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H-1B वीजा में किया कांड, सरकार ने पकड़ी इंडियन CEO की धोखाधड़ी, US की नागरिकता खत्म?

US H-1B Visa: 17 लोगों की लिस्ट में भारतीय मूल के नीरज शर्मा का भी नाम आ गया है. नीरज शर्मा न्यू जर्सी में मैग्नाविजन (Magnavision LLC) नाम की स्टाफिंग कंपनी चलाते थे. Donald Trump की सरकार का आरोप है कि उन्होंने H-1B वीजा में फर्जीवाड़ा किया था.

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10 जून 2026 (अपडेटेड: 10 जून 2026, 09:48 AM IST)
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भारतीय मूल के CEO पर H-1B वीजा आवेदन में धोखाधड़ी के आरोप लगा. (फाइल फोटो: ITG)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप प्रवासियों पर कहर बनकर टूटे हैं. उनके राज में अमेरिका की अब तक की सबसे सख्त डीनेचुरलाइजेशन ड्राइव चल रही है. अमेरिका में जो लोग तय नियमों को पूरा कर और कई साल तक वहां रहकर नेचुरलाइजेशन के जरिए नागरिकता हासिल करते हैं, अब उन्हीं मामलों की पड़ताल हो रही है. ट्रंप प्रशासन उन लोगों पर शिकंजा कस रहा है, जिन पर नागरिकता लेते वक्त कानून तोड़ने, गलत जानकारी देने या धोखाधड़ी करने का आरोप है. इसी मुहिम की जद में भारतीय मूल के एक चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) नीरज शर्मा समेत 17 लोग आ गए हैं. इनकी अमेरिकी नागरिकता पर अब खतरा मंडरा रहा है.

अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने सोमवार, 8 जून को एक लिस्ट जारी की है. इसमें बताया गया कि उसने अलग-अलग डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में 17 लोगों के खिलाफ डीनेचुरलाइजेशन एक्शन फाइल किया है. इन लोगों के खिलाफ गंभीर अपराधों के आरोप हैं, जिनमें नाबालिग का यौन शोषण, वायर और बैंक फ्रॉड और बिना लाइसेंस के थोक में ड्रग्स बांटना शामिल है.

यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट ने लिखा कि इमिग्रेशन और नेशनालिटी एक्ट के तहत, अगर किसी अमेरिकी नागरिक ने गैर-कानूनी तरीके से नागरिकता हासिल की है या कोई जरूरी बात छिपाकर या जानबूझकर गलत जानकारी देकर नागरिकता हासिल की है, तो उसकी नागरिकता रद्द की जा सकती है. ऐसे मामलों में नेचुरलाइजेशन का सर्टिफिकेट कैंसिल किया जा सकता है.

भारतीय मूल के CEO पर आरोप

17 लोगों की लिस्ट में भारतीय मूल के नीरज शर्मा का भी नाम आ गया है. नीरज शर्मा न्यू जर्सी में मैग्नाविजन (Magnavision LLC) नाम की स्टाफिंग कंपनी चलाते थे. ट्रंप सरकार का आरोप है कि उन्होंने 11 H-1B वीजा आवेदन फर्जी जानकारी के साथ जमा किए थे.

इन आवेदनों में दिखाया गया कि कुछ विदेशी कर्मचारियों को एक ग्लोबल फाइनेंशियल कंपनी में नौकरी मिलेगी, जबकि यह सच नहीं था. आवेदन के साथ जो लेटर लगाए गए, उन पर कंपनी अधिकारियों के फर्जी साइन थे.

US सिटिजनशिप लेते समय क्या हुआ?

जब नीरज शर्मा ने 2017 में नेचुरलाइजेशन के तहत अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन किया, तो उन्होंने शपथ लेकर कहा कि

  • उन्होंने कोई जुर्म नहीं किया है, जिसके लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया हो.
  • उन्होंने कभी अमेरिका के सरकारी अधिकारी को झूठी जानकारी नहीं दी.
  • उन्होंने इमिग्रेशन का फायदा पाने के लिए किसी अमेरिकी सरकारी अधिकारी से झूठ नहीं बोला.

