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भारत पर नहीं लगेगा 100% टैरिफ, ट्रंप ने 'देशहित' में रूस से तेल खरीदने पर छूट दी

भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है. अगस्त में भारत के कुल ऑयल इंपोर्ट में रूस से खरीदे गए तेल की हिस्सेदारी 45% थी. ऐसे में अमेरिका के नए कानून के तहत भारत पर 100% Tariff लग सकता था.

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रूस से तेल खरीदने पर फिलहाल भारत को बड़ी राहत मिली. (Courtesy: PT)

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  • अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाले कानून पर फिलहाल रोक लगाने के लिए एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पर 16 अक्टूबर को हस्ताक्षर किए।
  • 18 सितंबर को अमेरिकी संसद ने रूस और ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने वाले कानून को मंजूरी दी, जिसका मकसद यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस की वित्तीय मदद रोकना था।
  • ट्रंप के फैसले से भारत पर 100% टैरिफ लगने का खतरा टल गया है, जिससे भारत को रूस से तेल खरीदने में आर्थिक राहत मिलने की संभावना बनी है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाले कानून पर फिलहाल रोक लगा दी है. ट्रंप ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को इससे जुड़े एक एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए. उन्होंने अमेरिकी संसद 'कांग्रेस' से कहा कि देश के हित में इस कानून को अभी के लिए रोकना जरूरी है. इससे भारत पर भी 100% टैरिफ लगने का खतरा टल गया है.

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18 सितंबर को डॉनल्ड ट्रंप के साइन के साथ 'लिंडसे ओ ग्राहम रूस और ईरान पर सैंक्शन लगाने वाला कानून, 2026' अस्तित्व में आया. इस कानून के तहत अमेरिकी सरकार रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखने वाले टॉप 5 देशों पर 100% टैरिफ लगा सकती थी. ऐसे में भारत और चीन जैसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगने का खतरा बढ़ गया था.

अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में इस कानून को बड़े बहुमत से मंजूरी मिली थी. इस कानून का मकसद रूस की कमाई पर रोक लगाना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए उसे पैसा जुटाने में मुश्किल हो.

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अमेरिका को डीजल देगा रूस

डॉनल्ड ट्रंप का ये फैसला रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुए  एग्रीमेंट के बाद आया. ट्रंप के मुताबिक, रूस दुनिया भर में एनर्जी की कीमत कम करने में मदद के लिए अमेरिका को डीजल देगा. शुरुआत में रूस तीन लाख टन से ज्यादा डीजल भेजेगा. इसके बाद नवंबर और आने वाले महीनों में भी सप्लाई जारी रहेगी.

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डॉनल्ड ट्रंप का एग्जीक्यूटिव ऑर्डर. (Courtesy: White House)
भारत के लिए ट्रंप का फरमान क्यों अहम?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है. अगस्त में भारत के कुल ऑयल इंपोर्ट में रूस से खरीदे गए तेल की हिस्सेदारी 45% थी. उस महीने भारत ने रूस से रोजाना 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था. ऐसे में अमेरिका के इस कानून से भारत पर भारी टैरिफ लगने का खतरा था.

यह भी पढ़ें: ट्रंप ने रूस-ईरान से तेल खरीदने पर रोक वाले कानून पर किया साइन, भारत पर लगेगा 100% टैरिफ?

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इस कानून को साउथ कैरोलिना के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने आगे बढ़ाया था. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी इसका समर्थन किया था.

अमेरिकी कानून पर भारत का बयान

शुक्रवार, 16 अक्टूबर को 100% टैरिफ लगाने वाले अमेरिकी कानून के सवाल पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा,

"हमने हमेशा ग्लोबल एनर्जी मार्केट में स्टेबिलिटी की वकालत की है."

विदेश मंत्रालय पहले भी कह चुका है कि भारत ने इस कानून का दोनों देशों के रिश्तों और ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर पड़ने वाले असर के बारे में अमेरिकी अधिकारियों को साफ-साफ बता दिया है.

वीडियो: डॉनल्ड ट्रंप ने किस पर लगाया 100 फीसदी टैरिफ, भारत पर क्या असर पड़ेगा?

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