अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 30 जून को एक फैसला सुनाया जो डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन के ऑर्डर के खिलाफ है. ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका में जन्मजात नागरिकता (Birthright Citizenship) को गैर-कानूनी करार दिया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन के इस फैसले को असंवैधानिक बताया है. अच्छी बात ये है कि ये फैसला अमेरिका में रह रहे भारतीयों के हित में है. कैसे? बताते हैं.
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने से भारतीयों की चांदी, समझें सारा गणित
US birthright citizenship: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जो अमेरिकी ज़मीन पर जन्मा है, वो जन्म से ही अमेरिका का नागरिक है. कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर को ठुकरा दिया है. इस फैसले से भारतीयों को बड़ा फायदा होगा.


सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ट्रंप प्रशासन के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर को रिजेक्ट कर दिया है. इस ऑर्डर में कहा गया था कि अमेरिका में पैदा हुए वे बच्चे अमेरिका के अधिकार क्षेत्र के अधीन नहीं हैं, जिनके माता-पिता अवैध प्रवासी हैं या फिर अस्थायी रूप से अमेरिका में रह रहे हैं. यानी कोर्ट ये मानता है कि ये ऑर्डर संविधान के नागरिकता क्लॉज़ के साथ असंगत है.
कौन है अमेरिकी नागरिक?- अमेरिकी सर्वोच्च अदालत ने साफ कहा है कि जो नागरिक H-1B वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं उनके बच्चे बाई डिफ़ॉल्ट अमेरिकी नागरिक होंगे भले ही उन्हें खुद अपनी नागरिकता लेने में सालों लग जाएं.
- इसके अलावा अस्थायी वीजा पर रहने वाले छात्रों और विज़िटर्स के बच्चे, जो अमेरिका में पैदा हुए हैं, उन्हें भी जन्म से अमेरिकी नागरिकता मिलेगी.
- यह फैसला अमेरिका में पैदा हुए किसी भी अवैध भारतीय प्रवासी के बच्चों को भी जन्मजात नागरिकता सुनिश्चित करेगा.
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अब बात करते हैं कि अमेरिकी संविधान में क्या प्रावधान है? इस सवाल का जवाब है ‘just soil.’ माने 14वें संवैधानिक संशोधन के बाद संविधान में लिखा गया कि कोई भी व्यक्ति जो अमेरिकी ज़मीन में जन्मा है वो अमेरिका का नागरिक है. लेकिन प्रेसिडेंट ट्रंप ने अपने दूसरे काल में इसी पर एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी कर दिया और रोक लगा दी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा,
‘नागरिकता से जुड़ा ये संवैधानिक अधिकार है जिसे एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के ज़रिए नहीं बदला जा सकता है. अमेरिका के नागरिकों के अधिकार की रक्षा संविधान करता है न कि राष्ट्रपति.’
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में सख्त इमीग्रेशन पॉलिसी अपनाई है. जिससे कई लोगों को वीजा मिलने में मुश्किल आ रही है. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला कई भारतीयों के लिए राहत की खबर है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि करीब 30 लाख भारतीय अमेरिका में रहते हैं. इनमें H-1B वीजा, L-1 इंट्रा-कंपनी ट्रांसफर वीजा, F-1 स्टूडेंट वीजा और ग्रीन कार्ड वाले शामिल हैं.
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