अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी का सपना देख रहे भारतीय छात्रों और टेक प्रोफेशनल्स के लिए इमिग्रेशन का रास्ता एक बार फिर महंगा हो सकता है. अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी यानी DHS, H-1B वर्क वीजा और F-1 Optional Practical Training यानी OPT से जुड़े नए शुल्क लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रस्ताव से भारतीय छात्रों और टेक प्रोफेशनल्स पर खास असर पड़ सकता है.
अमेरिका में H-1B और OPT पर नए शुल्क की तैयारी, भारतीय छात्रों और टेक प्रोफेशनल्स पर बढ़ सकता है खर्च
US Plans New H-1B: अमेरिका में H-1B वर्क वीजा और F-1 OPT से जुड़े नए शुल्क प्रस्तावित किए जा रहे हैं. फीस का असर भारतीय छात्रों और टेक प्रोफेशनल्स पर ज्यादा पड़ सकता है, क्योंकि H-1B कार्यक्रम में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है. हालांकि 1 लाख डॉलर की OPT फीस लगाने का अभी सिर्फ प्रस्ताव है और कोई अंतिम शुल्क लागू नहीं हुआ है.

अभी कितना बढ़ सकता है खर्च?
नए प्रस्तावों की सटीक रकम फिलहाल सार्वजनिक नहीं हुई है. अमेरिकी इमिग्रेशन लॉ फर्म Fragomen ने 21 अगस्त को बताया कि DHS ने H-1B और F-1 OPT से जुड़े नए शुल्क के लिए रेगुलेटरी प्रक्रिया शुरू कर दी है. OPT से जुड़ा प्रस्ताव 20 अगस्त को Office of Management and Budget यानी OMB के पास समीक्षा के लिए भेजा गया था, जबकि कुछ H-1B याचिकाओं पर शुल्क से जुड़ा प्रस्ताव 19 अगस्त को OMB की समीक्षा प्रक्रिया से गुजर चुका था.
मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि मीडिया रिपोर्ट्स में OPT के लिए संभावित शुल्क 1 लाख डॉलर तक होने की बात सामने आई है. लेकिन अभी इसे पक्का शुल्क मानना सही नहीं होगा. Fragomen ने भी इसे संभावित प्रस्ताव के तौर पर ही बताया है. अंतिम रकम और किन आवेदकों पर शुल्क लागू होगा, इसकी तस्वीर प्रस्ताव Federal Register में प्रकाशित होने के बाद ही साफ होगी.
भारतीयों पर असर ज्यादा क्यों?
अमेरिका H-1B और OPT शुल्क किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता देखकर तय नहीं करता. यानी भारतीय होने के कारण अलग से शुल्क नहीं लगाया जाएगा. लेकिन भारतीय नागरिकों की H-1B कार्यक्रम में बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण किसी भी शुल्क वृद्धि का असर भारतीयों पर स्वाभाविक रूप से ज्यादा पड़ सकता है.
US Citizenship and Immigration Services यानी USCIS के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 में मंजूर H-1B याचिकाओं में 71 फीसदी लाभार्थियों का जन्मस्थान भारत था. चीन करीब 12 फीसदी के साथ दूसरे स्थान पर था.
F-1 से OPT और फिर H-1B का रास्ता
भारतीय छात्रों के लिए चिंता की सबसे बड़ी वजह OPT है. अमेरिका में F-1 स्टूडेंट वीजा पर पढ़ने वाले छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद संबंधित क्षेत्र में काम करने के लिए OPT का इस्तेमाल कर सकते हैं. STEM यानी Science, Technology, Engineering और Mathematics से जुड़े छात्रों को सामान्य OPT के बाद STEM OPT extension के जरिए ज्यादा समय तक काम करने का मौका मिल सकता है.
यही रास्ता अक्सर F-1 से OPT और फिर H-1B तक पहुंचने का जरिया बनता है. इसलिए OPT पर भारी शुल्क लगाया जाता है तो इसका सीधा असर उन छात्रों पर पड़ सकता है, जो अमेरिकी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के बाद वहीं काम करने की योजना बनाते हैं.
फिलहाल USCIS के Fee Schedule में Form I-765 की सामान्य फीस ऑनलाइन आवेदन के लिए 470 डॉलर और कागजी आवेदन के लिए 520 डॉलर है.
H-1B पर पहले भी हुआ था विवाद
H-1B को लेकर अमेरिका में शुल्क का विवाद नया नहीं है. सितंबर 2025 में ट्रंप प्रशासन ने कुछ नए H-1B petitions पर 1 लाख डॉलर का भुगतान अनिवार्य किया था. लेकिन 8 जून 2026 को Massachusetts की संघीय अदालत ने इस व्यवस्था को रद्द कर दिया. इसके बाद सरकार की अपील पर First Circuit Court of Appeals ने 24 जुलाई को इस फैसले पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी.
अब DHS की ओर से नया रेगुलेटरी रास्ता अपनाने की कोशिश इसलिए महत्वपूर्ण है. हालांकि प्रस्ताव सामने आने और उस पर सार्वजनिक टिप्पणियां लेने की प्रक्रिया अभी बाकी है. Fragomen के अनुसार, प्रस्ताव प्रकाशित होने के बाद आम तौर पर 30 से 60 दिनों की सार्वजनिक टिप्पणी अवधि होगी और अंतिम नियम अलग प्रक्रिया के बाद ही प्रभावी हो सकेगा.
भारतीय छात्रों और टेक प्रोफेशनल्स के लिए क्या मतलब?
फिलहाल सबसे जरूरी बात ये है कि नया H-1B या OPT शुल्क लागू नहीं हुआ है. 1 लाख डॉलर का OPT शुल्क भी अभी सिर्फ संभावित प्रस्ताव के तौर पर सामने आया है. लेकिन अगर शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी होती है तो अमेरिका में पढ़ाई के बाद काम करने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों की कुल लागत काफी बढ़ सकती है.
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दूसरी तरफ H-1B से जुड़े ज्यादातर अनिवार्य सरकारी शुल्क आम तौर पर याचिका दाखिल करने वाले नियोक्ता की जिम्मेदारी होते हैं. इसलिए इसका असर भारतीय कर्मचारियों पर सीधे फीस के रूप में नहीं, बल्कि कंपनियों की भर्ती और sponsorship policy के जरिए भी पड़ सकता है.
कुल मिलाकर, अमेरिकी इमिग्रेशन व्यवस्था में अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है. लेकिन एक बात स्पष्ट है कि F-1 से OPT और फिर H-1B के जरिए अमेरिका में करियर बनाने वाले भारतीय छात्रों और टेक प्रोफेशनल्स को आने वाले महीनों में नए नियमों और संभावित शुल्क पर करीबी नजर रखनी होगी.
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