अमेरिकी सरकार का कहना है कि 25 अप्रैल, 2015 से 27 अप्रैल, 2017 के बीच नीरज शर्मा को धोखाधड़ी और वीजा के गलत इस्तेमाल का दोषी ठहराया गया था. प्रशासन का आरोप है कि नीरज ने गैर-कानूनी तरीके से नेचुरलाइजेशन के तहत अमेरिकी नागरिकता हासिल की, जिसे रद्द किया जाना चाहिए.

अमेरिकी अधिकारियों ने क्या कहा?

एक बयान में कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कहा,

"जब अपराधी कानून तोड़कर नेचुरलाइजेशन प्रोसेस का फायदा उठाते हैं, तो इसके नतीजे भुगतने पड़ते हैं. क्रिमिनल अपने पिछले अपराधों के बारे में झूठ बोलते हैं, जिसमें ड्रग डीलर, सेक्सुअल प्रिडेटर और धोखेबाज शामिल हैं. अमेरिकी नागरिकता पाना एक खास अधिकार है और प्रेसिडेंट ट्रंप के मजबूत नेतृत्व में डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस इस प्रोसेस के गलत इस्तेमाल के लिए जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी रखता है."

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के सेक्रेटरी मार्कवेन मुलिन ने कहा कि अमेरिकन नागरिकता एक खास अधिकार है, और इसे ईमानदारी से कमाना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि अगर आप यहां हमारे कानून तोड़कर आते हैं, और अपनी इमिग्रेशन कार्यवाही में झूठ बोलते हैं, तो आप उस खास अधिकार को खो देते हैं.

नीरज शर्मा समेत लिस्ट में शामिल 17 लोगों के पास फेडरल कोर्ट में यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट के आरोपों को चुनौती देने का रास्ता है. अगर ये लोग फेडरल कोर्ट में दोषी पाए गए, तो इनकी अमेरिकी नागरिकता चली जाएगी, और इन्हें डिपोर्ट किया जा सकता है. 

बाकी 16 लोग कौन हैं?

लेइडिस डेलमास गार्सिया (क्यूबा), जीन क्लॉड अल्फ्रेड (हैती), आंद्रेआ मारोक्विन (कोलंबिया), मारिया लूर्डेस मोंटोया (मेक्सिको), ताहिर लेकाज, टैलमैन हैरिस (जमैका), आर्मांडो मेंडोजा (मेक्सिको), फेडेरिको मिशेल फर्मिन (डोमिनिकन रिपब्लिक), अब्दिकादिर अली कादिये (सोमालिया), विक्टर सान शिंग क्वोक (चीन), लुईस हंकपोर्टी (कांगो), फर्नांडो क्रिस्टांचो (कोलंबिया), रोनी प्राइस (त्रिनिदाद और टोबैगो), रॉजर जॉर्ज गर्डन (जमैका), जेरोमेल ओबेजेरा आर्सिला (फिलीपींस) और मिलाग्रोस मारिलेइसिस अकोस्टा टोरेस (क्यूबा).

सिटिजनशिप छीनने का दायरा बढ़ा

अमेरिका में नेचुरलाइजेशन के तहत अमेरिकी नागरिक बने लोगों की नागरिकता छीनना पहले बहुत कम होता था. आमतौर पर युद्ध अपराधियों, मानवाधिकार उल्लंघन करने वालों या गंभीर अपराध छिपाने वालों तक यह मामला सीमित रहता था. लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसका दायरा बढ़ा दिया है.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अब वित्तीय धोखाधड़ी, इमिग्रेशन फ्रॉड और सिटिजनशिप एप्लिकेशन में झूठ बोलने वाले भी निशाने पर हैं. 1990 से 2017 के बीच सिर्फ 300 से थोड़ा ज्यादा मामले दर्ज हुए थे, लेकिन अब सरकार रिकॉर्ड स्तर पर कार्रवाई कर रही है. जस्टिस डिपार्टमेंट 384 लोगों की नागरिकता रद्द कराना चाहता है और DHS को हर महीने 200 से ज्यादा मामले रेफर करने के लिए कहा गया है.

वीडियो: H-1B वीजा पर डॉनल्ड ट्रंप ने कर दिया बड़ा एलान, जवाब के लिए भारत की क्या तैयारी?

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