ईरान-अमेरिका की जंग में अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए. जाहिर है ईरान के पास उतना उन्नत एयर डिफेंस नहीं था कि वो मिसाइलों और जहाजों को मजबूती से रोक पाए. लेकिन जब ईरान ने ड्रोन्स और मिसाइलों से जवाबी हमला शुरू किया तो अमेरिका-इजरायल की हालत खराब होने लगी. उनके तमाम महंगे एयर डिफेंस और बेस एक के बाद एक बेकार होने लगे. कतर में उनके US सेंट्रल कमांड का हेडक्वार्टर हो या बहरीन में मौजूद US नेवी की 5th फ्लीट. ईरान ने सबको भारी नुकसान पहुंचाया. अब खबर आई है कि नुकसान से ‘बौराया’ अमेरिका 5th फ्लीट के हेडक्वार्टर को बहरीन से इजरायल शिफ्ट करने पर विचार कर रहा है.
ईरान के डर से भागा अमेरिका? नेवी की 5th फ्लीट को बहरीन से इजरायल ले जाने की तैयारी
पेंटागन के कंट्रोलर जे हर्स्ट ने बीते महीने कांग्रेस को बताया था कि युद्ध के लिए विभाग की अनुमानित लागत 29 अरब डॉलर थी. लेकिन इसमें अमेरिकी बेस को हुए नुकसान की भरपाई का खर्च शामिल नहीं था.


अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इस मामले पर एक रिपोर्ट छापी है. रिपोर्ट में सैटेलाइट तस्वीरों, सोशल मीडिया फुटेज और रक्षा विभाग के रिकॉर्ड से बहरीन में अमेरिकी नौसेना के मध्य-पूर्व मुख्यालय को हुए नुकसान का पता चला है. 'वॉलस्ट्रीट जर्नल' की जांच में पता चला कि ईरानी मिसाइलों और ड्रोन्स को हमलों से कम से कम 20 अमेरिकी ठिकानों को पहले बताई गई जानकारी से कहीं ज्यादा नुकसान हुआ है. इन 20 ठिकानों में बहरीन की 5th फ्लीट का नेवल बेस भी शामिल है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस भारी नुकसान के बाद अमेरिका मिडिल-ईस्ट में अपनी मौजूदगी पर फिर से विचार कर रहा है क्योंकि हमलों में मिडिल-ईस्ट में अमेरिका के एकमात्र नेवल बेस को भारी नुकसान पहुंचा है. फरवरी से जून के बीच, ईरान ने कई बार ‘नेवल सपोर्ट एक्टिविटी बहरीन’ (NSA Bahrain) को निशाना बनाया है. हमलों में कमांड हेडक्वार्टर के अलावा कम से कम एक दर्जन दूसरी इमारतों के साथ-साथ दो सैटेलाइट कम्युनिकेशन टर्मिनल भी बुरी तरह डैमेज हुए हैं.
हालांकि, अमेरिकी सेना ने कहा है कि बेस पर कोई हताहत नहीं हुआ और हमलों का कामकाज पर कोई खास असर नहीं पड़ा. लेकिन फिर भी अमेरिका ने अधिकतर कर्मचारियों को वहां से हटा लिया. हालांकि, अभी भी अमेरिका ने कुछ स्टाफ को वहां तैनात कर रखा है.
बेस लेकर कहां जाएं?नुकसान और हमलों के बीच अमेरिकी सेना अब मिडिल-ईस्ट में अपनी मौजूदगी का फिर से आंकलन कर रही है. मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के अनुसार, सेना अब बहरीन में बेस को नए सिरे से तैयार करने, कुवैत और सऊदी अरब में अमेरिकी मौजूदगी कम करने और कुछ बेस या बेस के कामकाज को पश्चिम की ओर ले जाना चाहती है ताकि वो ईरान की मिसाइलों और ड्रोन की पहुंच से दूर रहें.
अधिकारियों ने कहा कि जिन जगहों पर हमला हुआ. हो सकता है कि उन्हें दोबारा न बनाया जाए. कमांड और कंट्रोल नोड्स को जमीन के नीचे ले जाया जा सकता है. साथ ही, अमेरिकी सैन्य क्षमताओं को पूरे क्षेत्र में और अधिक फैलाया जा सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. दो अधिकारियों के अनुसार, बेस बनाने के लिए जिन जगहों पर विचार किया जा रहा है, उनमें इजरायल भी शामिल है.
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वापस बनाने में करोड़ों डॉलर का खर्चपेंटागन के कंट्रोलर जे हर्स्ट ने बीते महीने कांग्रेस को बताया था कि युद्ध के लिए विभाग की अनुमानित लागत 29 अरब डॉलर थी. लेकिन इसमें अमेरिकी बेस को हुए नुकसान की भरपाई का खर्च शामिल नहीं था. मई 2026 में कांग्रेस की एक सुनवाई के दौरान, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ से उस नुकसान की लागत का अनुमान बताने के लिए कहा गया था. इस पर उन्होंने जवाब दिया था,
ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने की क्या कीमत है? डिफेंस डिपार्टमेंट के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कॉस्ट मॉडल और खरीद रिपोर्ट की समीक्षा के आधार पर द जर्नल का अनुमान है कि NSA बहरीन में क्षतिग्रस्त इमारतों जैसी ही इमारतें बनाने में लगभग 400 मिलियन डॉलर का खर्च आएगा. इन अनुमानों में केवल निर्माण का खर्च शामिल है. अगर इमारतों को फिर से बनाया जाता है तो मलबे को हटाने और मजबूती बढ़ाने जैसे अन्य खर्च भी कुल लागत में जुड़ सकते हैं, जो इसमें शामिल नहीं हैं.
'सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज' ने भी इस मुद्दे पर रिपोर्ट छापी है. रिपोर्ट में अनुमान लगाया कि युद्ध की कुल लागत लगभग 40 बिलियन डॉलर थी. इस अनुमान में पूरे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को हुए 2.2 बिलियन से 5.1 बिलियन डॉलर के नुकसान का हिसाब भी शामिल था, जो थिंक टैंक द्वारा क्षतिग्रस्त बताई गई संरचनाओं पर आधारित था.
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