भारत में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) लागू हो गया है. इसके तहत सरकार बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए प्रताड़ित गैर-मुस्लिम प्रवासियों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को भारतीय नागरिकता (Citizenship) देगी. इस पर देश की विपक्षी पार्टियां सरकार पर हमलावर हैं. साथ ही दुनियाभर से इस पर रिएक्शन आ रहे हैं. इस बीच अमेरिका (USA) ने भी CAA की अधिसूचना पर प्रतिक्रिया दी है. अमेरिका का कहना है कि वो भारत में CAA लागू करने की अधिसूचना को लेकर चिंतित है. अमेरिका ने कहा कि वो कानून को लागू करने की प्रक्रिया पर क़रीब से नज़र बनाए हुए हैं.
'कानून लागू करने की प्रक्रिया पर करीबी नज़र', अमेरिकी ने 'चिंता' जताते हुए CAA पर क्या कहा?
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा, "धार्मिक स्वतंत्रता का आदर करना और सभी समुदायों के साथ बराबरी से पेश आना लोकतांत्रिक सिद्धांत है."

गुरुवार, 14 मार्च को अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने पत्रकारों से बातचीत की. इस बातचीत में मिलर ने कहा,
“हम CAA की अधिसूचना को लेकर चिंतित हैं. हम बारीक़ी से नज़र बनाए हुए हैं कि इस एक्ट को कैसे लागू किया जाएगा. धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान और कानून के तहत सभी समुदायों के लिए समान व्यवहार मौलिक लोकतांत्रिक सिद्धांत हैं.”
केंद्र सरकार ने 11 मार्च को CAA का नोटिफिकेशन जारी किया. साथ ही ये कानून देशभर में लागू हो गया. इसके तहत देश में रह रहे ग़ैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी. बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यक हैं. हालांकि, ये फायदा केवल उन्हीं प्रवासियों/शरणार्थियों को मिलेगा जो 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आ चुके हैं. सरकार के इस फ़ैसले के बाद विवाद खड़ा हो गया है.
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बता दें, 11 दिसंबर 2019 को संसद में CAA पारित किया गया था. इसके बाद पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे. इस विरोध प्रदर्शन का केंद्र दिल्ली रहा. जहां महीनों तक प्रदर्शन होता रहा. इसके साथ ही CAA ने सांप्रदायिक तनाव को भी जन्म दिया था. 2020 की शुरुआत में इसके कारण पूर्वोत्तर दिल्ली में हिंसक दंगे हुए थे. इन दंगों में कई लोगों की जान चली गई थी, जबकि सैकड़ों लोग घायल हो गए थे.
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