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आतंकी गए थे कश्मीरी पंडित को मारने, मार दिया इब्राहिम को! देखिए वीडियो

कश्मीरी पंडित संदीप मावा ने जो कहा, वो आपको ज़रूर सुनना चाहिए

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डॉ संदीप मावा (फाइल फोटो-फेसबुक)
श्रीनगर में सोमवार 8 नवंबर को आतंकवादियों ने एक कश्मीरी पंडित की दुकान के कर्मचारी इब्राहिम खान की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस हमले की जिम्मेदारी मुस्लिम जांबाज़ फोर्स ने ली है. संगठन ने कथित तौर पर उर्दू में लिखे गए एक पत्र में कहा है कि इस हमले का असली लक्ष्य दुकान मालिक डॉ संदीप मावा और उनके पिता रोशन लाल मावा थे. हालांकि, ये दोनों ही हमले से बच गए. आतंकी संगठन ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि ये दोनों पिता-पुत्र भारतीय एजेंसियों के साथ काम कर रहे थे और इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया. वे गैर-स्थानीय लोगों को कश्मीर लाने में शामिल हैं. डॉ संदीप मावा हमले से कैसे बचे सोमवार को हुए इस हमले के बाद संदीप मावा ने आजतक की पूजा शाली से बातचीत की है. इस बातचीत में उन्होंने हमले को लेकर खुलकर बात की. संदीप मावा ने कहा,
"मुझे दिन 8 नवंबर को करीब 3 बजे पुलिस का फोन आया. उन्होंने बताया कि आप पर हमले की खुफिया सूचना मिली है. इसके बाद मैं हड़बड़ी में दूसरी गाड़ी में दुकान से चला आया. देर शाम 8 बजे दुकान बंद कर इब्राहिम मेरी गाड़ी लेकर आया. आतंकियों ने समझा कि गाडी में मैं हूं और उन्होंने गोलियां चला दीं, चार गोलियां मारीं, जिनसे इब्राहिम की मौत हो गयी."
डॉ संदीप मावा ने बताया कि इब्राहिम उनके भाई जैसा था, और उनकी फार्मेसी की दुकान पर बीते 13 सालों से काम कर रहा था. "चिढ़े हुए हैं आतंकवादी" डॉ संदीप मावा ने आजतक से बातचीत में यह भी कहा कि अब आतंकवादी चिढ़े हुए हैं और अब वे आम कश्मीरियों को ज्यादा परेशान करेंगे. डॉ मावा के मुताबिक,
"कश्मीर के लोग खुशहाली और शांति चाह रहे हैं, वे अब कश्मीर की तरक्की चाहते हैं. कश्मीरी जनता लड़ाई-झगड़े को छोड़ आगे बढ़ना चाहती है. यह बात आतंकवादियों को हजम नहीं हो रही है क्योंकि इससे उनकी अलगाववादी विचारधारा को धक्का लग रहा है. ऐसे में ये अल्पसंख्यकों (कश्मीरी पंडितों) को निशाना बना रहे हैं, अल्पसंख्यकों को मारने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की खबर बन जाती है."
"कश्मीरियत का जज्बा मुझमें भरा है, मैं अभी डरा नहीं हूं" पंडित रोशन लाल मावा ने लगभग तीन दशकों के बाद 2019 में घाटी में अपना मसाले का कारोबार फिर से शुरू किया था. प्रसिद्ध व्यवसायी रोशन लाल मावा पर अक्टूबर 1990 में उनकी दुकान के बाहर आतंकियों ने हमला किया था. उस घटना में उन्हें चार गोलियां लगी थीं. इसके बाद मावा परिवार ने कश्मीर छोड़ दिया था, हालांकि, कुछ समय बाद वे फिर वापस आए. 8 नवंबर को उनके बेटे संदीप मावा की दुकान के बाहर फिर हमला हुआ. लेकिन कई हमले झेलने के बाद भी संदीप मावा का कहना है कि वे आतंकियों से डरे नहीं हैं. बातचीत में संदीप मावा ने कहा,
"इन आतंकियों का खेल डर पर टिका है, क्योंकि इससे ही इनकी रोजी-रोटी चलती है. कश्मीर को तबाह करने से ही उनकी दुकानें चमकती हैं. अगर आप डर गए तो उनका फायदा है, नहीं तो उन्हें कश्मीर छोड़कर भागना पड़ेगा. कश्मीरियत का जज्बा मुझमें भरा है, मैं अभी डरा नहीं हूं, अगर मैं डरा होता तो श्रीनगर छोड़कर जा चुका होता. मैं यह लड़ाई लड़ना चाहता हूं. यह हिंदू, मुस्लिम, सिख, बौद्ध और ईसाई सभी को मिलकर लड़नी पड़ेगी. तभी इसका अंत होगा."
बातचीत में आगे डॉ संदीप मावा ने कहा,
"आतंकी यहां के लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं कि वे कश्मीर को आजाद करना चाहते हैं, कश्मीरियों को हक दिलाना चाहते हैं. लेकिन ऐसा है नहीं, ये तो सभी कश्मीरियों को मार रहे हैं. मैं मरता या इब्राहिम, मरा तो कश्मीरी ही. लोग समझ गए हैं कि ये बौद्धिक लोग नहीं हैं,बौद्धिक वो होता है जो, अपनी कौम को तरक्की चाहे, उसके भले की बात करे. ये पेड एजेंट हैं जो झूठ बोलकर लोगों को वेबकूफ बन रहे हैं. कश्मीरी अब इन्हें रिजेक्ट कर रहे हैं. अब आतंकवाद की नाव के डूबने का समय आ गया है."

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