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भारत ने सिंधु नदी का पानी 'मोड़ने' का इंतजाम कर दिया? हिमाचल से दिल्ली तक मिलेगा फायदा

बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने इसे पाकिस्तान के ‘जख्मों पर नमक छिड़कने’ जैसा बताया है. वहीं हिमाचल के पूर्व सीएम जयराम ठाकुर का कहना है कि ये दोनों प्रोजेक्ट्स पूरे उत्तर भारत को फायदा पहुंचाएंगे. इससे भारत की नदियों का पानी पाकिस्तान जाने से बचेगा और हिमाचल के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा.

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चेनाब ब्यास लिंक प्रोजेक्ट का प्रस्ताव सरकार ने रखा. (फोटो-India Today)

पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौता रद्द होने के बाद एक ही सवाल था कि भारत इंडस वाटर सिस्टम का जो पानी रोकेगा, उसका इस्तेमाल कैसे होगा? उसका भी इंतजाम अब किया जाने लगा है. केंद्र सरकार ने 2620 करोड़ रुपये के दो ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स का प्रस्ताव रखा है, जिससे सिंधु नदी तंत्र (Indus Water System) का ज्यादा से ज्यादा पानी भारत के लिए यूज हो सकेगा.

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बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने इसे पाकिस्तान के ‘जख्मों पर नमक छिड़कने’ जैसा बताया है. वहीं हिमाचल के पूर्व सीएम जयराम ठाकुर का कहना है कि ये दोनों प्रोजेक्ट्स पूरे उत्तर भारत को फायदा पहुंचाएंगे. इससे भारत की नदियों का पानी पाकिस्तान जाने से बचेगा और हिमाचल के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा. 

क्या हैं दोनों प्रोजेक्ट्स?

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने सिंधु नदी सिस्टम में आने वाली चेनाब नदी से जुड़ी दो परियोजनाओं का प्रस्ताव रखा है. इसमें एक तो हिमाचल प्रदेश में बनने वाली 2,352 करोड़ की चेनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना है. जबकि दूसरी जम्मू-कश्मीर के सलाल बांध पर 268 करोड़ की तलछट बाईपास टनल (Sediment Bypass Tunnel) प्रोजेक्ट है. बताया जा रहा है कि चेनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट को जल्द ही केंद्र सरकार की मंजूरी मिल सकती है. 

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चेनाब-ब्यास लिंक टनल क्या है?

चेनाब हिमाचल प्रदेश की चंद्रा और भागा नदी के संगम से बनने वाली नदी है. चंद्रा नदी चेनाब की सहायक नदी कही जाती है. वहीं व्यास नदी हिमाचल प्रदेश से निकलती है और पंजाब में जाकर सतलुज नदी से मिल जाती है. केंद्र सरकार जो चेनाब-व्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट लेकर आ रही है, उनमें इन दोनों नदियों को ही जोड़ा जा रहा है.

प्रोजेक्ट के तहत 8.7 किलोमीटर लंबी एक टनल (सुरंग) बनाई जाएगी. यह टनल चेनाब बेसिन के एक्स्ट्रा पानी को हिमाचल की ब्यास नदी में मोड़ेगी. इससे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को सीधा फायदा होगा.

इसके लिए लाहौल में चेनाब की सहायक नदी चंद्रा के पानी को हाइड्रोलिक ढांचों और सुरंगों के जरिए ब्यास नदी की तरफ मोड़ा जाएगा. बताया जा रहा है कि इससे हिमाचल प्रदेश में 4 हजार मेगावाट ज्यादा बिजली बनाई जा सकेगी.

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भारत ने स्थगित किया था सिंधु समझौता

बता दें कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौता स्थगित कर दिया था. इसके तहत सिंधु नदी के पानी को पाकिस्तान जाने से रोक दिया गया. अब सरकार की कोशिश इस रोके गए पानी को भारत के लिए ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल की है, जिसका नतीजा ये दोनों प्रोजेक्ट्स हैं.    

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