उर्दू के मशहूर शायर शकील बदायूंनी का एक शेर है, मशिय्यत (भगवान की मर्जी) ही अगर ढाल बन जाए, तो कश्ती डूबकर भी तैर जाती है. यानी अगर किस्मत और इत्तेफाक साथ है तो इंसान बुरी से बुरी सिचुएशन से बच जाता है. ये कहावत नेपाल घूमने गए तीर्थयात्रियों के एक जत्थे पर एकदम फिट बैठती है. आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के 28 तीर्थयात्री नेपाल गए थे. ये लोग नेपाल में आई भयानक अचानक बाढ़ से बाल-बाल बचे हैं. 29 अगस्त को सभी लोग सुरक्षित अपने-अपने घर लौट गए. इन यात्रियों को कैलाश-मानसरोवर ले जाने वाली ट्रैवल एजेंसी का कहना है कि फ्लैश फ्लड वाले दिन इस ग्रुप को 10 मिनट की देरी हो गई थी. ये लोग चाय के लिए रुक गए थे. और इसी देरी ने इन्हें बचा लिया.
10 मिनट चाय पीने रुके थे, नेपाल की भयंकर तबाही में 28 लोग मरने से बच गए
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के 28 तीर्थयात्री कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर नेपाल पहुंचे थे. जिस दिन स्याब्रूबेसी के आसपास भयानक फ्लैश फ्लड आया, उससे ठीक पहले ये लोग चाय के लिए करीब 10 मिनट रुक गए। तभी ड्राइवर को आगे बाढ़ की खबर मिली और उसने तुरंत रास्ता बदल दिया.

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए तिरुपति स्थित ‘Sign In Travels’ के एमडी पेम्मासानी वेंकटरमण बताते हैं,
हमें नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के पास स्थित स्याब्रूबेसी जल्दी पहुंचना था. लेकिन चाय के लिए रुके और 10 मिनट की देरी ने हम सभी 28 लोगों की जान बचा ली. हमारे ड्राइवर ने मुसीबत को भांपते हुए तुरंत प्रतिक्रिया दी. उसने रास्ता बदला और हमें सुरक्षित जगह पहुंचाया.
विशाखापत्तनम के एक और तीर्थयात्री कृष्णाया मुथ्याला ने बताया कि कैसे वीजा मिलने में तीन दिन की देरी ने उन्हें बचा लिया. वो बताते हैं,
फ्लैश फ्लड में बह रही थी बसहमारे ग्रुप (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के 28 तीर्थयात्री) को मानसरोवर जाना था. वीजा मिलने में तीन दिन की देरी के कारण हमारी पूरी यात्रा में भी देरी हो गई. वरना, जब बाढ़ में स्याब्रूबेसी पुल बह गया, तब हम उसी पुल पर होते. हम सभी की जान जा सकती थी.
ऐसी ही बचने की कहानी तिरुपति की तीर्थयात्री कल्पना की है. कल्पना ने उन डरावने दृश्यों का वर्णन किया जो उन्होंने फ्लैश फ्लड के दौरान देखा. कल्पना बताती हैं,
वीजा मिलने के बाद हम सुबह करीब 6:30 बजे होटल से निकले. लगभग 80 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद हम चाय-पानी के लिए रुके. तभी हमारे ड्राइवर को आगे अचानक आई बाढ़ के बारे में अलर्ट मिला. उन्होंने तुरंत यू-टर्न लिया और हमें सुरक्षित जगह पर पहुंचाया.
कल्पना आगे बताती हैं,
हमने अपनी आंखों के सामने कई बसों को बाढ़ के पानी में बहते देखा, जिनमें कोलकाता से आए तीर्थयात्रियों की दो बसें भी शामिल थीं. हर तरफ अफरा-तफरी मची हुई थी. कई गांव पूरी तरह बह गए या बाढ़ में घिर गए. हमने हिम्मत बनाए रखी और हमारे ड्राइवर ने हमें सुरक्षित काठमांडू के होटल वापस पहुंचाया.
(यह भी पढ़ें: स्कूल बिल्डिंग ढह गई, बच्चे दौड़ने लगे... नेपाल बाढ़ में प्रिंसिपल ने 1,643 बच्चों की जान बचा ली)
इस बीच, नई दिल्ली में आंध्र प्रदेश भवन के अधिकारियों ने भी एक टूरिस्ट की जानकारी दी है. अधिकारियों के मुताबिक कुरनूल जिले के भास्कर शास्त्री के साथ 3 और लोग सुरक्षित न्यालम काउंटी पहुंच गए हैं. ये लोग जो 144 सदस्यों वाले एक ग्रुप का हिस्सा थे. कोदारी बॉर्डर के जरिए उनके सुरक्षित काठमांडू लौटने के इंतजाम किए गए हैं. अधिकारियों ने बताया कि काठमांडू से नई दिल्ली के लिए उनकी वापसी की फ्लाइट 1 सितंबर को है. उन्होंने कहा कि वे नेपाल में फंसे आंध्र प्रदेश के लोगों का पता लगाने और उन्हें बचाने के लिए विदेश मंत्रालय के साथ काम कर रहे हैं.
वीडियो: भारत कैसे कर रहा है नेपाल की मदद?












