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RSS को बैन करवाएगा अमेरिका? सरकारी एजेंसी ने की सिफारिश

यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने दावा किया है कि भारत में धार्मिक आजादी घट रही है. और नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है. इस संस्था ने RSS और रॉ पर धार्मिक मामलों में भेदभाव वाली नीति अपनाने का आरोप लगाया है.

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16 मार्च 2026 (अपडेटेड: 16 मार्च 2026, 10:58 PM IST)
religious freedom in india american report
USCIRF ने आरएसएस और रॉ पर बैन लगाने की मांग की है. (तस्वीरें- पीटीआई)
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अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF). ये अमेरिका की एक सरकारी एजेंसी है जो दुनिया भर में धार्मिक भेदभाव पर नजर रखने का दावा करती है. USCIRF ने अपनी 2026 की वार्षिक रिपोर्ट जारी की है. इसमें संस्था ने भारत को ‘कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न’ की लिस्ट में डालने की सिफारिश की है. यानी जहां 'विशेष चिंता' की जरूरत है. USCIRF ने रिपोर्ट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&W) पर प्रतिबंध लगाने की भी सिफारिश की है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी संस्था का दावा है कि भारत में ‘धार्मिक आजादी खतरे में’ है. और यहां धार्मिक अधिकारों का ‘उल्लंघन’ हो रहा है. आयोग ने RSS और रॉ पर धार्मिक मामलों में भेदभाव वाली नीति अपनाने का आरोप लगाया है. 

USCIRF की रिपोर्ट दावा करती है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता 2025 में कम हुई है. यहां धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाया गया. रिपोर्ट में अमेरिकी सरकार से अपील की गई है कि वह भारत को हथियार न बेचे. USCIRF ने द्विपक्षीय व्यापार नीतियों और सुरक्षा समझौते को धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ने की मांग की है.

भारत सरकार ने अभी तक इस रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. लेकिन पिछले कुछ सालों में भारत ने USCIRF की रिपोर्टों को पूर्वग्रह और राजनीति से प्रेरित बताया है. साथ ही भारत सरकार इन आरोपों को सिरे से खारिज भी करती रही है. 

USCIRF की क्या मांग है?

- USCIRF ने भारत को ‘विशेष चिंता’ वाला देश मानते हुए आरएसएस और रॉ पर रोक और संपत्ति जब्त करने की मांग की है. 
- साथ ही अमेरिका में ऐसे लोगों पर प्रतिबंध लगाने की सलाह दी है, जो आरएसएस और रॉ से जुड़े हैं. 
- हथियार बिक्री रोकने के लिए आर्म्स एक्ट एक्सपोर्ट कंट्रोल की धारा 6 लागू करने की मांग रखी है. 
- इसके अलावा सुरक्षा सहायता और व्यापार नीतियों को धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ने की मांग की गई है. 
- भारत में USCIRF और स्टेट डिपार्टमेंट को जांच की इजाजत देने की मांग रखी है.

वक्फ बिल और धर्म परिवर्तन से जुड़े कानूनों की आलोचना

USCIRF ने वक्फ कानूनों का हवाला देते हुए धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर सवाल उठाए हैं. आयोग का कहना है कि सरकार ने अल्पसंख्यक समुदाय और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाने वाले विधेयकों को लागू किया. USCIRF का कहना है,

“कई राज्यों में धर्म परिवर्तन से जुड़े कानूनों को सख्त बनाया गया. इनमें जेल की सजा शामिल की गई. भारतीय अधिकारियों ने नागरिकों को अवैध तरीके से हिरासत में लिया. साथ ही धार्मिक शरणार्थियों को डिपोर्ट करने की योजनाएं बनाईं.”

रिपोर्ट में अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हो रहे हमलों पर सही समय पर एक्शन नहीं लेने के आरोप भी लगे हैं. USCIRF की रिपोर्ट में वक्फ (संशोधन) अधिनियम और उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण अधिनियम जैसे विधेयकों की आलोचना की गई है. इसके अलावा अमेरिकी संस्था ने महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में होने वाले सांप्रदायिक हिंसा का जिक्र किया है. और इसके लिए RSS से जुड़े विश्व हिंदू परिषद को जिम्मेदार बताया है.

साल 2025 में भारत के विदेश मंत्रालय ने USCIRF की रिपोर्ट को पूर्वग्रह और राजनीति से प्रेरित बताया था. मंत्रालय ने कहा था, 

“USCIRF छिटपुट घटनाओं को गलत तरीके से पेश करके भारत की विविधता से भरी संस्कृति का अपमान करती है. यह अमेरिका का सुनियोजित एजेंडा है. भारत में डेढ़ अरब लोग रहते है. जिसमें हर धर्म के लोग हैं. सरकार ने इस संस्था पर भारत के खिलाफ दुष्प्रचार के आरोप लगाए हैं. और कई बार USCIRF से जु़डे अधिकारियों को वीजा देने से इनकार किया है.”

USCIRF की स्थापना साल 1998 में हुई थी. अमेरिकी संसद ने एक एक्ट बनाकर इसे स्थापित किया था. USCIRF एक स्वतंत्र संस्था के तौर पर काम करने का दावा करती है. लेकिन अपनी सिफारिशों अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और संसद को भेजती है. इस आयोग में 9 कमिश्नर होते हैं. उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति और अमेरिकी संसद के सीनियर नेता करते हैं. 

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