कनाडा की लेखिका मार्गरेट एटवुड एक कमाल की बात कहती हैं- War is what happens when language fails. यानी, युद्ध तब शुरू होते हैं, जब हमारी कहने, सुनने और समझने की सीमा खत्म हो जाती है. ये युद्ध की वीभीषिका है. जिस भाषा और सूचना तंत्र का इस्तेमाल युद्ध के ताप को कम करने के लिए होना था, उससे उन्माद फैलाया जा रहा है. ये हमारे आसपास रोज़ाना हो रहा है. इससे आप लगातार रूबरू हो रहे होंगे. लेकिन बाकी दुनिया का मीडिया तंत्र इस युद्ध को कैसे देख रहा है? इसके लिए चलना होगा, मीडिया संस्थानों के संपादकीय पन्नों की तरफ़. बताते हैं कि वहां क्या छप रहा है? देखें वीडियो.
इज़रायल-फिलिस्तीन पर विदेशी अखबारों के संपादकीय में क्या लिखा गया?
दुनिया का मीडिया तंत्र इस युद्ध को कैसे देख रहा है?
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