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ट्रंप की धमकी से भड़का ईरान, स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ बातचीत बीच में रोकी

Donald Trump की धमकी Iran को रास नहीं आई. इसका सीधा असर Switzerland में Pakistan और Qatar की मध्यस्थता में हो रही US-Iran Talk पर पड़ा. स्विट्जरलैंड में चारों देश मिलकर 14-पॉइंट वाले Islamabad MoU को लागू करने के लिए काम कर रहे थे.

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स्विट्जरलैंड में ईरानी पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची. (Press TV)

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  • अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 17 जून को ईरान के साथ एक अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए, जबकि 21 जून को उन्होंने ईरान पर मिलिट्री अटैक की धमकी दी।
  • पाकिस्तान और कतर ने अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में डेलीगेशन वार्ता कराई, लेकिन ट्रंप की धमकी के कारण ईरानी डेलीगेशन ने बातचीत रोक दी।
  • ट्रंप की धमकी के बाद ईरानी डेलीगेशन ने बातचीत में हिस्सा लेना बंद कर दिया, जिससे अमेरिका-ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में जारी मध्यस्थता प्रभावित हुई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बुधवार, 17 जून को ईरान के साथ एक अंतरिम शांति समझौते पर साइन किए. 21 जून को उन्होंने ईरान पर मिलिट्री अटैक की धमकी दे डाली. वो भी ऐसे मौके पर जब उसी दिन स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में अमेरिका-ईरान का डेलीगेशन फाइनल एग्रीमेंट पर बात करने के लिए पहुंचा था. ईरान ने इस धमकी को सीरियस लिया और बातचीत को बीच में रोक दिया. हालांकि, तेहरान ने कहा कि वाशिंगटन के साथ बातचीत में ठहराव आया है, पूरी तरह खत्म नहीं हुई.

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पाकिस्तान की कोशिशों के बाद अमेरिका और ईरान 60 दिन की डील पर राजी हो गए. कतर भी एक मीडिएटर है. स्विट्जरलैंड में अमेरिकी डेलीगेशन को वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने लीड किया, जबकि ईरानी डेलीगेशन को ईरानी पार्लियामेंट स्पीकर और चीफ नेगोशिएटर मोहम्मद बाकर कालीबाफ और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने लीड किया.

डॉनल्ड ट्रंप की ईरान को धमकी

पाकिस्तान और कतर की कोशिश अमेरिका-ईरान को स्विट्जरलैंड तक तो ले आई. लेकिन डॉनल्ड ट्रंप की धमकी ने ईरानी डेलीगेशन का मिजाज खराब कर दिया. 21 जून को राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा,

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"ईरान को लेबनान में प्रॉक्सीज को परेशानी खड़ी करने से तुरंत रोकना चाहिए, जिन्हें वो अकूत पैसा देता है. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हम ईरान पर फिर से बहुत ताकत के साथ हमला करेंगे, ठीक वैसे ही जैसे हमने पिछले हफ्ते किया था, बस उससे भी ज्यादा ताकत से!!!"

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डॉनल्ड ट्रंप का पोस्ट. (Truth Social)

डॉनल्ड ट्रंप की धमकी ईरान को रास नहीं आई. इसका सीधा असर बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हो रही अमेरिका-ईरान टॉक पर पड़ा. स्विट्जरलैंड में चारों देश मिलकर 14-पॉइंट वाले 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' (Islamabad MoU) को लागू करने के लिए काम कर रहे थे.

ईरान ने बातचीत रोकी

ईरान सरकार से जुड़ी न्यूज एजेंसी तसनीम की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान-अमेरिका की बातचीत की जानकारी रखने वाले सूत्र ने बताया,

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“चार-तरफा फॉर्मेट में ईरान-अमेरिका बातचीत दोपहर करीब 3 बजे (लोकल टाइम) शुरू हुई और करीब डेढ़ घंटे की मीटिंग के बाद डेलीगेशन के बीच सलाह-मशविरे के लिए आधे घंटे के ब्रेक के लिए रोक दी गई."

सूत्र ने आगे बताया कि डॉनल्ड ट्रंप के धमकी भरे और बेइज्जती करने वाले बयानों की वजह से ईरानी डेलीगेशन ने फोर-पार्टी बातचीत में लौटने से मना कर दिया. इस बीच, कतर और पाकिस्तान की कोशिशें जारी रहीं और मीडिएटर के जरिए एक-दूसरे को मैसेज भेजे गए. तब तक कोई फाइनल नतीजा नहीं निकला था.

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प्रेस टीवी का पोस्ट. (X)

यह बातचीत एक हफ्ते पहले इस्लामाबाद MoU पर हुए समझौते की शर्तों के तहत फर्स्ट राउंड की बातचीत थी. ईरान के सरकारी न्यूज चैनल प्रेस टीवी ने लिखा कि डॉनल्ड ट्रंप की ईरान पर मिलिट्री एक्शन की धमकी अंतरिम डील के तहत अमेरिका के वादों का सीधा उल्लंघन है.

डील का क्लॉज 1 दोनों पार्टियों को "एक-दूसरे के खिलाफ कोई युद्ध या कोई मिलिट्री ऑपरेशन शुरू नहीं करने, और एक-दूसरे के खिलाफ धमकी देने या ताकत का इस्तेमाल करने से बचने" के लिए प्रतिबद्ध करता है.

लेबनान टर्निंग पॉइंट

ईरान ने साफ-साफ कहा है कि लेबनान में शांति कायम किए बिना अमेरिका के साथ कोई भी समझौता नहीं होगा. लेबनान में ताकतवर हथियारबंद ग्रुप हिजबुल्लाह और इजरायल एक-दूसरे पर हमला कर रहे हैं. हिजबुल्लाह, इजराइल पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाता है.

जबकि इजरायल का दावा है कि हिजबुल्लाह के लड़ाके उसके ठिकानों पर हमला करते हैं, जिसके जवाब में लेबनान में इजराइली सेना का मिलिट्री एक्शन होता है. जब इजरायल हमला करता है, तो हिजबुल्लाह भी पलटवार करता है.

यह भी पढ़ें: 'अपने दिमाग का इस्तेमाल करो', हिजबुल्लाह से लड़ रहे इजरायल से बोले ट्रंप

अमेरिका और ईरान के सख्त रुख से लेबनान में कुछ शांति आई है. इजरायल 'वेस्ट एशिया में शांति' के लिए अमेरिका-ईरान डील से पूरी तरह अलग-थलग महसूस करता है. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी जोर देकर कहा है कि इजराइली सेना लेबनान में इजरायल के बनाए गए सिक्योरिटी जोन से पीछे नहीं हटेगी. ईरान इससे पहले ही नाराज है. फिर डॉनल्ड ट्रंप की ईरान की हिजबुल्लाह जैसी प्रॉक्सीज के बहाने ईरान पर हमले की धमकी से तेहरान और नाराज हो गया.

वीडियो: जेडी वेंस ने पाकिस्तान के किस 'सिस्टम' पर सवाल उठा दिया?

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