The Lallantop

यूपी सरकार इस बात की जांच कर रही है कि ख़राब PPE किट की बात बाहर कैसे आई

STF की जांच में कौन नपेगा?

Advertisement
post-main-image
यूपी में पिछले 3 साल में गन्ना खरीदी के दाम में कोई इजाफा नहीं हुआ है. पिछली बार 10 रुपए की बढ़ोत्तरी तब हुई थी जब 2017 में योगी सरकार सत्ता में आई थी.
यूपी सरकार के अधीन आने वाला मेडिकल शिक्षा और ट्रेनिंग निदेशालय यानी DGME. इनका काम प्रदेश के सभी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्था दुरुस्त रखना. उनका काम धाम सही रखना. उन पर नज़र रखना है. अब इन्होंने सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों को एक पत्र लिखा. कहा कि जो PPE किट आप सभी को मिली है, उसका इस्तेमाल मत करिए. लौटाना है. अब ये पत्र मीडिया में लीक हो गया. और अब यूपी STF यानी स्पेशल टास्क फ़ोर्स इस मामले की जांच कर रही है कि ये लेटर लीक कैसे हो गया?
क्या है पूरा मामला?
DGME के डायरेक्टर डॉ. केके गुप्ता. इन्होंने 13 अप्रैल को पत्र लिखा. यूपी के भिन्न-भिन्न मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों को. पत्र में कहा गया कि नोएडा के गवर्न्मेंट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ और मेरठ के लाला लाजपत राय स्मृति मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने सूचित किया है कि उन्हें जो PPE किट्स मिली हैं, वो गड़बड़ हैं. ये PPE किट यूपी सरकार के अधीन आने वाले UP मेडिकल सप्लाइज़ कॉर्पोरेशन (UPMSC) द्वारा भिजवाई गयी थीं. 
13 अप्रैल को DGME की ओर से लिखा गया पत्र, जिसके लीक होने की जांच चल रही है. 13 अप्रैल को DGME की ओर से लिखा गया पत्र, जिसके लीक होने की जांच चल रही है.

केके गुप्ता ने इस पत्र में ये भी लिखा कि जिन भी संस्थानों को गड़बड़ PPT किट मिली हैं, वे इसे तुरंत वापिस कर दें और DGME ऑफ़िस को सूचित कर दें. ये PPE किट उन्हीं मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों को भेजी गयी थीं, जहां कोरोनावायरस के इलाज के लिए सेंटर बनाए गए थे. प्रदेश में लगभग 45 जगहों पर.
PPE किट में क्या गड़बड़ी है?
न्यूज़ 18 में सूत्रों के हवाले से छपी ख़बर की मानें तो UPMSC द्वारा भेजी गयी PPE किट्स की लम्बाई मानकों की तुलना में छोटी थी. इन PPE किट की लंबाई औसतन 3.45 फ़ीट से 4.45 फ़ीट के बीच थी. जबकि भारत में वयस्कों की औसत लम्बाई 5 फ़ीट या उससे ऊपर होती है. इसके अलावा कई डॉक्टरों ने ये भी शिकायत की कि ये PPE किट कई मौक़ों पर फट जा रही थीं. उनकी सिलाई उधड़ जा रही थी. 
अब क्या हुआ?
13 अप्रैल को लिखी गयी ये चिट्ठी 16 अप्रैल को लीक हो गयी. अब हो रही है जांच. यूपी सरकार के गृह मंत्रालय के कहने पर STF कर रही है. सिरा तलाशने की कोशिश कर रही है कि DGME निदेशक द्वारा भेजा गया लेटर मीडिया में कैसे चला आया? कहाँ से निकला कि सोशल मीडिया पर चर्चा होने लगी? अब इस बारे में जो जानकारी सामने आ रही है, वो ये कि DGME समेत कई अफसरों से STF ने पूछताछ शुरू की है. सबसे पहले शिकायत करने वाले नोएडा और मेरठ मेडिकल कॉलेज के भी बयान दर्ज किए जायेंगे. कहा जा रहा है कि PPE किट खरीद कमेटी में कई बड़े अधिकारी भी शामिल हैं, लेकिन इस समय यूपी STF की जिम्मेदारी पत्र के लीक की जांच करना है. 
प्रियंका गांधी को यूपी सरकार पर सवाल उठाने का एक और मौक़ा मिल गया है. प्रियंका गांधी को यूपी सरकार पर सवाल उठाने का एक और मौक़ा मिल गया है.

अब सबकुछ के साथ यूपी में सियासत भी ज़ोर पर है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्विटर से अपनी बात रखी. कहा कि ये हैरानी की बात है कि यूपी सरकार को ये घोटाला नहीं परेशान कर रहा है बल्कि ये परेशान कर रहा है कि ख़राब किट की बात बाहर कैसे आ गयी. प्रियंका गांधी ने ये भी कहा है कि अच्छा हुआ कि ख़राब किट की बात बाहर आ गई, वरना बात रफ़ा-दफ़ा कर दी जाती. प्रदेश सरकार ने या भाजपा ने अब तक कोई पक्ष तो सामने नहीं रखा है. बस एक ही बात कि यूपी STF पत्र के लीक होने की जांच कर रही है.


कोरोना ट्रैकर :

Advertisement
Advertisement