अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे पर आपत्ति जताई है. आयोग ने अमेरिकी सरकार से अपील की है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्यों पर बैन लगाया जाए. USCIRF का यह बयान मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे से कुछ दिन पहले आया है. भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जाएंगे.
संघ प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे से पहले बवाल, US एजेंसी ने कहा- 'RSS पर बैन लगाओ'
अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने RSS प्रमुख Mohan Bhagwat के New York Visit पर आपत्ति जताई है. आयोग ने अमेरिकी सरकार से RSS के सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने की अपील की है. संघ प्रमुख के दौरे से पहले भारी बवाल शुरू हो गया है.

यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) के चेयरमैन आसिफ महमूद ने बुधवार, 19 अगस्त को कहा,
“भारत के प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्य हैं. RSS एक भारतीय संगठन है जिसके कई सहयोगी समूहों ने ईसाइयों और मुसलमानों समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं.”
वहीं, USCIRF कमिश्नर जीन मील्स ने कहा,
"RSS नेताओं के साथ हाई-लेवल मीटिंग्स नहीं करनी चाहिए और न ही उन्हें राजनयिक सम्मान मिलना चाहिए. भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों. इसके बजाय, अमेरिका की सरकार को उन RSS सदस्यों पर बैन लगाने पर ध्यान देना चाहिए, जो धार्मिक स्वतंत्रता (FoRB) के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं.”
ये ताजा बयान मार्च 2026 में जारी USCIRF की सालाना रिपोर्ट के बाद सामने आए हैं. इस रिपोर्ट में कमीशन ने धार्मिक आजादी के कथित उल्लंघन को लेकर भारत की आलोचना की थी. इसके अलावा RSS और भारत की खुफिया एजेंसी 'रिसर्च एंड एनालिसिस विंग' (RAW) पर बैन लगाने का सिफारिश की थी. नई दिल्ली ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज किया है. साथ ही, यह भी आरोप लगाया है कि आयोग ने आइडियोलॉजिकल नैरेटिव के आधार पर देश की तस्वीर तोड़-मरोड़कर पेश की.
ये भी पढ़ें: RSS को बैन करवाएगा अमेरिका? सरकारी एजेंसी ने की सिफारिश
USCIRF का क्या काम है?USCIRF की स्थापना साल 1998 में हुई थी. अमेरिकी संसद ने एक एक्ट बनाकर इसे स्थापित किया था. इसका काम दुनिया भर के देशों में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों के उल्लंघन की निगरानी करना है. USCIRF एक स्वतंत्र संस्था के तौर पर काम करने का दावा करती है. लेकिन अपनी सिफारिशों अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और संसद को भेजती है. यह सिर्फ अमेरिकी सरकार को सलाह या सिफारिश दे सकती है. अमेरिकी सरकार के लिए इसके सुझावों को मानना जरूरी नहीं है. फिलहाल पाकिस्तानी मूल के आसिफ महमूद इसके अध्यक्ष हैं.
वीडियो: राजधानी: Gen-Z से RSS प्रमुख मोहन भागवत के संवाद के क्या मायने हैं?










