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बांग्लादेश लौटने पर शेख हसीना ने दिया जवाब, 'जान से मार दें या गिरफ्तार कर लें लेकिन मैं...'

Bangladesh की पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina अपने देश लौटने की तैयारी में हैं. हसीना के साथ उनकी पार्टी Awami League के कई और नेता भी बांग्लादेश लौट सकते हैं. हसीना को उनकी देश के अदालत ने मौत की सजा सुनाई है.

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शेख हसीना ने अपने देश बांग्लादेश वापस लौटने का 'ऐलान' किया है. (फोटो- इंडिया टुडे)

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  • शेख हसीना ने दिसंबर 2026 में बांग्लादेश की अदालत में सरेंडर करने और देश लौटने का प्लान बनाया है, जो उन्होंने रॉयटर्स को दिए गए एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में बताया।
  • शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा क्योंकि 2024 में बांग्लादेश में उनके खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे और अदालत ने उनकी गैरमौजूदगी में उन्हें फांसी की सजा सुनाई।
  • शेख हसीना के देश लौटने से भारत और बांग्लादेश के संबंधों में सुधार की संभावना है और उन्होंने अपनी पार्टी अवामी लीग को फिर से एकजुट करने की तैयारी शुरू कर दी है।

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अपने ‘वतन वापसी’ का प्लान बना रही हैं. हसीना दिसंबर 2026 में अपनी पार्टी ‘आवामी लीग’ के सीनियर नेताओं के साथ बांग्लादेश की अदालत में सरेंडर कर सकती हैं. उन्होंने यह बयान खुद न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में दिया है. शेख हसीना बांग्लादेश में हुए भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद से ही भारत में शरण लेकर रह ही हैं. बांग्लादेश की अदालत ने हसीना की गैर-मौजूदगी में उन्हें फांसी की सजा सुनाई थी.

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78 वर्षीय नेता ने 9 और 10 जुलाई की दरम्यानी रात को करीब 1 घंटे तक न्यूज एजेंसी के साथ बातचीत की. हसीना ने बांग्लादेश के उन मुद्दों पर भी चर्चा की, जिसकी वजह से उन्हें अपने मुल्क को छोड़कर पड़ोसी देश भारत में शरण लेनी पड़ी थी. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हसीना ने कहा कि वो और उनकी पार्टी के नेता अपनी मर्जी से देश लौटना चाहते हैं. हमें 2 साल पहले अपना देश छोड़ना पड़ा था. साथ ही, उस अदालत में भी पेश होना चाहते हैं, जहां उनके खिलाफ उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया गया. हसीना ने आगे कहा,

‘मेरे लौटने पर वे मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, वे मुझे मार भी सकते हैं, लेकिन फिर भी मुझे जाना है. मेरी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का दमन किया जा रहा है. अगर मौत आती है, तो मैं चाहती हूं कि वह मेरी धरती पर आए, जहां मेरे माता-पिता दफन है और जहां उनका खून बहा था.’

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विदेशी सरकारों से कोई बात नहीं

हसीना ने बताया कि उनकी अपने देश लौटने और कब लौटने जैसे मामलों पर किसी भी विदेशी सरकार से कोई बातचीत नहीं की है.  हसीना के साथ देश के पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल भी है, जिन्हें अदालत ने मौत की सजा सुनाई है. असदुज्जमान भी हसीना के साथ सरेंडर कर सकते हैं. हसीना ने कहा, 

'ढाका (बांग्लादेश की राजधानी) में अधिकारी मुझे वापस ले जाना चाहते है, वे मुझे वापस भेजने के लिए भारत को बार-बार लेटर लिख रहे हैं. मैं खुद जाऊंगी.’

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना. 

हालांकि, अपनी वापसी का ‘ऐलान’ करने के बाद भी बांग्लादेशी नेता ने कोई तय तारीख बताने से इनकार कर दिया है और कहा,

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‘मैं न्याय में विश्वास करती हूं. मुझे लगता है कि एक बार कार्यवाही शुरू होने के बाद ही लोगों को यह साफ पता चल जाएगा कि अदालत सिर्फ़ दिखावे के लिए है. मैं यही साबित करना चाहती हूं. लोगों को फैसला करने दें.’

हसीना ने बताया कि वो अपने ‘वतन वापसी’ से जुड़े प्लान को लेकर ढाका के कॉन्टैक्ट में नहीं थी. उन्होंने कहा, 

‘लोकतंत्र, मताधिकार, अवामी लीग के राजनीतिक अधिकार और न्याय किसी गुप्त बातचीत का विषय नहीं है. मुझे जेल जाने की चिंता नहीं है. क्योंकि, मैं पहले भी कई बार गिरफ्तार हो चुकी हूं.’

हसीना ने उन कारणों के बारे में भी बताया, जिसकी वजह से उन्हें बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था. उन्होंने कहा कि इस बार उन्हें इसलिए ‘भागना’ पड़ा क्योंकि भीड़ उनके घर तक बढ़ रही थी और उनकी जान को खतरा था. हसीना ने आगे कहा, 

‘जब कोई भी सरकार लंबे समय तक काम करती है, तो गलतियां हो सकती हैं. कोई भी सरकार गलतियों से ऊपर नहीं होती. लेकिन सरकार के अच्छे-बुरे और सही-गलत का फैसला करने का हक जनता के पास है. मैं यह फैसला जनता पर छोड़ती हूं.’

पार्टी जोड़ने की भी तैयारी

नेता ने आगे बताया कि वो अपनी पार्टी अवामी लीग को वापस से ‘एकजुट’ करने की भी तैयारियां कर रही हैं. इसके लिए उन्होंने बांग्लादेश के 300 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में से करीब 125 क्षेत्रों के साथ कई ऑनलाइन मीटिंग की हैं. हसीना ने बताया कि हो सकता है कि ‘मुझे दोषी ठहरा दिया जाए और मैं चुनाव न लड़ पाऊं, लेकिन वो अवामी लीग को क्यों निलंबित कर रहे हैं? अगर हमने कुछ गलत किया है, तो जनता को फैसला करने दें.’

साल 2024 में बांग्लादेश में शेख हसीना और उनके सरकार के खिलाफ भारी हिंसक प्रदर्शन हुआ था. प्रदर्शनकारियों ने उनके कई कार्यालयों को नुकसान पहुंचाया. इसके बाद वो बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं. बाद में देश की एक अदालत में उनकी ‘घातक कार्रवाईयों’ के लिए मुकदमा चला और हसीना की गैर-मौजूदगी में उनके लिए ‘सजा-ए-मौत’ का फरमान जारी कर दिया. हालांकि, उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया था. हसीना के वापस अपने देश लौटने पर भारत और बांग्लादेश के भी संबंधों में सुधार होने की उम्मीद है, जो उनके भारत में शरण लेने के बाद ‘खराब’ हो गए थे.

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