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सबसे ज्यादा इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वाली 5 कंपनियों में से 3 ED, IT के रडार पर

Electoral Bond के जरिए राजनीतिक दलों को सबसे ज्यादा पैसा देने वाली शीर्ष कंपनियां केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर हैं. टॉप 5 डोनर कंपनियों में से 3 पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का छापा पड़ चुका है.

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इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारियों को पब्लिश कर दिया गया है. (तस्वीर: इंडिया टुडे)

इलेक्टोरल बॉन्ड (Electoral Bond) के जरिए राजनीतिक दलों को सबसे ज्यादा दान देने वाली टॉप-5 कंपनियों में से 3 पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का छापा पड़ चुका है. इन कंपनियों के नाम हैं- फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज, मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और वेदांता लिमिटेड.

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डेटा के मुताबिक फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज ने सबसे ज्यादा 1368 करोड़ रुपये के बॉन्ड्स खरीदे हैं. ये एक लॉटरी कंपनी है जिसे ‘लॉटरी किंग’ के नाम से चर्चित सैंटियागो मार्टिन चलाता है. कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि मार्टिन और उसकी कंपनी पर समय-समय पर छापे पड़ चुके हैं. 

ED के अनुसार, सैंटियागो मार्टिन पर लॉटरी रेगुलेशन एक्ट 1998 के उल्लंघन का आरोप लगा. उसने कथित रूप से सिक्किम सरकार को धोखा देकर गलत तरीके से लाभ प्राप्त करने के लिए आपराधिक साजिश रची. साजिश रची गई केरल में, ऐसे आरोप लगे. इसके बाद कोयंबटूर और चेन्नई में उसके परिवार के सदस्यों और कंपनी के ठिकानों पर छापा मारा गया. ED ने 22 जुलाई 2019 को अपने एक बयान में ये जानकारी दी.

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मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस मामले की जांच शुरू हुई 2019 में. जुलाई 2019 में कंपनी के 250 करोड़ की संपत्ति को अटैच किया गया. फिर 2 अप्रैल 2022 को भी 409.92 करोड़ की संपत्ति को इस केस में अटैच किया गया. पांच दिन बाद 7 अप्रैल 2022 को कंपनी ने 100 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे.

फिर 15 मई 2023 को ED ने कंपनी मार्टिन की 457 करोड़ की अचल संपत्ति को फ्रीज कर दिया. 

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मार्टिन और कंपनी के ठिकानों पर इससे पहले भी ED का छापा पड़ा था. 2008 में भी मार्टिन पर सिक्किम सरकार से 4500 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप लगा था. इसके बाद 2011 और 2013 में उसके ठिकानों पर छापा मारा गया.

इसके बाद जुलाई 2019 में ED ने PMLA के तहत कोयंबटूर में सैंटियागो मार्टिन और उसके सहयोगियों के 61 फ्लैट, 82 ओपेन प्लॉट और 6 प्लॉट को अटैच किया था. इनकी कीमत 119.6 करोड़ रुपये बताई गई थी.

दिसंबर 2021 में ED ने सैंटियागो मार्टिन के 19.59 करोड़ की अचल संपत्ति को अटैच किया था.

MEIL ने खरीदे 1000 करोड़ के बॉन्ड्स

चुनावी बॉन्ड्स से सबसे ज्यादा चंदा देने वाली कंपनियों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर है हैदराबाद स्थित मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL). इस कंपनी ने 2019 से 2024 के बीच 1000 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे हैं. इस कंपनी को चलाते हैं-  कृष्णा रेड्डी. ये कंपनी तेलंगाना सरकार की कई प्रमुख सरकारी प्रोजेक्ट्स में शामिल है. जैसे- कालेश्वरम बांध परियोजना. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये कंपनी तेलंगाना में जोजिला सुरंग और पोलावरम बांध बनाने का काम कर रही है.

अक्टूबर 2019 में आयकर विभाग ने कंपनी के ठिकानों पर छापा मारा था. इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से भी जांच शुरू की गई. उसी साल 12 अप्रैल को MEIL ने 50 करोड़ रुपये के पोल बॉन्ड खरीदे थे.

Vedanta Group

वेदांत ग्रुप बॉन्ड के जरिए दान देने वाली पांचवीं सबसे बड़ी कंपनी है. ये अनिल अग्रवाल की कंपनी है. वेदांत ग्रुप ने 376 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे हैं. जिसकी पहली किश्त अप्रैल 2019 में खरीदी गई थी.

साल 2018 में ED ने दावा किया था कि उनके पास वेदांता ग्रुप के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं. कंपनी पर आरोप लगा कि कुछ चीनी नागरिकों को गैर कानूनी तरीके से वीजा दिया गया. इस मामले में कंपनी के खिलाफ 2022 में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया था.

16 अप्रैल, 2019 को वेदांता लिमिटेड ने 39 करोड़ रुपये से अधिक के बॉन्ड खरीदे. कोविड के समय को छोड़ दें तो 2020 से नवंबर 2023 तक कंपनी ने 337 करोड़ से अधिक के बॉन्ड खरीदे.

वीडियो: इलेक्टोरल बॉन्ड का डेटा जारी, इन बड़ी कंपनियों ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए दिया चंदा

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