हैदराबाद में एक शख्स ने अपने लिए एक बढ़िया सी शर्ट पसंद की. फिर उस शर्ट का पेमेंट किया. शर्ट की कीमत थी 999 रुपये. उसने पहले क्रेडिट कार्ड से पेमेंट किया. लेकिन जब ट्रांजेक्शन फेल हो गया तब दोबारा पेमेंट करना पड़ा. अब यहां तक तो सब ठीक था. अक्सर हम भी नेटवर्क के जाल में फंस जाते हैं. लेकिन शख्स को दूसरे पेमेंट का पैसा 17 दिन बाद रिफंड हुआ. ये बात उस शख्स को खल गई. वो कोर्ट चला गया. अब कोर्ट ने दुकानदार को 8,000 रुपये मुआवज़ा देने को कहा है.
दुकान पर दो बार कार्ड से पैसे कटे, 17 दिन बाद आया रिफंड तो कोर्ट ने 800% ज्यादा पैसा दिलाया
एक शख्स ने अपने लिए एक शर्ट खरीदी. मगर नेटवर्क कमज़ोर होने की वजह से उसे दो बार पेमेंट करना पड़ा. फिर पहले पेमेंट का रिफंड आने में 17 दिन लग गए. अब कोर्ट ने इस मामले में शख्स के पक्ष में फैसला सुनाया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मामला लगभग दो साल पुराना है. 12 दिसंबर 2024 को शख्स ने एक कैज़ुअल शर्ट खरीदी. उसने SBI के डेबिट कार्ड से पेमेंट किया. लेकिन WiFi नेटवर्क में खराबी के कारण पेमेंट पूरा नहीं हो पाया. इसके बाद शख्स ने 999 रुपये का पेमेंट फ़ोन-पे से किया. फिर 21 दिसंबर को जब उसने अपना बैलेंस चेक किया तो पैसे कट चुके थे. माने एक ही शर्ट के लिए दो बार पैसे कटे. वो फिर से दुकान पहुंचा.
फिर दुकानदार ने शख्स को कहा कि चूंकि WiFi में दिक्कत थी इसलिए पेमेंट का पैसा दुकान के बैंक खाते में नहीं पहुंचा है. फिर कहा कि डेबिट कार्ड से कटा हुआ पैसा सात दिन के अंदर आ जाएगा. ब्रांच मैनेजर ने भी यही बात कही. मगर यहां से मामला लीगल हो गया.
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कोर्ट पहुंचा शख्सइसके बाद शख्स ने 23 दिसंबर को हैदराबाद के कंज्यूमर कोर्ट में लीगल नोटिस दाखिल कर दिया. नोटिस में आरोप लगाया कि दुकानदार के सात दिन वाले आश्वासन के बाद भी पैसे बैंक के खाते में नहीं पहुंचे. उसने मानसिक उत्पीड़न का भी आरोप लगाया. शख्स ने दावा किया कि स्टोर की तरफ से सर्विस में लापरवाही बरती गई.
इस शिकायत पर दुकान की भी सफाई आई. रिपोर्ट के मुताबिक, दुकान की तरफ से कहा गया कि शख्स द्वारा लगाए गए इल्जाम झूठे हैं. आगे कहा कि ये केवल पैसे ऐंठने की तकनीक है. लेकिन उमा वेंकट सुब्बालक्ष्मी और लक्ष्मी प्रसन्ना की बेंच ने फैसला शख्स के पक्ष में सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि स्टोर की तरफ से ये साबित नहीं हो पाया है कि रिफंड देने में 17 दिन क्यों लग गए.
कोर्ट ने अपने फैसले में स्टोर को 5,000 रुपये मुआवज़ा और 3,000 रुपये कॉस्ट के तौर पर शख्स को देने का आदेश दिया है. मोरल ऑफ़ द स्टोरी ये है कि अगर कोई ट्रांजेक्शन 'क्रेडिट पुश' फंड ट्रांसफर है. और सेंडर के खाते से पैसे कट गए हैं, लेकिन रिसीवर के खाते में नहीं पहुंचे हैं, तो तय समय सीमा के अंदर पैसे रिसीवर के खाते में जमा हो जाने चाहिए. ऐसा न होने पर, रिसीवर को जुर्माना देना होगा.
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