अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नोबेल पीस प्राइज के लिए अपनी दावेदारी पेश की है. अमेरिका के वाइट हाउस में बैठकर उन्होंने खुद को इस योग्य बताया है. दावा किया कि चूंकि उन्होंने आठ युद्ध रुकवाए हैं इसलिए वो इस पुरस्कार के हकदार हैं. ट्रंप पिछले साल भी कई बार खुद को नोबेल पीस प्राइज के लिए योग्य बता चुके हैं. प्राइज न मिलने पर नाराज़ भी हुए थे.
'8 युद्ध रुकवाए' डॉनल्ड ट्रंप का दावा, क्या इस बार नोबेल शांति पुरस्कार मिलेगा?
Donald Trump Nobel Peace Prize: 9 अक्टूबर 2026 को नोबेल पीस प्राइज के विनर की घोषणा होनी है. इससे पहले डॉनल्ड ट्रंप ने फिर से दावा कर दिया कि वो इस पुरस्कार के लिए योग्य हैं. डॉनल्ड ट्रंप का दावा है कि उन्होंने आठ युद्ध रुकवाए हैं.

अब 9 अक्टूबर 2026 को नोबेल पीस प्राइज के विनर की घोषणा होनी है. इससे पहले उन्होंने फिर से दावा कर दिया है. डॉनल्ड ट्रंप ने 7 अक्टूबर को चुनाव प्रचार के बाद वॉशिंगटन लौटने पर पत्रकारों से बातचीत की. कहा,
‘मैंने ऐसे काम किए हैं जो किसी और ने कभी नहीं किए. मैं डींग नहीं मार रहा, बस आपको सच बता रहा हूं. शायद ही किसी राष्ट्रपति ने कभी कोई युद्ध खत्म किया हो. मैंने 8 युद्ध खत्म किए.’
अमेरिकी राष्ट्रपति यहीं नहीं रुके. उन्होंने ये भी कहा कि जल्द ही एक और जंग का नाम इस लिस्ट में शामिल हो जाएगा जहां ट्रंप की बदौलत सीजफायर हुआ हो. ये इशारा ईरान जंग की ओर था, जहां हकीकत में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है.
कौन-से युद्ध रुकवाने का दावा?डॉनल्ड ट्रंप ने बार-बार तनाव कम करने या समझौते तक पहुंचने में अमेरिका की भूमिका का ज़िक्र किया है. इसमें भारत और पाकिस्तान, इजरायल और ईरान, इजरायल और हमास, कंबोडिया और थाईलैंड, सर्बिया और कोसोवो, रवांडा और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो, मिस्र और इथियोपिया, और आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच संघर्ष शामिल हैं.
जून 2025 में ट्रंप ने ये भी दावा किया कि अब तक उन्हें कई दफा नोबेल पीस प्राइज मिल जाना चाहिए था. तब उन्होंने कहा था कि ‘मुझे अब तक चार से पांच नोबेल पीस पुरस्कार मिल जाना चाहिए था.’
हालांकि इनमें से कुछ संघर्ष अब भी जारी हैं और कुछ ने किसी भी ‘थर्ड पार्टी की भूमिका’ से इनकार किया है. जैसे भारत ने साफ किया कि 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच जो सैन्य संघर्ष चला उसके सीजफायर में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी.
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कई साल से कर रहे ‘नोबेल’ की मांगअपने पहले कार्यकाल के दौरान, डॉनल्ड ट्रंप ने बार-बार उत्तर कोरिया के साथ अपनी कूटनीतिक कोशिशों की ओर ध्यान खींचा. 2018 में, नॉर्वे के दो नेताओं ने कहा कि उत्तर कोरिया के लीडर किम जोंग उन के साथ हुई शिखर वार्ता के बाद उन्होंने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया था.
डॉनल्ड ट्रंप ने पहले कार्यकाल के दौरान कहा था कि जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने उन्हें इस पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया था. लेकिन, आबे ने इस नॉमिनेशन के बारे में कोई जानकरी नहीं दी थी. दूसरे कार्यकाल में भी ट्रंप यही हट लेकर बैठ गए हैं.
फ़रवरी 2025 में, वाइट हाउस में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाक़ात के दौरान, ट्रंप ने खुलकर इस बात की शिकायत की कि योग्य होने के बावजूद शायद उन्हें ये अवॉर्ड कभी नहीं मिलेगा. अब इस साल फिर से उन्होंने अपनी दावेदारी पेश की है.
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