महाराष्ट्र सरकार की चर्चित 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना' को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है. इस योजना के तहत रजिस्टर हुई हर 10 में से लगभग 4 महिलाओं को वेरिफिकेशन के बाद हटा दिया गया है. आंकड़ों के लिहाज से अयोग्य पाई गई इन महिलाओं की संख्या करीब 92 लाख तक पहुंचती है. जबकि राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर अब तक 80 लाख लाभार्थियों के नाम हटाए जाने की बात ही मानी है.
लाडकी बहीण योजना से 92 लाख महिलाएं बाहर, महाराष्ट्र सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
Maharashtra की 'Majhi Ladki Bahin Yojana' के तहत करीब 92 लाख (लगभग 40%) महिलाओं के नाम हटा दिए गए. वेरिफिकेशन की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के आधार पर यह कटौती की गई है.


द इंडियन एक्सप्रेस से जुड़े वल्लभ ओझरकर की रिपोर्ट के मुताबिक, हटाए गए करीब 92 लाख लोगों में से लगभग 62 लाख लाभार्थी eKYC ( इलेक्ट्रॉनिक ‘नो योर कस्टमर’) प्रोसेस पूरा नहीं कर पाए थे. बाकी लोगों को इसलिए अयोग्य पाया गया क्योंकि,
- लगभग 16 लाख (17%) महिलाएं ऐसी थी जिनके परिवार की सालाना आय स्कीम के लिए तय 2.5 लाख रुपये की सीमा से ज्यादा थी.
- लगभग 4.42 लाख (4.8%) लाभार्थियों ने वेरिफिकेशन के दौरान बताया कि वे या उनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी कर्मचारी है.
- लगभग 3.6 लाख (3.9%) लाभार्थी पहले से ही ‘संजय गांधी निराधार योजना’ का लाभ ले रहे थे.
- लगभग 2.5 लाख (2.7%) मामलों में एक ही परिवार के दो से ज्यादा सदस्य फायदा उठा रहे थे.
- लगभग 1.8 लाख (2%) लोग 65 साल की अधिकतम उम्र सीमा से ज्यादा उम्र के थे.
- जिला-स्तर के वेरिफिकेशन के दौरान लगभग 1.7 लाख (1.8%) मामलों में गड़बड़ी पाई गई.
- लगभग 29,000 पुरुष और करीब 8,000 सरकारी कर्मचारी भी ऐसे पाए गए जिन्होंने अयोग्य होने के बावजूद फायदा उठाया था.

इस काम से जुड़े अधिकारियों ने अनुमान लगाया कि वेरिफिकेशन के बाद हटाए गए लाभार्थियों को पेमेंट रोके जाने से पहले कुल मिलाकर लगभग 14,000 करोड़ रुपये मिले थे. अधिकारियों ने बताया कि जिन लोगों का पेमेंट रोका गया, उन्हें औसतन लगभग 10 महीनों तक मदद मिली थी.
क्या है यह स्कीम?यह स्कीम उन परिवारों की 21 से 65 साल की महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये देती है जिनकी सालाना आय 2.5 लाख रुपये से कम है. सरकारी कर्मचारी, इनकम टैक्स देने वाले और कुछ दूसरी कल्याणकारी स्कीम के लाभार्थी इसमें शामिल नहीं हैं. इस स्कीम में अभी 1.5 करोड़ से ज़्यादा महिलाएं शामिल हैं. सितंबर 2025 में शुरू हुई वेरिफिकेशन प्रक्रिया से पहले इसके लाभार्थियों की संख्या लगभग 2.43 करोड़ थी.
योजना का खर्च बढ़ारिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआत में सरकार ने इस योजना के लिए कम पैसों का अंदाजा लगाया था, लेकिन जब भारी संख्या में महिलाएं इसके दायरे में आ गईं, तो मूल बजट कम पड़ गया. इसके चलते सरकार को बीच में ही अलग से और पैसा (अतिरिक्त प्रावधान) जोड़ना पड़ा, जिससे इस योजना का कुल खर्च बढ़कर 60,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया.
CAG ने उठाए सवालकंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) ने इस स्कीम के फाइनेंशियल मैनेजमेंट पर सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के 2024-25 के फाइनेंस के ऑडिट में, CAG ने बजट अनुमान, खर्च पर कंट्रोल और फाइनेंशियल मैनेजमेंट में बड़ी कमियों की तरफ इशारा किया. इसमें बिना किसी खास वजह के करीब 3,541 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च करने, तुरंत इस्तेमाल की जरूरत न होने के बावजूद 15,586 करोड़ रुपये सरकारी डिपॉजिट अकाउंट में रखने और कमजोर फाइनेंशियल कंट्रोल का जिक्र किया गया है.
CAG ने सुझाव दिया कि बड़े डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम के लिए बजट बनाते समय लाभार्थियों की संख्या और फंड की जरूरतों का ज्यादा सही आकलन किया जाना चाहिए.
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सरकार का क्या कहना है?'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने कहा कि विधानसभा चुनाव के शेड्यूल और आचार संहिता की स्कीम शुरू होने के तुरंत बाद अनिवार्य eKYC प्रोसेस शुरू नहीं की जा सकी. उन्होंने कहा कि पेमेंट रोकने से पहले लाभार्थियों को अनिवार्य eKYC प्रक्रिया पूरी करने के लिए बार-बार मौके दिए गए. मंत्री ने कहा,
“ऐसा नहीं है कि सरकार ने उन्हें हटा दिया. जिन लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया था और जो पात्र थे, उन्हें eKYC प्रक्रिया पूरी होने तक लाभ मिला.”
राज्य सरकार ने इस स्कीम के लिए बजट आवंटन को भी 2025-26 में 36,000 करोड़ रुपये से घटाकर मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में 26,500 करोड़ रुपये कर दिया है, जो लगभग 9,500 करोड़ रुपये की कटौती है. जबकि महायुति सरकार का मासिक सहायता राशि को 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,100 रुपये करने का चुनावी वादा भी अभी पूरा नहीं हुआ है.
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