भारत में नया वोटर बनने के लिए अब माता-पिता की SIR डिटेल भी देनी होगी. भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने नए वोटर के रजिस्ट्रेशन में बिना नियम बदले बड़ा बदलाव कर दिया है. नया मतदाता बनने के लिए 'फॉर्म 6' भरा जाता है. जिन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पूरा हो गया है, उनमें 'फॉर्म 6' में पैरेंट्स की SIR की जानकारी देने का सेक्शन जोड़ा गया है. नए आवेदक को ये जानकारी डिक्लेयर करनी होगी, तब जाकर उसका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ेगा.
नए वोटर्स को देनी होगी पैरेंट्स की SIR डिटेल, चुनाव आयोग की नई शर्त, समझें पूरी डिटेल
'इलेक्टर्स रजिस्ट्रेशन रूल्स, 1960' में अभी तक कोई औपचारिक संशोधन नोटिफाई नहीं किया गया है. इसके बिना ही चुनाव आयोग ने Form 6 में SIR का डिक्लेरेशन सेक्शन जोड़ दिया है. चुनाव आयोग के ECINET पोर्टल पर मौजूद ऑनलाइन 'फॉर्म 6' में ये नया डिक्लेरेशन मिलेगा.


भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में एक अहम बदलाव किया है. अब जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पूरा हो चुका है, वहां नया वोटर बनने के लिए भरे जाने वाले ‘फॉर्म 6’ में माता-पिता की SIR से जुड़ी जानकारी का एक नया सेक्शन जोड़ा गया है.
इस बदलाव के तहत नए आवेदक को अपने माता-पिता की SIR से जुड़ी जानकारी का डिक्लेरेशन करना होगा. SIR डिक्लेरेशन किए बिना नए आवेदक का नाम वोटर लिस्ट में नहीं जुड़ेगा. चुनाव आयोग ने इतना बड़ा कदम उठाने से पहले नियमों में बदलाव का इंतजार करना भी जरूरी नहीं समझा.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 'इलेक्टर्स रजिस्ट्रेशन रूल्स, 1960' में अभी तक कोई औपचारिक संशोधन नोटिफाई नहीं किया गया है. इसके बिना ही चुनाव आयोग ने Form 6 में SIR का डिक्लेरेशन सेक्शन जोड़ दिया है. चुनाव आयोग के ECINET पोर्टल पर मौजूद ऑनलाइन 'फॉर्म 6' के पार्ट J और K के बीच ये नया डिक्लेरेशन मिलेगा.
SIR डिक्लेरेशन में 3 ऑप्शनSIR डिक्लेरेशन सेक्शन में तीन ऑप्शन में से एक चुनना होगा-
- आवेदक का नाम पिछली SIR वोटर लिस्ट में मौजूद था.
- माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR वोटर लिस्ट में मौजूद था.
- ना तो आवेदक और ना ही उनके माता-पिता का नाम पिछली वोटर लिस्ट में था.
अगर आवेदक पहले दो ऑप्शन में से कोई भी चुनता है, तो उसे पिछले SIR के तहत विधानसभा चुनाव क्षेत्र, पोलिंग बूथ नंबर और सीरियल नंबर जैसी डिटेल्स देनी होंगी. ऐसी जानकारी ना होने पर आवेदक तीसरी कैटेगरी चुन सकते हैं. लेकिन, पोर्टल यह नहीं बताता कि उस ऑप्शन को चुनने का क्या असर होगा.
पहली बार वोट देने वाले, नए एलिजिबल नागरिक और डिलीट हो चुके वोटर को अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए Form 6 में SIR डिटेल भरनी होगी. बिना संशोधन SIR डिक्लेरेशन जोड़ने पर चुनाव अधिकारियों ने कहा कि यह कवायद प्रशासनिक निर्देशों के जरिए शुरू की गई है और ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए जरूरी हो गई है. बिना इसे भरे नए वोटर का रजिस्ट्रेशन फॉर्म जमा नहीं होगा.
डाउनलोड फॉर्म में SIR डिक्लेरेशन नहींमजे की बात ये है कि अगर आप चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर Form 6 डॉउनलोड करेंगे, तो उसमें SIR का डिक्लेरेशन सेक्शन नहीं है. नया वोटर बनने के लिए इस 'फॉर्म 6' को डाउनलोड करें, इसका प्रिंटआउट निकालें, अच्छी तरह भरें और सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट लगाकर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के पास जमा करें.माने, एक देश, एक चुनाव आयोग, लेकिन नया वोटर जोड़ने के लिए दो तरह के Form 6.
चुनाव अधिकारियों ने क्या कहा?चुनाव अधिकारियों ने कहा कि 'फॉर्म 6' में SIR की जानकारी देने का डिक्लेरेशन पहली बार पिछले साल जून में बिहार में SIR प्रक्रिया के दौरान शुरू की गई थी. तब से इसे उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर रजिस्ट्रेशन प्रोसेस में शामिल कर लिया गया, जहां SIR किया गया है.
चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा,
"बिहार के रोजाना SIR बुलेटिन में डिक्लेरेशन के साथ भरा हुआ फॉर्म दिखाया गया था."
उन्होंने आगे कहा कि यह जरूरत वोटरों को मैप करने में मदद करती है और नए वोटरों को अपनी एप्लीकेशन के साथ जमा करने वाले सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स की संख्या कम करती है.
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केवल केंद्र सरकार के पास अधिकारमौजूदा चुनावी नियमों के तहत, 'फॉर्म 6' में आवेदक को अपने साथ रहने वाले परिवार के सदस्यों की डिटेल्स देनी होती हैं, जिसमें उनके इलेक्टोरल फोटो आइडेंटिटी कार्ड (EPIC) नंबर शामिल हैं. 'रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950' के सेक्शन 28 के तहत नियमों को नोटिफाई करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है. 'फॉर्म 6' 'इलेक्टर्स रजिस्ट्रेशन रूल्स, 1960' के ऐसे ही एक नियम से निकला है.
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