The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • US Iran war news irgc attacks US bases in kuwait and bahrain donald trump strait of hormuz

अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर फिर हमला किया, IRGC ने US बेस उड़ाए, ट्रंप बोले- ईरान का वजूद खत्म हो जाएगा

US Iran War: अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं. Donald Trump ने सैन्य कार्रवाई जारी रहने पर ईरान का वजूद खत्म करने की धमकी दी है. वहीं, IRGC ने भी Kuwait और Bahrain में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेसों को निशाना बनाया है.

Advertisement
pic
28 जून 2026 (अपडेटेड: 28 जून 2026, 09:48 AM IST)
US Iran war, irgc attacks US bases in kuwait and bahrain
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान को खत्म करने की धमकी दी है. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)
Quick AI Highlights
Click here to view more

पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है. अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरानी ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए. जवाब में ईरान ने भी कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेसों को निशाना बनाया. वाशिंगटन और तेहरान एक-दूसरे पर सीजफायर उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने धमकी देते हुए कहा कि अगर मिलिट्री एक्शन आगे बढ़ा तो ‘ईरान का वजूद खत्म हो जाएगा.’

US ने दूसरे दिन किए हमले

27 जून को ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से गुजरते वक्त पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर (M/T किकू) पर ड्रोन हमला हुआ. अमेरिका ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया और उसके ठिकानों पर हमला किया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि यूएस नेवी और एयर फोर्स के फाइटर जेट्स ने 27 और 28 जून की दरमियानी रात ईरान के 10 मिलिट्री ठिकानों पर हमले किए, जो M/T किकू पर ईरान के ड्रोन हमले के जवाब में थे.

अमेरिकी सेना ने 28 जून को अपने एक बयान में बताया कि उसने ये हमले ‘कमांडर इन चीफ के निर्देश’ यानी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के निर्देश पर किए. CENTCOM ने कहा,

“M/T किकू पर ईरानी 'वन-वे' अटैक ड्रोन से निशाना साधा गया था. पनामा के झंडे वाला यह टैंकर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के पास से गुजर रहा था और इसमें 20 लाख बैरल से ज्यादा कच्चा तेल था. कमर्शियल जहाजों के खिलाफ ईरान की लगातार आक्रामकता के जवाब में CENTCOM की सेनाओं ने आज हमले किए. अमेरिकी मिलिट्री एयरक्राफ्ट ने ईरान के मिलिट्री सर्विलांस इंफ्रास्ट्रक्चर, कम्युनिकेशन सिस्टम, एयर डिफेंस साइट्स, ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटीज और माइन-लेयरिंग क्षमताओं को निशाना बनाया.”

US Iran war
अमेरिकी सेंट्रल कमांड का पोस्ट. (X)
'हिंसा का जवाब हिंंसा से'

ऑपरेशन के कुछ घंटों बाद, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि तेहरान के हमलों का जवाब वॉशिंगटन जवाबी हमलों से देगा. वेंस ने ‘X’ पर लिखा, 

"ईरान ने सीजफायर एग्रीमेंट पर साइन किया है. हमने इसका सम्मान किया है. अगर MOU को कैसे लागू किया जा रहा है, इस पर उनकी असहमति है, तो वे फोन उठा सकते हैं. लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से ही दिया जाएगा."

US Iran war news
(फोटो: X)

ईरानी मीडिया का हवाला देने वाली रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणी ईरान के सिरिक द्वीप पर धमाकों की आवाज सुनी गई. यह जगह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के समुद्री चोकपॉइंट के पास है, जिसे एक दिन पहले 26 जून को भी निशाना बनाया गया था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी सेना की कई मिसाइलों ने केशम द्वीप के एक गांव को भी निशाना बनाया.

यह दूसरा दिन था, जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया. 25 जून को ईरान पर सिंगापुर के झंडे वाले एक कार्गो शिप पर भी ड्रोन हमला करने का आरोप लगा था. इसके अगले दिन अमेरिकी फाइटर जेट्स ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटी के साथ-साथ तटीय रडार साइट्स को निशाना बनाया था. 

ईरान ने किया पलटवार 

हमले के कुछ ही समय बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई की. रॉयटर्स ने ईरानी मीडिया के हवाले से बताया कि IRGC ने ऐलान किया कि उसकी नेवी और एयरोस्पेस फोर्स ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी मिलिट्री साइट्स को निशाना बनाकर एक जॉइंट मिसाइल और ड्रोन ऑपरेशन शुरू किया है. IRGC ने कहा कि ये हमले 26 जून को ईरानी मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटी और तटीय रडार साइट्स के खिलाफ अमेरिकी हमलों का जवाब थे.

कुवैत-बहरीन ने हमलों की पुष्टि की

कुवैत की सेना ने बताया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ‘दुश्मन’ मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहे हैं. वहीं, बहरीन में सायरन बज रहे है. बहरीन के गृह मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की.

डॉनल्ड ट्रंप ने दी धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान पर सीजफायर का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. उन्होंने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में लिखा,

“अमेरिका के एयरक्राफ्ट ने फिर से ईरानी मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज साइट्स पर हमला किया! बहुत मुमकिन है कि वे कभी नहीं सीखेंगे! एक समय ऐसा आ सकता है जब हम और समझदारी से काम न ले पाएं, और हमें उस काम को मिलिट्री के जरिए पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़े जिसे हमने बहुत कामयाबी से शुरू किया था. अगर ऐसा हुआ, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा!”

IRAN US WAR
(फोटो: ट्रुथ सोशल)

जिन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, वहां हुए नुकसान या हताहतों की संख्या के बारे में अमेरिकी अधिकारियों की ओर से तुरंत कोई पुष्टि नहीं मिली है. इन हमलों से दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ गया है. दो हफ्ते पहले ही दोनों देशों के बीच 60 दिनों का एक नाजुक शांति समझौता हुआ था.

ताजा तनाव ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ला दिया है. इस पानी के रास्ते से दुनिया के 20 फीसदी तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई होती है. इसलिए इसमें किसी भी तरह की रुकावट अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और एनर्जी मार्केट के लिए बड़ी चिंता का विषय है.

ये भी पढ़ें: US-ईरान में फिर जंग! कार्गो शिप पर हमले से भड़के अमेरिका ने मिसाइलें दागीं, IRGC ने US बेस उड़ाए

‘जितना बताया गया, उससे ज्यादा नुकसान’

अमेरिकी अखबार 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक पड़ताल से पता चला है कि इस साल ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों से बहरीन में मौजूद अमेरिकी नेवी बेस समेत कम से कम 20 अमेरिकी बेसों को पहले बताए गए नुकसान से कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचा है.

इसके बाद अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी मौजूदगी पर फिर से विचार कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों, सोशल मीडिया फुटेज और रक्षा विभाग के रिकॉर्ड से बहरीन में अमेरिकी नौसेना के हेडक्वार्टर को हुए नुकसान का पता चला.

मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के मुताबिक, सेना अब बहरीन में बेस को नए सिरे से तैयार करने, कुवैत और सऊदी अरब में अमेरिकी मौजूदगी कम करने और कुछ बेस को पश्चिम की ओर (ईरान की मिसाइलों और ड्रोन की पहुंच से दूर) ले जाने पर विचार कर रही है. ईरानी हमलों से तबाह हो चुके अमेरिकी सैन्य ढांचों को दोबारा नहीं बनाया जा सकेगा. यहां तक कि अमेरिका अरब देशों से हटकर इजरायल में बेस बनाने पर भी विचार कर रहा है.

वीडियो: पीस डील के बाद ईरान-अमेरिका क्यों भिड़ गए?

Advertisement

Advertisement

()