स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज खुल गया है मगर तनाव है कि ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहा. ब्रिटिश एजेंसी यूनाइटेड किंगडम मेरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन (UKMTO) ने बताया कि एक जहाज पर ड्रोन हमला हुआ है. इसी दौरान यूनाइटेड नेशन होर्मुज में फंसे जहाज़ों को बाहर निकालने में जुटी थी. लेकिन हमले के बाद इस ऑपरेशन को पॉज़ कर दिया है. यानी 11 हज़ार नाविक फिर से बीच मंझधार में छूट गए हैं. बताया गया कि सुरक्षा कारणों की वजह से ऐसा किया जा रहा है. हालांकि हमला किसने किया ये साफ नहीं है मगर इससे एक डर पैदा हो गया है. क्या जंग फिर शुरू हो जाएगी?
ईरानी हमले ने 11 हज़ार नाविकों की जान डाली खतरे में, UN ने बचाव अभियान रोका
Strait of Hormuz में एक जहाज पर हमला हुआ जिसके बाद United Nations ने अपना rescue operation रोक दिया. UN की एजेंसी IMO के मुताबिक इस वक़्त करीब 20 हज़ार नाविक अलग-अलग जहाजों में फंसे हुए हैं. इनमें से 11 हज़ार नाविकों को evacuation प्लान में शामिल किया गया था.


ABC न्यूज़ के मुताबिक, जिस जहाज पर हमला हुआ वो ओमान के बेहद करीब था. दो अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ये हमला ईरान ने किया है. लेकिन अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है. ईरान की पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने स्टेटमेंट जारी कर बताया था कि अगर किसी जहाज ने तय रूट छोड़कर कोई दूसरा रूट अपनाया तो सेफ्टी की गारंटी उसकी नहीं है.
UN ने रेस्क्यू क्यों रोका?रिपोर्ट ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि होर्मुज में सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो शिप पर हमला हुआ है. यूनाइटेड नेशन (UN) ने बताया कि जिस जहाज पर हमला हुआ है वो उनके रेस्क्यू ऑपरेशन का हिस्सा नहीं है. UN की एजेंसी IMO (इंटरनेशनल मेरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन) के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने कहा कि जब तक इवैक्युएशन लिस्ट में शामिल जहाजों की सुरक्षा की गारंटी नहीं मिल जाती, तब तक अभियान आगे नहीं बढ़ाया जाएगा.
IMO के मुताबिक इस पूरे इलाके में करीब 20 हजार से ज्यादा नाविक अलग-अलग जहाजों पर फंसे हुए हैं. इनमें से लगभग 11 हजार नाविकों को निकालने के लिए विशेष इवैक्युएशन प्लान तैयार किया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक, IMO ने जहाज़ों के लिए दोनों रास्ते खुले रखे थे. जहाज ओमानी या फिर ईरानी समुद्री इलाके से गुज़र सकते हैं. हमले के बाद अस्थायी रूप से इस ऑपरेशन को रोक दिया गया है.
होर्मुज में दो रास्ते कौन से हैं?पहला रास्ता ईरान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरता है. इस मार्ग पर जहाज़ों को ईरान की एजेंसी PGSA से पहले इजाज़त लेनी होती है. बिना परमिट किसी जहाज को प्रवेश नहीं दिया जाता. ईरान का कहना है कि सिर्फ एक यही रूट है जिससे जहाज को सुरक्षित पैसेज दिया जाएगा.
दूसरा रास्ता ओमान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुज़रता है. इसी मार्ग को संयुक्त राष्ट्र और ओमान मिलकर सुरक्षित निकासी के लिए इस्तेमाल कर रहे थे. दर्जनों जहाजों को इस रास्ते से पार भी कराया गया है. 24 जून को ही 60 से ज़्यादा जहाज़ों को पार कराया गया था.
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के IRGC ने भी 25 जून को बयान जारी किया कि केवल ईरान द्वारा तय किए गए रास्ते से ही जहाज गुज़रें तभी उन्हें सेफ पैसेज दिया जाएगा. नियमों का उल्लंघन हुआ तो हमला भी हो सकता है.
ये भी पढ़ें: भारतीय जहाजों पर हमले को लेकर डॉनल्ड ट्रंप का बयान आया, ईरान का नाम लेकर हवाबाजी कर दी
फिर जंग की आग भड़केगी?अमेरिका-ईरान के बीच मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग साइन हो चुका है. जिसमें कई मुद्दों पर बात बनी है और कुछ मुद्दों पर बात अभी चल रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान एग्रीमेंट का उल्लंघन करता है या स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज बंद कर देता है तो फिर से हमले किए जाएंगे.
हालांकि जहाज पर हुए हमले में किसी को हानि नहीं पहुंची है. लेकिन सबके मन में एक सवाल ज़रूर पैदा हो गया है. फिलहाल IMO ओमान, ईरान और अन्य देशों के साथ मिलकर फंसे हुए नाविकों को निकालने की कोशिश कर रहा है.
वीडियो: ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच ट्रंप को अपनी ही पार्टी से झटका


















