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नावी पिल्लै के शांति का नोबेल जीतते ही अमेरिका ने ICC पर बैन लगाया

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 9 अक्टूबर को इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) को प्रतिबंधों के दायरे में डाल दिया. यह कदम ICC की पूर्व जज नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की घोषणा के कुछ घंटे बाद आया. ICC की डिप्टी प्रॉसिक्यूटर नजहत शमीम खान ने कहा है कि प्रतिबंधों के बावजूद कोर्ट अपना काम जारी रखेगा.

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मार्को रूबियो ने कड़े शब्दों में ICC को एक तरह की चेतावनी दी है. (COURTSEY- Getty)

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  • अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने 9 अक्टूबर को इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की, जिसमें ICC से लेन-देन वाली कंपनियों को भी दंडित करने की सुविधा है।
  • ट्रंप प्रशासन ने लंबे समय से ICC के मुकदमों और उसके प्रॉसिक्यूटरों पर विरोध जताया है क्योंकि ICC ने अमेरिकी सैनिकों और इजरायल के अधिकारियों के खिलाफ जांच और गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे।
  • इन प्रतिबंधों के बाद ICC की डिप्टी प्रॉसिक्यूटर नजहत शमीम खान ने कहा कि यह कदम कोर्ट के काम को प्रभावित नहीं करेगा और ट्रिब्यूनल अपने कार्यों को जारी रखेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का प्रशासन आजकल ऐलान पर ऐलान कर रहा है. पहले आईटी कंपनियों पर शिकंजा कसा. फिर हत्या के एक दोषी की फांसी की लाइव स्ट्रीमिंग की घोषणा की. और 9 अक्टूबर को ट्रंप प्रशासन ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) पर प्रतिबंध लगा दिए.

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इस फैसले की टाइमिंग भी काफी महत्वपूर्ण है. इससे कुछ ही घंटे पहले ICC के एक पूर्व जज को नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा हुई थी. दूसरी ओर ICC की डिप्टी प्रॉसिक्यूटर नजहत शमीम खान ने इन प्रतिबंधों की निंदा की है. उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों से ट्रिब्यूनल का काम नहीं रुकेगा.

दरअसल 9 अक्टूबर को दक्षिण अफ्रीका की कानूनविद नावी पिल्लै को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की घोषणा हुई. पिल्लै ICC की पूर्व जज रही हैं. उन्होंने रवांडा के लिए बने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में भी जज और अध्यक्ष के तौर पर काम किया था. वह 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त भी रही थीं. उनके नोबेल जीतने के कुछ घंटे बाद ही ट्रंप प्रशासन ने ICC पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की. यह टाइमिंग इसलिए भी ध्यान खींचती है क्योंकि ICC और ट्रंप प्रशासन के बीच पहले से तनाव रहा है. 

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ट्रंप प्रशासन ने ICC पर प्रतिबंध लगा दिए हैं
शुरू से ICC के खिलाफ रहा है ट्रंप का रुख

ट्रंप प्रशासन लंबे समय से इस कोर्ट का विरोधी रहा है. 2002 में बनी यह कोर्ट युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के मामलों में मुकदमा चलाने के लिए बनाया गया था. ट्रंप प्रशासन पहले भी इसके प्रॉसिक्यूटरों और जजों पर प्रतिबंध लगा चुका है. लेकिन हालिया कदम को देखें तो ये पिछले वालों से कहीं कड़ा है. क्योंकि, इसमें उन कंपनियों को भी दंडित किया जा सकता है जो कोर्ट को सेवाएं देती हैं. इस बारे में जानकारी देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बयान में कहा, 

राष्ट्रपति ट्रंप कभी भी इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट को अमेरिकियों पर मुकदमा चलाने की इजाजत नहीं देंगे. इसीलिए, आज अमेरिका इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट पर प्रतिबंध लगा रहा है. हम इस मनमानी करने वाले कोर्ट के साथ लेन-देन पर रोक लगाएंगे, उनके संसाधन काट देंगे और उनकी काम करने की क्षमता को खत्म कर देंगे.

ICC ने क्या कहा है?

ICC की डिप्टी प्रॉसिक्यूटर नजहत खान ने रॉयटर्स से कहा कि इन प्रतिबंधों की निंदा की जानी चाहिए. उन्होंने कहा,

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इन प्रतिबंधों का मकसद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून के शासन और एक स्वतंत्र न्यायिक संस्था के काम को कमजोर करना है. हमारा काम सभी स्थितियों, जांच और मुकदमों में जारी रहेगा.

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ICC से क्यों नाराज है ट्रंप प्रशासन?

अमेरिका की ICC से नाराजगी कोई नई नहीं है. दरअसल ICC ने इजरायल के कई अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं. इनमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी शामिल हैं. साथ ही ICC ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की कार्रवाई की पुरानी जांच भी की है. इस कोर्ट के 125 सदस्य देश हैं, जिनमें सभी EU देश और NATO गठबंधन सदस्य शामिल हैं. नाटो देशों में अमेरिका और तुर्किए इसका हिस्सा नहीं हैं. 

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