जो पार्टियां आपसे तमाम मौकों पर वोट मांगती हैं, और वोट मांगने के लिए तमाम पोस्टर, होर्डिंग छपवाती हैं. चुनावी रैली आयोजित करती हैं. इस सबमें बहुत सारा पैसा लगता है. पार्टियों का पैसा. ये पैसा पार्टियों को चंदे से मिलता है. चन्दा देने के कई तरीके हैं. सबसे आम तरीका है कि कंपनियां या धन्नासेठ चेक काटकर चुनावी खाते में जमा करवा देते हैं. चन्दा ओके. लेकिन एक और तरीका है. काफी अपारदर्शी. वो तरीका है चुनावी बॉन्ड का. इलेक्टोरल बॉन्ड का. ये बॉन्ड ऐसी शै है कि किसी पार्टी को किसने चन्दा दिया, इसका पता नहीं लगाया जा सकता है. केंद्र की मोदी सरकार तो भी इस मुद्दे को लेकर चुप ही रहती है. अलबत्ता सरकार कोर्ट में कह देती है कि नागरिकों को ये जानने की जरूरत नहीं कि उनकी पार्टी को किसने कितना पैसा इस बॉन्ड के माध्यम से दिया. सरकार तो सरकार, उन पर सवाल उठाने वाली विपक्षी पार्टियां भी चुप्पी साध चुकी हैं. बस एकाध ही हैं, जो इस बहस में बात कर रही हैं. और ये बहस हो रही है सुप्रीम कोर्ट में. और आज के शो में हम इस पर ही विस्तार से बात करेंगे.
दी लल्लनटॉप शो: क्या है इलेक्टोरल बॉन्ड जिसपर सुप्रीम कोर्ट में बहस हो रही है?
इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
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