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निफ्टी में इस साल 7% की गिरावट, शेयर बाजार में फायदा कमाने का समय आ गया?

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक इस साल अब तक निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में करीब 13 परसेंट की तेजी आई है. वहीं, निफ्टी 50 में अच्छी खासी गिरावट देखने को मिली है.

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जानकारों का कहना है कि स्मालकैप शेयरों में अभी तेजी की गुंजाइश है (फोटो क्रेडिट: Business Today)

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  • इस साल निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में करीब 13% की वृद्धि हुई है, जबकि निफ्टी-50 सूचकांक में 7% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।
  • स्मॉलकैप शेयरों में निवेश बढ़ने के पीछे म्यूचुअल फंड्स की भागीदारी और घरेलू निवेशकों की निवेश दर में वृद्धि मुख्य कारण मानी जा रही है।
  • विश्लेषकों के अनुसार, बढ़ती कमाई और घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी के कारण स्मॉलकैप शेयरों में आगे भी तेजी आने की संभावना बनी हुई है।

इस साल अब तक स्मॉलकैप शेयरों ने ब्लू चिप (सेंसेक्स में शामिल कंपनियां) शेयरों को पछाड़ते हुए शानदार प्रदर्शन किया है. निफ्टी स्मॉलकैप 100 में साल 2026 में अब तक करीब 13% का उछाल आया है. वहीं, बेंचमार्क निफ्टी-50 में 7% से ज्यादा की गिरावट आई है. यह उतार-चढ़ाव भारतीय शेयर बाजार में स्मॉलकैप शेयरों के प्रदर्शन में आए भारी अंतर को दर्शाता है. यह बेहतर प्रदर्शन पश्चिम एशिया संकट और ईंधन की बढ़ती कीमतों समेत काफी अनिश्चितता भरे माहौल में हुआ है. इसने निवेशकों को सतर्क रखा है और महंगाई और आर्थिक विकास दर की संभावनाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है. 

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इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि निफ्टी स्मॉलकैप 100 ने मार्च के निचले स्तर से जोरदार वापसी की. 21 अगस्त को इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान सूचकांक में लगभग 1% की बढ़त दर्ज की गई . यह 20,031.05 के नए 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. आखिर में यह 0.69% की बढ़त के साथ 19,977 पर बंद हुआ. यह तेजी 23 मार्च को बने 14,986 के 52 हफ्ते के निचले स्तर से 33% की रिकवरी दर्शाती है.

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में 12.84% की वृद्धि दर्ज की गई है. इसके उलट, निफ्टी 50 अपनी रफ्तार बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है. अगर 21 अगस्त को निफ्टी के बंद स्तर (24,252) की बात करें तो इस साल अब तक इसमें 7.25% की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं, यह सूचकांक 5 जनवरी, 2026 को बने 26,373.20 के 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर से 8% से अधिक नीचे कारोबार कर रहा है.

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स्मॉलकैप शेयरों में तेजी का कारण क्या है? 

जानकार मानते हैं कि इसके पीछे कई कारण हैं. उनका कहना है कि बाजार में पर्याप्त पैसा है. म्यूचुअल फंड बड़े पैमाने पर स्मालकैप शेयरों में निवेश कर रहे हैं. साथ ही छोटी कंपनियों की कमाई बढ़ रही है.

वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज के कांति बाथिनी मानते हैं कि स्मॉलकैप निवेशकों के लिए तेजी का दौर पहले ही शुरू हो चुका है. वे इस बेहतर प्रदर्शन का श्रेय शेयर बाजार में निवेश के लिए पर्याप्त मात्रा में पैसा होने, म्यूचुअल फंड कंपनियों का स्मालकैप शेयरों में निवेश बढ़ने को देते हैं.  

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दूसरी ओर, मास्टरट्रस्ट के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह ने इस अंतर का एक कारण लार्ज-कैप शेयरों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की भागीदारी को बताया है. उनका कहना है कि विदेशी निवेशकों का लार्ज-कैप शेयरों में ज्यादा निवेश होता है, इसलिए स्मालकैप सेक्टर में बिकवाली का दबाव अधिक साफ दिख रहा है. 

वे आगे बताते हैं कि स्मालकैप शेयरों में जिनमें विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी कम है . इस बदलाव से स्मालकैप कंपनियों के शेयरों को सीधा फायदा पहुंचा है.  आम घरेलू निवेशक और संस्थागत घरेलू निवेशक दोनों स्मालकैप में पैसा लगा रहे हैं.

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क्या अब निफ्टी और सेंसेक्स में पैसा कमाने का सही समय है ?

जानकारों का कहना है कि स्मॉलकैप शेयरों को लेकर वे आशावादी बने हुए हैं. साथ ही उनका मानना ​​है कि इन शेयरों में अभी तेजी की गुंजाइश है. उन्होंने कहा कि निवेशकों को मौजूदा स्तरों को केवल इस नजरिए से नहीं देखना चाहिए कि सूचकांक अपने उच्चतम स्तर के करीब है या नहीं. बाजार में पर्याप्त पैसा होने, बेहतर कमाई और घरेलू निवेशकों की लगातार भागीदारी से इन शेयरों में तेजी बनी हुई है.

मास्टरट्रस्ट के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह कहते हैं, “हमारा नजरिया इस क्षेत्र को लेकर आशावादी बना हुआ है . मौजूदा निवेशक स्मॉलकैप शेयरों में अपना निवेश बरकरार रख सकते हैं. लंबी अवधि का नजरिया रखने वाले निवेशक बड़े करेक्शन का इंतजार करने के बजाय बाजार में गिरावट आने पर चुनिंदा शेयर खरीद सकते हैं. हमें उम्मीद है कि जिस तरह इस सेक्टर की कंपनियों की कमाई बढ़ रही है, उसे देखते हुए स्मॉलकैप शेयरों में आगे भी तेजी जारी रह सकती है.”

रवि सिंह की सलाह है कि स्मॉलकैप शेयरों में एनर्जी सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयर खरीद सकते हैं. उनका कहना है कि बिजली की मांग में उछाल आने की उम्मीद है और इन कंपनियों ने अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए ग्रिड में निवेश की योजना बनाई है. 

इसी तरह से वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज के कांति बाथिनी का मानना है कि एयरोस्पेस, डिफेंस, इंजीनियरिंग, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और ऑटो सहायक कंपनियां उनकी पसंदीदा सेक्टर हैं. इन सेक्टर में निवेश से फायदे की संभावना है. 

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