मान लीजिए दो लोग सेम जेंडर के हैं. दोनों आदमी हैं या दोनों औरत. और दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं. प्यार करते हैं तो शादी करने का मन बना. शादी कर लेंगे तो बच्चा गोद ले सकेंगे. राशन कार्ड बनेगा. राशन कार्ड में सबका नाम चढ़ेगा. नौकरी करेंगे. रिटायर होंगे. बीमा होगा तो बीमा का लाभ मिलेगा. शादी के सर्टिफिकेट से लेकर बाकी कागजों में नाम चढ़ेगा. लेकिन ये तभी होगा जब उनकी शादी कानूनी रूप से मान्य होगी.
दी लल्लनटॉप शो: सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दिया समलैंगिक शादी और क्वीर कपल को बच्चा गोद लेने का अधिकार
अदालतें और सरकारें अपना काम करेंगी. हम बतौर समाज अपना काम करेंगे. किसी को किसी को जेंडर आइडेंटिटी के साथ चिढ़ाएंगे नहीं. उसके सेक्शुअल चुनाव के चलते उसे उलाहनाएं नहीं देंगे. खुद को सहज करेंगे क्योंकि ये लोग कोई अजायबघर नहीं हैं. ये लोग हम हैं. हमारे जितना व्यक्ति, हमारे जितने इंसान, हमारे जितने नागरिक.
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लेकिन ये हो नहीं पाएगा. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने आज यानी 17 अक्टूबर को सेम सेक्स मैरिज को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया है. सेम सेक्स मैरिज को हमारे देश में कानूनी वैधता नहीं मिल पाएगी. वो बच्चा भी गोद नहीं ले पाएंगे. आज हम इस पर ही बात करेंगे. जजों ने क्या कहा? क्या निर्देश जारी किये? इन सब पर बात करेंगे और उनकी भी बात सुनेंगे,जो इस फैसले से सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं. शादी करना चाहते थे, लेकिन अब नहीं कर पाएंगे.
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