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'मोदी जी की सेना' सहित योगी आदित्यनाथ के बयान की 3 गलतियां!

इनमें से एक गलती आतंकी अजमल कसाब से जुड़ा झूठ है.

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कोर्ट पेच नहीं फंसाती है तो भाजपा को इस फैसले से बहुत फायदा होने वाला है. (फोटो : पीटीआई)
कांग्रेस के लोग आतंकवादियों को बिरयानी खिलाते थे. और मोदी जी की सेना आतंकवादियों को गोली और गोला देती है. यही अंतर है. कांग्रेस के लोग अजहर मसूद जैसे आतंकवादियों के साथ जी लगा करके आतंकवाद को प्रोत्साहित करती है. तो प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में आज आतंकवाद को, उनके ठिकानों को नष्ट और ध्वस्त करके आतंकवाद की ही नहीं पाकिस्तान की कमर को तोड़ने का कार्य भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार कर रही है.
बीते रविवार को गाजियाबाद की रैली में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ये स्पीच दी. बिसाहड़ा गांव में. वो वीके सिंह के लिए चुनाव प्रचार कर रहे थे. आतंकवाद की कमर, पाकिस्तान की कमर तोड़ने का मसला तो आंकड़ों के सामने आने पर पता लगेगा. वो भी तब जब सरकार की तरफ से पारदर्शी आंकड़े आएंगे. जब आएंगे तो उनके बारे में बात की जाएगी. अभी तो इस बयान की तीन लाइनों में दो गलतियां और एक अतार्किक बात सामने आती है. बारी बारी से सबकी बात कर लेते हैं. बहुत पुराना हो चुका है ये बिरयानी वाली झूठ ये बिरयानी वाला रेफरेंस बहुत बासी हो चुका है. योगी आदित्यनाथ पहले भी ये झूठी बात बोल चुके हैं रैली में. 26 नवंबर 2018 को राजस्थान की एक चुनावी रैली में योगी आदित्यनाथ ने कहा था "आप देख रहे होंगे. जिन आतंकवादियों को कांग्रेस बिरयानी खिलाती थी, उन्हें हम गोलियां खिला रहे हैं."


इसका जिक्र जुड़ा है मुंबई अटैक्स में फांसी चढ़ाए गए अजमल कसाब के साथ. अटैक करने वाले आतंकियों में बस कसाब ही था, जो जिंदा पकड़ा गया था. उसके ऊपर केस चला. इस केस में पब्लिक प्रॉसिक्यूटर थे उज्ज्वल निकम. ट्रायल के दौरान एक बार उन्होंने ये बिरयानी वाली बात कही. बोले, कसाब ने मुंबई जेल में मटन बिरयानी की फरमाइश की. इस बयान पर खूब आह-आह की लोगों ने. कांग्रेस को कोसा. मनमोहन सिंह की सरकार को कोसा. 2015 में इन्हीं उज्ज्वल निकम ने अपने श्रीमुख से कबूल किया कि वो बिरयानी वाली बात झूठ और मनगढ़ंत थी. उन्होंने अपना झूठ कबूलते हुए कहा था-
कसाब ने कभी बिरयानी की फरमाइश नहीं की. न ही सरकार ने उसे कभी बिरयानी खिलाई. ट्रायल के दौरान कसाब के पक्ष में माहौल बनता हुआ दिख रहा था. इसीलिए मैंने देश को इमोशनल करने के लिए बिरयानी वाला झूठ गढ़ा.
उज्ज्वल निकम, फोटो- रॉयटर्स
उज्ज्वल निकम, फोटो- रॉयटर्स

भारतीय सेना 'मोदी जी की सेना' नहीं है
ये दूसरी भारी गलती थी इस स्पीच की. इंडियन आर्मी यानी कि भारतीय सेना. जिसका सिद्धांत है ‘सेवा परमो धर्म:.’ अंग्रेजी में ‘सर्विस इज़ आवर ड्यूटी’. हिंदी में इसका मतलब होता है ‘देश की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है’. तीन भाषाओं में ढूंढ लिया और हर जगह यही मिला कि भारतीय सेना, देश के लिए है, देश की सुरक्षा के लिए है. कहीं भी ढूंढने पर ‘मोदी जी’ का नाम नहीं मिला. जैसा कि योगी आदित्यनाथ दावा कर रहे हैं. इस बात पर अब काफी विवाद बढ़ चुका है. आर्मी से रिटायर हो चुके कई लोग इस बयान का विरोध कर रहे हैं. दूसरी तरफ मीडिया में खबरें चलने पर चुनाव आयोग ने खुद ही इसका संज्ञान लिया है. आयोग ने इस मामले पर डिटेल रिपोर्ट मांगी है. जिस पर गाज़ियाबाद के जिलाधिकारी रिपोर्ट तैयार करेंगे. चुनाव आयोग ने पहले ही एक नोट जारी करके कहा था कि किसी भी हाल में कोई भी राजनीतिक दल चुनाव प्रचार के दौरान सैनिक या फिर सैन्य अभियानों का ज़िक्र नहीं करेंगे. न सैनिकों की तस्वीरों का इस्तेमाल करेंगे.
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आतंकवादियों को 'जी' कहने की परंपरा
तीसरी लाइन में जो आतंकवादियों के नाम के आगे जी लगाने का इल्जाम योगी ने लगाया है उससे कोई अछूता नहीं. न कांग्रेस और न बीजेपी. कुछ दिन पहले जब राहुल गांधी का 7 सेकेंड का वीडियो जारी किया गया था उसी समय बीजेपी के मंत्री रविशंकर प्रसाद का वीडियो भी आया था. जिसमें उन्होंने हाफिज सईद को जी कहा था. उसके बाद बीजेपी प्रवक्ता और पुरी से प्रत्याशी संबित पात्रा का वीडियो भी आया, जिसमें वो अफजल गुरू 'जी' कह रहे थे. सब बैक टू बैक देख लो. सबसे पहले राहुल गांधी का 'जी' रविशंकर प्रसाद का 'जी'


संबित पात्रा का 'जी'
तो आतंकवादियों का सम्मान करने में भी बीजेपी बढ़त पर है. और इस पूरे मसले से पता चलता है कि बीजेपी नेताओं को रैली स्पीच वगैरह से पहले एक फैक्ट चेक का क्रैश कोर्स करके जाना चाहिए.


 

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