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चीन ने पहाड़ काटकर बनाया दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन, निर्माण की कहानी से एलन मस्क भी दंग

चोंगकिंग ईस्ट में बना यह स्टेशन दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन है. दिलचस्प बात ये कि इसके निर्माण में चीन ने रोबोट्स का काफी ज्यादा इस्तेमाल किया है.

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एलन मस्क ने चीन में बने दुनिया के सबसे बड़े रेलवे स्टेशन का वीडियो शेयर किया. (फोटो- इंडिया टुडे)

चीन अपनी टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग का लोहा मनवाता रहता है. इस बार ऐसा काम किया है कि अमेरिकी बिजनेसमैन एलन मस्क भी हैरान रह गए. दरअसल, एलन मस्क ने चीन के चोंगकिंग शहर में बने चोंगकिंग ईस्ट रेलवे स्टेशन के बनने की प्रक्रिया का एक वीडियो शेयर किया है. चोंगकिंग ईस्ट में बना यह स्टेशन दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन है. दिलचस्प बात ये कि इसके निर्माण में चीन ने रोबोट्स का काफी ज्यादा इस्तेमाल किया है.

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8 फ्लोर में बना यह रेलवे स्टेशन मल्टी-मॉडल ट्रांजिट कॉम्प्लेक्स हैं. इंडिया टुडे से जुड़े शौनक सान्याल की रिपोर्ट के मुताबिक, चोंगकिंग ईस्ट रेलवे स्टेशन फ्लोर और एरिया के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन है. इसे मई, 2025 में चीन की आम जनता के लिए खोल दिया गया था. चोंगकिंग, चीन के साउथ- वेस्ट में स्थित है. शहर में बने इस नये रेलवे स्टेशन ने एक बार फिर चीन की जबरदस्त इंजीनियरिंग क्षमता और उसकी आर्थिक ताकत का बढ़िया उदाहरण दुनिया के सामने पेश किया है.

चोंगकिंग चीन का वही शहर है, जहां से आपको मेट्रो ट्रेनें अपार्टमेंट ब्लॉकों के बीच से गुजरती हुई दिखाई देंगी. आमतौर पर कई देश इतने बड़े पैमाने पर इस तरह के प्रोजेक्ट्स को डिजाइन करने और उसे पूरा करने में दशकों का समय लगाते हैं, लेकिन चीन ने मात्र 38 महीनों में इस विराट निर्माण को पूरा करके दिखा दिया. अब इस स्टेशन के बारे में जानते हैं. 

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यह स्टेशन 1.22 मिलियन वर्ग मीटर क्षेत्र में बनाया गया है. इसमें 15 प्लेटफॉर्म और 29 ट्रैक हैं, जिन्हें तीन रेल यार्ड में बांटा गया है. स्टेशन को इंजीनियर्स ने इस तरह से डिजाइन किया है कि एक बार में प्रति घंटे 16 हजार यात्रियों का आवागमन आसानी से हो सके. स्टेशन को 8 मंजिलो में बनाया गया है, जो हाई-स्पीड ट्रेन, पारंपरिक रेलवे, मोनोरेल लाइन, बस, टैक्सी और लंबी दूरी की कोच सेवाओं को एक साथ आसानी से जोड़ता है. अपने खास डिजाइन की वजह से यह एक मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब बन चुका है.

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चोंगकिंग ईस्ट रेलवे स्टेशन. (फोटो-सोशल मीडिया.)

चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर शिन्हुआ ने भी इस स्टेशन पर एक रिपोर्ट छापा है. रिपोर्ट में दावा किया गया कि इसे बनाने का काम मात्र 38 महीनों में पूरा हो गया. मई 2022 में स्टेशन के डिजाइन का ब्लूप्रिंट मिला और मई 2025 में इसे औपचारिक तौर पर आम जनता के लिए खोल दिया गया.

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प्रोजेक्ट में काम करने वाले रोबोट.(फोटो-Xinhua)

स्टेशन को बनाने में रोबोट्स ने अहम भूमिका निभाई. इसलिए रिपोर्ट में इसे ‘रोबोट क्रांति’ बताया गया. दरअसल, इस रेलवे स्टेशन को पहाड़ काटकर उसके ऊपर बनाया गया. भीषण गर्मी के दिनों में ऊबड़-खाबड़ जमीन पर बने इस स्टेशन को बनाने में रोबोट्स ने खास योगदान दिया.

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प्रोजेक्ट के दौरान ली गई तस्वीर. (फोटो-Xinhua)

प्रोजेक्ट में LiDAR, AI और 5G से लैस लेजर-गाइडेड चार-पहियों वाले स्क्रीड रोबोट का इस्तेमाल किया गया. इस रोबोट ने इंसानों की तुलना में करीब 3 गुना काम किया और जमीन को तेजी से समतल करने में मदद की. स्टेशन में बड़े पैमाने पर कांच लगाया गया है. इस काम के लिए भी रोबोट का इस्तेमाल किया गया. रोबोट ने 800 किलोग्राम वाले कांच के पैनलों को आसानी से स्टेशन में लगाने में मदद की. इंसानों की तुलना में ये काम 3 गुना तेजी से हुआ. 

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रोबोट से काम करता हुआ कर्मचारी. (फोटो- Xinhua)

वेल्डिंग करने के लिए भी रोबोट का इस्तेमाल हुआ. रोबोट ने 24/7 काम किया और काम के खतरों को भी कम किया. चाइना रेलवे 11th ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया कि रोबोट्स की मदद से मजदूरी की लागत लगभग आधी हो गई. वहीं, काम भी तीन गुना तेजी से हुआ. साथ ही सुरक्षा से जुड़ी दुर्घटनाओं में भी 90% की कमी आई. 

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वेल्डिंग करता मजदूर. (फोटो-Xinhua)

चोंगकिंग स्टेशन बड़े हाई-स्पीड ट्रेन नेटवर्क का एक खास हिस्सा है, जो साउथ- वेस्ट चीन के 14 बड़े शहरों से जोड़ता है. चोंगकिंग से यात्री सिर्फ एक घंटे में चेंगदू, दो से तीन घंटे में झांगजियाजी, करीब तीन घंटे में चांग्शा, वुहान, शीआन और कुनमिंग, और लगभग छह घंटे में बीजिंग, शंघाई या गुआंगजो पहुंचा जा सकता है. 

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