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ट्रंप सरकार में 'भूकंप', इंटेलिजेंस प्रमुख तुलसी गबार्ड ने इस्तीफा दिया

तुलसी गबार्ड ने ट्रंप को भेजे अपने पत्र में लिखा कि वह 30 जून को इस्तीफा देकर अपना पद छोड़ देंगी. उन्होंने आगे कहा कि हमने काफी प्रगति की है. मैं मानती हूं कि अभी भी बहुत काम करना बाकी है.

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तुलसी गबार्ड ने दिया खुफिया प्रमुख पद से इस्तीफा. (फोटो- India Today)

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  • तुलसी गबार्ड ने 22 मई को डोनाल्ड ट्रंप को लिखा पत्र जिसमें उन्होंने 30 जून को अमेरिका की खुफिया एजेंसी की प्रमुख पद से इस्तीफा देने की घोषणा की।
  • ट्रंप प्रशासन में उनके ईरान के परमाणु हथियारों पर विरोधाभासी बयानों के कारण गबार्ड को धीरे-धीरे महत्वपूर्ण कामों से अलग किया गया था।
  • तुलसी गबार्ड का इस्तीफा व्हाइट हाउस से दबाव के कारण माना जा रहा है, और इसके बाद वे रिपब्लिकन पार्टी में शामिल होकर सक्रिय राजनीति जारी रखेंगी।

अमेरिका की खुफिया एजेंसी की प्रमुख तुलसी गबार्ड याद हैं? उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को लिखी अपनी चिट्ठी में उन्होंने बताया है कि आने वाली 30 जून को वह अपना पद छोड़ देंगी.

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तुलसी गबार्ड ट्रंप प्रशासन की वही अफसर हैं जिन्होंने दुनिया के सामने कह दिया था कि ईरान कोई परमाणु हथियार नहीं बना रहा. इसके कुछ समय बाद ही ट्रंप ने गबार्ड का दावा खारिज कर दिया और कहा कि ईरान परमाणु बम बनाने के करीब है. इतना ही नहीं, इसके ठीक एक साल बाद यही दलील देते हुए वह इजरायल के साथ ईरान पर हमले में भी कूद पड़े थे.

जाहिर है कि गबार्ड का बयान ट्रंप की अपनी मान्यता के सरासर खिलाफ था. इसी के बाद से ट्रंप प्रशासन में उनकी उल्टी गिनती शुरू मान ली गई थी. द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, तुलसी गबार्ड का कार्यकाल काफी उथल-पुथल भरा रहा था. डॉनल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला और फिर ईरान पर हमले के दौरान ही उन्हें काफी हद तक दरकिनार करना शुरू कर दिया था. शुक्रवार, 22 मई को गबार्ड ने ट्रंप को भेजे अपने पत्र में लिखा कि वह 30 जून को इस्तीफा देकर अपना पद छोड़ देंगी. उन्होंने आगे कहा,

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हमने काफी प्रगति की है. मैं मानती हूं कि अभी भी बहुत काम करना बाकी है.

व्हाइट हाउस ने इस्तीफे के लिए मजबूर किया

गार्जियन ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी के सूत्रों के हवाले से बताया कि गबार्ड ने अपनी इच्छा से इस्तीफा नहीं दिया है बल्कि व्हाइट हाउस ने उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया. फॉक्स न्यूज ने सबसे पहले गैबर्ड के इस्तीफे की खबर दी थी, जिसमें वजह बताई गई थी कि उनके पति कैंसर से पीड़ित हैं, इसलिए वह रिजाइन कर रही हैं. कुछ सूत्र ये भी बता रहे हैं कि ट्रंप पिछले महीने अपनी कैबिनेट के सदस्यों से पूछ रहे थे कि क्या उन्हें तुलसी गबार्ड को हटा देना चाहिए?

22 मई, शुक्रवार को ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर ट्रंप ने लिखा कि दुर्भाग्यवश, शानदार काम करने के बाद तुलसी गबार्ड 30 जून को अपना पद छोड़ देंगी.

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कौन हैं तुलसी गबार्ड?

तुलसी गबार्ड अपने नाम से भारतीय मूल की लगती हैं लेकिन ऐसा नहीं है. वह साल 1981 में अमेरिकी समोआ में पैदा हुईं. उनके पिता का नाम माइक गबार्ड और मां का नाम कैरल गबार्ड था. तुलसी जब दो साल की थीं, तभी उनका परिवार हवाई में आकर बस गया. यहां आने के बाद उनकी मां कैरल ने हिन्दू धर्म अपना लिया. इसी के बाद उनका हिंदू नाम तुलसी रखा गया. तुलसी के पिता पहले रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े थे. बाद में वह डेमोक्रेट हो गए. तुलसी भी डेमोक्रेटिक पार्टी से सांसद रही हैं. अक्टूबर 2022 में उन्होंने पार्टी छोड़ दिया और खुलकर ट्रंप का सपोर्ट करने लगीं. 2024 में वह रिपब्लिकन पार्टी में शामिल हो गईं. 

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