एक आदमी है. थोड़ा सेंटी है, बाकी मेंटल है. नाम है वरुण ग्रोवर. इन्हें अगर आप नाम से नहीं जानते हैं तो काम से ज़रूर जानते होंगे. इन्होने गैंग्स ऑफ़ वासेपुर के गाने लिखे और मसान की कहानी लिखी थी. मसान फ़िल्म में जहां दीपक एक रेस्टोरेंट में बैठा हुआ शालू से पूछता है "अब हम फ्रेंड्स हो गए हैं न?" वहां दीपक के पीछे फ़ोकस से बाहर यही जनाब बैठे हुए थे. खैर, बहुत इंट्रो हो गया. मुद्दे की बात. ये साहब स्टैंड-अप कॉमेडी भी करते हैं. उत्तर प्रदेश से हैं. यहां आदमी मज़ाक-मज़ाक में न जाने क्या कर जाता है. ये तो खड़े होकर बस मज़ाक करते हैं. मुंबई की जनता के सामने खड़े हुए थे और बता रहे थे फ़िल्म पद्मावत के बारे में जिसका कभी पद्मावती नाम था. इस विडियो में वरुण पद्मावत फ़िल्म के पीछे की कहानी अर्थात रानी पद्मिनी की कहानी बताते हैं. वो कहानी जो मलिक मुहम्मद जायसी ने लिखी और जिसका नाम था पद्मावत. बहुत कन्फ्यूज़न हो गया. एक बार फिर क्लियर कर देते हैं.
फ़िल्म का नाम है पद्मावत. यही नाम जायसी के महाकाव्य का भी था. इसमें रानी पद्मिनी का ज़िक्र था. पहले इस फ़िल्म का नाम पद्मावती था मगर राजपूताना शान बान की खातिर अंत में लगे आई की गर्दन काट दी गई. इस गर्दन के ऊपर कोई इनाम नहीं था. इस विडियो में वरुण ने जो कहानी बताई है, और इस कहानी पर तो किसी को कोई भी ऐतराज़ नहीं होगा, उसके हिसाब से इस पूरे मसले की जड़ न अलाउद्दीन था, न कोई और इंसान. इस मुद्दे की पूरी जड़ था वो तोता जो पहले पद्मिनी के साथ ही रहता था. आगे की कहानी जानने के लिए वीडियो देखना पड़ेगा बॉस!
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