुधार की जरूरत थी।
  • यदि यह बिल विधानसभा से पारित होता है, तो सरकारी कामों में देरी पर जुर्माना और अपील प्रक्रिया ऑनलाइन लागू होगी, जिससे जनता को तत्पर सेवा और पारदर्शिता मिलेगी।

दिल्ली सरकार ने अपनी राज्य की जनता के लिए एक बिल पास किया है. बिल के तहत अगर किसी नागरिक के सरकारी काम में तय समय से ज्यादा समय लगता है, तो 5000 तक का मुआवजा दिया जाएगा. साथ ही काम से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ भी जुर्माना लगाया जाएगा. हालांकि, अधिकारियों का पक्ष जानने के बाद ही इसे अमल में लाया जाएगा.

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दिल्ली कैबिनेट ने मंगलवार, 14 जुलाई को ‘दिल्ली राइट ऑफ सिटीजन टू टाइम बाउंड एंड ईज ऑफ डिलीवरी सर्विस बिल, 2026 को मंजूरी दे दी है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बिल के पास होने के बाद दिल्ली के नागरिकों के लिए एक ऐसा कानून बनाने का प्लान किया जा रहा है, जिसके तहत सरकारी काम तय समय में पूरे हों. आम लोगों को सरकारी कामों को पूरा करने के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने से छुट्टी मिलेगी.

अगर यह बिल दिल्ली विधानसभा में पास होता है, तो यह ‘दिल्ली (राइट ऑफ सिटीजन टू टाइम बाउंड डिलीवरी ऑफ सर्विसेज) एक्ट, 2011 की जगह पर लागू होगा. यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी. बिना किसी ठोस कारण के काम में देरी करने और एप्लीकेशन को गलत ढंग से खारिज करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा. 

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काम में देरी होने पर जुर्माना लगेगा

काम में देरी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर 250 से 5000 तक का जुर्माना लग सकता है. साथ ही संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा. बिना उनकी बात सुने कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा. दिल्ली एक्ट, 2011 के तहत मौजूदा समय में अधिकारियों पर 10 रुपये से 200 तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है. नागरिक अपने काम का एप्लीकेशन ऑनलाइन डाल सकेंगे. इसके बाद उन्हें एक यूनिक एप्लीकेशन नंबर दिया जाएगा, जिससे वो रियल टाइम अपने एप्लीकेशन के स्टेटस को ट्रैक कर पाएंगे.

एप्लीकेशन के जितने भी स्टेप्स होंगे उनकी पूरी जानकारी ऑनलाइन मुहैया कराई जाएगी. जबकि, संबंधित विभाग एक ऑनलाइन सिस्टम के तहत समय सीमा की निगरानी करेगा. सरकार का ऐसा कहना है कि इस कदम से नागरिकों को बार-बार दफ्तरों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा. साथ ही, काम में तेजी और पारदर्शिता भी होगी. बिल के मुताबिक, एक ऑटोमैटिक अपील सिस्टम भी शुरू करने का प्रस्ताव है. 

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जैसे- अगर कोई अधिकारी अपने तय समय की भीतर काम को पूरा नहीं कर पाता है, तो केस अपने आप ही ‘सिटिजन ग्रीवेंस रिड्रेसल अथॉरिटी’ में एक अपील माना जाएगा. इसकी वजह से नागरिकों को अलग से कोई अन्य अपील करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. अगर इसके बाद भी काम का फैसला नहीं आता है, तो मामला अपने आप ‘दिल्ली राइट टू सर्विस कमीशन’ के पास चला जाएगा. ये काम को पूरा करने का निर्देश देने, देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने पर दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है. 

30 दिनों में अपील पर फैसला होगा

यहां पर 30 दिनों के भीतर नागरिकों के अपीलों का निपटारा किया जा सकता है. इसके अलावा अगर यह बिल कानून बनता है, तो दूसरी अपीलों की भी सुनवाई करेगा, कानून लागू होने की प्रक्रिया की निगरानी करेगा, सरकारी दफ्तरों पर नजर रखेगा, लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करेगी. इसके अलावा, दूसरी सेवाओं को शामिल करने के लिए अपील, प्रशासनिक सुधारों का सुझाव देगा और जरूरत पड़ने पर खुद भी मामले की जांच करेगा. इसके अलावा, कानून के तहत ही अपने फैसलोंं की समीक्षा करेगा और सर्विस डिलीवरी और कानून लागू होने पर सालाना रिपोर्ट भी जारी करेगा.

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