बाईं तस्वीर आशीष सागर के फेसबुक अकाउंट से ली गई है. दाईं तस्वीर प्रतीकात्मक है. (साभार- पीटीआई)
आशीष सागर. उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के पत्रकार हैं. 'वॉयस ऑफ बुंदेलखंड' नाम से अपना एक चैनल चलाते हैं. 'द प्रेस ट्रस्ट ऑफ बुंदेलखंड' के संस्थापक हैं. सोशल एक्टिविस्ट भी हैं. आशीष सागर ने पुलिस पर उन्हें टॉर्चर करने का आरोप लगाया है. उन्होंने ट्वीट और फेसबुक पोस्ट के जरिए आपबीती बताई है. लिखा है कि 16 नवंबर की रात पुलिसवाले उनके घर ऐसे आ धमके जैसे किसी अपराधी के घर रेड डालने आई हो. आशीष के मुताबिक,
बिना नोटिस या समन के देर रात भारी पुलिस मेरे दरवाजे पर आ गई. माता-पिता जो ब्लड प्रेशर के मरीज हैं, उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया.
क्या है मामला?
आशीष पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में केन नदी में अवैध खनन की रिपोर्टिंग कर रहे हैं. आरोप है कि जिले के पैलानी क्षेत्र की अमलोर मौरम खदान से नियमों का उल्लंघन कर बालू निकाला जा रहा है, जिसके चलते नदी और पर्यावरण को नुकसान हो रहा है. आशीष के मुताबिक इस खदान के संचालक गाजियाबाद निवासी विपुल त्यागी हैं. दी लल्लनटॉप को आशीष ने बताया,
मामला सैंड माइनिंग से जुड़ा है. अमलोर में विपुल त्यागी इसे चला रहे हैं. उनके पिता का नाम रामकांत त्यागी है. बीजेपी के कद्दावर नेता हैं. हमारी तनातनी मशीनों से हो रही लैंड माइनिंग को लेकर चल रही है. इसे लेकर आंदोलन चल रहा है. ऊषा निषाद सामाजिक कार्यकर्ता हैं. केन नदी के अवैध खनन को लेकर शुरू हुए विरोधी आंदोलन से जुड़ी हैं. सीओ सदर सत्यप्रकाश शर्मा ने उन पर समझौते का दबाव बनाया. जब उन्होंने समझौता नहीं किया तो इन्होंने पंचायत बुलवाई. पंचायत में ये हुआ कि समझौता नहीं करेंगे. पहले खनन रुकवाइए, फिर देखा जाएगा. इस बीच ऊषा निषाद को लगा कि उनके ऊपर केस हो सकता है तो वो लगातार जून से पत्राचार करती रहीं. उन्होंने सीओ से लेकर एसपी तक को हलफनामे दिए. लेकिन सुनवाई नहीं हुई.
आशीष ने आगे बताया कि पुलिस ने बीती 21 जुलाई को ऊषा निषाद के खिलाफ मुकदमा दायर किया. उनका कहना है कि खदान के जिस वीडियो को लेकर ये केस किया गया था, वो ढाई महीने पहले बनाया गया था. FIR में ऊषा के नाबालिग भतीजे का नाम भी जोड़ा गया. खदान में जाकर वीडियो बनाने वाले लड़के को आरोपी बनाया गया. आशीष का कहना है कि इसके बाद ऊषा निषाद को टॉर्चर करना शुरू किया. डीआईजी, एसपी सबसे गुहार लगाई, लेकिन नहीं सुनी गई. जब नहीं सुनी गई तो छठ के दिन लखनऊ में आशीष सागर ने विधानसभा के सामने आत्मदाह का प्रयास किया. इसके बाद पुलिस ने उन्हें उठा लिया. हजरतगंज थाने में बिठाए रखा. एसपी बांदा को फटकार लगाई गई. पुलिस उन्हें लेकर बांदा आई. आशीष का कहना है,
उस दिन से पुलिस मेरे पीछे पड़ी है. मेरे दोनों नंबर सर्विलांस पर लगे हैं. 14 तारीख को मैं घर पर नहीं था. मम्मी-पापा मथुरा गए थे. पुलिस घर आई. मेरे भाई से परिवार के बारे में पूछताछ की. मेरे बारे में पूछताछ की. अर्निंग का सोर्स पूछ कहा कि आपके भाई पर कई मुकदमे चल रहे हैं. वापस आने पर कोतवाल से मिल लें. इसके बाद मैंने अपने मुकदमों की लिस्ट देखी. मेरे ऊपर साल 2010 से 7 मुकदमें लगाए गए हैं इसी तरह के. उन मामलों में कभी कोई कॉन्स्टेबल तक मेरे दरवाजे पर नहीं आया. मेंटली टॉर्चर करने के लिए ये सब चीजें की गईं. डकैती, लूट जैसे मामले मेरे ऊपर लगाए गए.
इसके बाद आशीष ने कोतवाल से मुलाकात की. उन्हें बताया गया कि शासन से रिपोर्ट मांगी गई है. लेकिन अगले दिन देर रात कई पुलिसकर्मी उनके घर पहुंच गए. इस घटनाक्रम को लेकर आशीष ने बताया,
आधे लोग सादी वर्दी में और आधे वर्दी में मेरे घर पर आ गए. कोतवाल खुद मौके पर मौजूद थे. रात में सवा 10 से साढ़े 11 बजे तक पुलिस मेरे दरवाजे पर खड़ी रही. कोतवाल ने मेरी मां से दरवाजा खोलने के लिए कहा. आवाज सुन मैं बाहर आया. पुलिस ने मुझे बाहर आने को कहा लेकिन मैंने इन्कार कर दिया. मैंने पुलिस के रात में घर आने को लेकर आपत्ति जताई. कहा कि अगर पुलिस मुझसे मिलना ही चाहती है तो मैं दिन में मिलूंगा. फिर पुलिस अमर्यादित होने लगी. लेकिन देखा कि मैं नहीं मानूंगा तो आधे घंटे बाद चली गई. मैंने ट्वीट किया. थोड़ी भद्द पिटने के बाद पुलिस बैकफुट पर आई.
पुलिस क्या कह रही है?
आशीष के साथ जो हुआ उस बारे में जानने के लिए हमने पुलिस से बात की. दी लल्लनटॉप ने नगर कोतवाल बांदा को फोन किया. उनसे जब पत्रकार के टॉर्चर और रात में बिना नोटिस के घर पर पुलिस के जाने के बार में पूछा गया तो उन्होंने कहा,
मैं तो गया नहीं था. कौन सज्जन गए थे ये जानकारी नहीं है मुझे. मेरे थाने का कोई कर्मचारी नहीं गया था.
हमने एसपी से भी बात करने के कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई. दो बार कॉल किया लेकिन उनका फोन नहीं उठा.