ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी ज़ोमैटो (Online food delivery company Zomato) ने 100 प्रतिशत शाकाहारी खाना खाने वाले कस्टमर्स के लिए 'प्योर वेज मोड' (Pure Veg Mode) और 'प्योर वेज फ्लीट' (Pure Veg Fleet) लॉन्च किया है. यह घोषणा ज़ोमैटो के फाउंडर और CEO दीपिंदर गोयल ने मंगलवार को X पर की. उन्होंने लिखा,
शाकाहारियों के लिए Zomato लाया '100% शुद्ध मेन्यू और डिलीवरी', फीचर 'देख हरे-भरे' हो जाएंगे!
यह घोषणा Zomato के फाउंडर और CEO दीपिंदर गोयल ने मंगलवार को X पर की. उन्होंने बताया कि नई लॉन्च की गई सेवा किसी भी धार्मिक या राजनीतिक प्राथमिकता के ख़िलाफ़ भेदभाव नहीं करती है.

"पूरी दुनिया में भारत में सबसे ज़्यादा शाकाहारी लोग हैं. और उनसे हमें सबसे जरूरी फीडबैक मिला है, वो ये है कि उनका खाना कैसे पकाया जाता है, कौन उनके खाने को हैंडल करता है."
फूड डिलीवरी कंपनी के फाउंडर ने बताया कि देश में शाकाहारियों से मिले फीडबैक को ध्यान में रखते हुए यह सेवा शुरू की गई है. दीपिंदर गोयल ने कहा,
"जो लोग 100 प्रतिशत शाकाहारी खाना खाना पसंद करते हैं, ऐसे कस्टमर्स के लिए हम आज ज़ोमैटो पर "प्योर वेज फ्लीट" के साथ "प्योर वेज मोड" लॉन्च कर रहे हैं."
दीपिंदर गोयल ने आगे बताया कि "प्योर वेज मोड" में रेस्तरां में उन आउटलेट्स की एक लिस्ट शामिल होगी जो केवल शाकाहारी खाना बनाते और परोसते हैं. और जो भी रेस्तरां नॉनवेज़ खाना बनाते हैं, उन्हें लिस्ट से बाहर कर देगा. दीपिंदर ने आगे लिखा,
"हमारे "प्योर वेज फ्लीट" सिर्फ़ "प्योर वेज मोड" वाले रेस्तरां से ही ऑर्डर पहुंचाएंगे. इसका मतलब यह है कि नॉनवेज़ खाना, या यहां तक कि नॉनवेज़ रेस्तरां द्वारा बनाया गया वेज़ खाना भी "प्योर वेज फ्लीट" के लिए बने ग्रीन डिलीवरी बॉक्स के अंदर नहीं जाएगा."
हालांकि, गोयल ने कहा कि नई लॉन्च की गई सेवा किसी भी धार्मिक या राजनीतिक प्राथमिकता के ख़िलाफ़ भेदभाव नहीं करती है.
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लोगों का क्या कहना है?इस पर कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी. निधि चौधरी नाम की यूजर ने लिखा,
"इसीलिए जब हम वेज़ खाना ऑर्डर करते हैं तो आप चिकन भेजते हैं."
एक यूजर ने लिखा,
"एक हलाल फ्लीट, एक झटका फ्लीट, एक बिना लहसुन वाला फ्लीट और एक एगेटेरियन फ्लीट के बारे में क्या ख्याल है? आइए लोगों को ग्रुप में बांटने के लिए उनकी धार्मिक भावनाओं और आदतों का पूरी तरह से उपयोग करें."
पानी की कमी के चलते पीक बेंगलुरु के पेज़ ने लिखा,
“क्या आप हमें पानी भिजवा सकते हैं? हरा बैग या लाल बैग कुछ भी चलेगा.”
धमेंद्र नाम के यूजर ने लिखा,
"मेरे कई रिश्तेदार और मेरे घर के पास वाले लोग रेस्तरां में काम करते हैं, इसलिए अगर आप शुद्ध शाकाहारी या जैन भोजन के बारे में पूछें तो वे बता देते हैं, लेकिन किचन के अंदर चम्मच और बर्तन एक ही इस्तेमाल होते हैं."
लॉन्च के कुछ समय बाद दीपिंदर गोयल ने बताया कि उन्हें इस सेवा से पॉज़िटीव रिस्पॉन्स मिला है. कई नॉनवेज़ खाने वाले लोगों ने ये भी कहा कि अब उनके पिता भी ज़ोमैटो चला सकते हैं. उन्होंने लिखा,
"मैं जानता हूं कि ऐसे बहुत से कस्टमर्स हैं जो कभी भी नॉनवेज़ रेस्तरां से खाना ऑर्डर नहीं करेंगे, भले ही उनका धर्म/जाति कुछ भी हो. लेकिन हमें फ्लीट को अलग करने की ज़रूरत क्यों पड़ी? क्योंकि हर किसी की कोशिश के बावजूद, कभी-कभी खाना डिलीवरी बॉक्स में गिर जाता है. उन मामलों में, पिछले ऑर्डर की गंध अगले ऑर्डर तक चली जाती है, और अगले ऑर्डर में पिछले ऑर्डर की गंध आ सकती है. इस कारण से, हमें शाकाहारी ऑर्डर के लिए फ्लीट अलग करना पड़ा. प्लीज़ ध्यान दें कि हमारे वेज़ डिलीवरी फ्लीट के हमारे डिलीवरी पार्टनर के साथ उनके खाने की पंसद पर भेदभाव नहीं किया जाएगा."
वैसे जाते-जाते एक सवाल ये भी है कि जिन लोगों को वेज़ में McDonald's या Domino’s खाना होगा तो वो कहां से ऑर्डर करेंगे?
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