शक सही निकला. भगौड़ा पकड़ लिया गया. मुख्तार के पास से मशीन गन भी बरामद कर ली गई. इसके बाद डिप्टी एसपी ने मुख्तार के खिलाफ पोटा के तहत मुकदमा लिख दिया. इस अधिकारी का नाम था शैलेंद्र सिंह. मगर ये बहादुरी ही शैलेंद्र को ले डूबी. सत्ता के दबाव में शैलेंद्र ना मुख्तार को गिरफ्तार कर पाए और ना कोई और कार्रवाई. उन पर इतना दबाव पड़ा कि आखिर में उन्होंने इस्तीफा दे दिया.

मुख्तार के खिलाफ मुकदमा करके मुश्किल में आ गए थे शैलेंद्र.
अपने ऊपर सत्ता के पड़े दबाव के बारे में शैलेंद्र अकसर बोलते रहे हैं. ऐसे ही जब आईपीएस अमिताभ ठाकुर और मुलायम सिंह के बीच एक धमकी देने वाला टेप जारी हुआ था और विवाद हो गया था. तब शैलेंद्र ने कहा था- आज जो कुछ अमिताभ ठाकुर के खिलाफ हो रहा है, वह सब मैं भी झेल चुका हूं. समाजवादी सरकार की कार्यशैली शुरू से ऐसी रही है. मुलायम सिंह और उनके सुपुत्र अखिलेश के सरकार की कार्यशैली में कोई परिवर्तन नहीं आया है. इसका उदाहरण अमिताभ ठाकुर का ताजा मामला है.
इस्तीफा देने के बाद शैलेंद्र सिंह राजनीति में आ गए. 2009 में वो कांग्रेस के टिकट पर चंदौली लोकसभा का चुनाव लड़े. वो रहने वाले भी चंदौली के ही हैं. चुनाव में उनको 1 लाख से ज्यादा वोट मिले. हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा. 2012 में शैलेंद्र चंदौली की ही सैयद राजा सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़े, इस बार भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले शैलेंद्र ने भाजपा जॉइन कर ली.

उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार ने इस फैसले पर मुहर लगा दी है.
और अब तो उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार है. योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं. उन्होंने फैसला लिया था कि यूपी के राजनेताओं पर लगे 20 हजार से अधिक राजनीतिक मुकदमे वापस लिए जाएंगे. इन्हीं मुकदमों में शैलेंद्र पर भी लगा तीन साल पुराना एक मुकदमा है, जिसे वापस लिया जा रहा है. ऐसे मुकदमों को वापस लेने का फैसला यूपी सरकार ने 20 दिसंबर, 2017 को ही कर लिया था.
लखनऊ के अतिरिक्त अभियोजन अधिकारी संदीप पांडेय ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच इस मामले की सुनवाई 13 फरवरी को करेगी. लखनऊ पीठ के सामने यह मामला पिछले हफ्ते ही पहुंचा है. घटना 2008 की है. जब लखनऊ की हजरतगंज पुलिस ने राज्य सूचना आयोग के दफ्तर के बाहर हंगामा करने के आरोप में शैलेंद्र सिंह और उनके समर्थकों पर केस दर्ज किया था.
ये भी पढ़ें-
PM मोदी नहीं, त्रिपुरा में BJP को बस ये आदमी जिता सकता है
भीमा कोरेगांव की असली कहानी, जो न दलित चिंतकों ने बताई, न मराठों ने
AAP के लिए कुमार विश्वास से बड़ी मुश्किल आ गई है
बीजेपी के साथ बुरा मजाक, जिसे उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया, वह कुछ घंटों बाद टीएमसी में चली गई
इस एक अकेली स्कीम के दम पर मोदी जीत सकते हैं 2019 का चुनाव
लल्लनटॉप वीडियो देखें-












