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'फ्री कश्मीर' के नारे! सिक्योरिटी गार्ड्स से झड़प, दिल्ली की जामिया यूनिवर्सिटी में क्या हो रहा?

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 12 अक्टूबर से छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग पर प्रदर्शन चल रहा है. 24 अक्टूबर को टेंट हटाने की कोशिश के दौरान छात्रों और सुरक्षा गार्डों के बीच झड़प हुई. विश्वविद्यालय ने अगले आदेश तक सभी कक्षाएं ऑनलाइन कर दी हैं.

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जामिया में प्रदर्शन के दौरान विवाद हो गया (COURTSEY- ITG)

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  • जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रों ने 24 अक्टूबर को कैंपस यूनियन चुनाव फिर से कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया, जिसके दौरान सुरक्षा गार्डों और छात्रों के बीच झड़प हुई।
  • जून 2006 में हुई हिंसा के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन को भंग किया गया था, जिसके कारण छात्र चुनाव पुनः कराने की मांग कर रहे हैं।
  • झड़पों और सुरक्षा कारणों से विश्वविद्यालय ने 23 अक्टूबर को तत्काल प्रभाव से सभी क्लासेज ऑनलाइन मोड में चलाने का निर्णय लिया।

दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में 24 अक्टूबर को कैंपस यूनियन चुनाव फिर से कराने की मांग कर रहे छात्रों ने प्रदर्शन किया. इस दौरान प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स और सुरक्षा गार्डों के बीच झड़प हो गई. बाद में सभी क्लासेज को तत्काल प्रभाव से ऑनलाइन मोड में कर दिया गया. खासकर कैंपस में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब प्रदर्शन पर नजर रख रहे सुरक्षा गार्डों ने स्टूडेंट्स के लगाए गए टेंट को हटाने की कोशिश की. घटना के एक वीडियो में छात्र और सुरक्षा गार्ड आपस में उलझते हुए दिखाई दे रहे हैं. जबकि कुछ प्रदर्शनकारी अपने साथियों और सुरक्षा गार्डों को अलग करने और स्थिति को शांत करने की कोशिश कर रहे थे.

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स्टूडेंट्स यूनियन को बहाल करने की मांग

12 अक्टूबर से ही प्रदर्शनकारी जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) के चुनाव फिर से कराने की मांग कर रहे हैं. 2006 में कैंपस में हुई हिंसा और उसके कारण पढ़ाई-लिखाई में आई रुकावटों के बाद इस यूनियन को भंग कर दिया गया. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान 'फ्री शरजील इमाम', 'फ्री कश्मीर' लिखे पोस्टर सामने आए. यह प्रदर्शन अब पोस्टरों और नारों को लेकर विवादों में घिर गया है. कैंपस में ऐसे पोस्टर देखे गए, जिनमें JNU के PhD स्कॉलर शरजील इमाम की रिहाई की मांग की गई थी. शरजील इमाम को CAA विरोधी प्रदर्शनों के सिलसिले में जेल भेजा गया है और उन पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत आरोप लगे हैं.

इस बीच ‘फ्री कश्मीर’ जैसे नारों वाले पोस्टरों ने इस विवाद को और बढ़ा दिया. 23 अक्टूबर की रात कांग्रेस सांसद इमरान मसूद प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में जामिया पहुंचे थे. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें कुछ देर के लिए हिरासत में ले लिया. मसूद ने इन विवादित पोस्टरों से खुद को अलग कर लिया और कहा कि वह इन नारों का समर्थन नहीं करते हैं. हालांकि उन्होंने छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए और उनकी बहाली की मांग की.

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इमरान मसूद ने आज तक से बात करते हुए कहा, 

जो लोग इस आंदोलन को तोड़ना चाहते हैं, उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है. कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने के लिए हम अपनी जान भी दे सकते हैं.

दूसरी ओर, भाजपा भी मैदान में उतर चुकी है. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इन विवादित नारों पर विपक्षी नेताओं की चुप्पी की आलोचना की है. उन्होंने राहुल गांधी, SP प्रमुख अखिलेश यादव और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे से सवाल किया. उन्होंने पूछा कि क्या इन नारों के पीछे के लोग भारत को एक बार फिर से टूटते हुए देखना चाहते हैं. उन्होंने मांग की कि ऐसे लोगों को बेनकाब किया जाना चाहिए.

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(यह भी पढ़ें: CJP Protest ने दिलाई BHU और जामिया की याद, जब 'पुलिसिया कहर' ने झकझोरा था पूरे देश को!)

जामिया ने क्लासेज ऑनलाइन कीं

23 अक्टूबर को जारी एक नोटिस में यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ऑफिस ने कहा कि मौजूदा हालात और कैंपस में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत को देखते हुए अगले आदेश तक सभी कोर्स ऑनलाइन चलाए जाएंगे. यूनिवर्सिटी ने इस कदम को एक एहतियाती उपाय बताया है. साथ ही यह भी कहा कि पढ़ाने के तरीके में बदलाव के बावजूद शैक्षणिक गतिविधियां बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगी. यह नोटिस रजिस्ट्रार प्रोफेसर मो. महताब आलम रिजवी की ओर से जारी किया गया है.

वीडियो: जामिया मिलिया में छात्र प्रोटेस्ट क्यों कर रहे हैं?

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