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NATO में शामिल हुआ स्वीडन, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद हो रही थी मांग

NATO के महासचिव Jens Stoltenberg ने कहा कि Sweden को अब NATO की टेबल पर उचित स्थान मिलेगा.

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NATO के सदस्यों की संख्या अब 32 हो गई है. (फाइल फोटो: AP, 5 जुलाई 2023)

स्वीडन नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) में शामिल (Sweden joins nato) हो गया. NATO के सदस्यों की संख्या अब 32 हो गई है. स्वीडन ने मई 2022 में फिनलैंड के साथ नाटो में शामिल होने के लिए आवेदन किया था. यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद स्वीडन की आबादी का एक बड़ा हिस्सा नाटो में शामिल होने के पक्ष में था.

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न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन (Ulf Kristersson) और राज्य सचिव एंटनी ब्लिंकन (Antony Blinken) की उपस्थिति में 7 मार्च को सदस्यता से जुड़े दस्तावेज विदेश विभाग में जमा कर दिए गए. 

इस दौरान ब्लिंकेन ने कहा,

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"यह स्वीडन के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है. यह गठबंधन (NATO) के लिए ऐतिहासिक है. हमारा नाटो गठबंधन अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और बड़ा है."

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बाद में स्वीडिश प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन ने व्हाइट हाउस का दौरा किया और फिर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन के दौरान गेस्ट बनें. व्हाइट हाउस ने कहा है कि स्वीडन के NATO सदस्य बनने से संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगी देश और भी सुरक्षित हो जाएंगे. व्हाइट हाउस ने अपने बयान में कहा,

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“NATO दुनिया के इतिहास में सबसे शक्तिशाली रक्षात्मक गठबंधन है. और ये आज भी हमारे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना 75 साल पहले था. जब हमारे गठबंधन की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के मलबे से हुई थी.”

NATO के महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग (Jens Stoltenberg) ने इसे एक ऐतिहासिक दिन बताया है. उन्होंने एक बयान में कहा,

"स्वीडन को अब NATO की टेबल पर उचित स्थान मिलेगा. NATO की नीतियों और निर्णयों को आकार देने में स्वीडन को समान भागीदारी मिलगी."

ब्रुसेल्स में सैन्य संगठन के मुख्यालय के बाहर स्वीडिश झंडा फहराया जाएगा. स्टोल्टेनबर्ग ने कहा कि स्वीडन को अब NATO के अनुच्छेद 5 के तहत दी गई सुरक्षा प्राप्त है, जो सहयोगियों की स्वतंत्रता और सुरक्षा की गारंटी देता है.

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन एक सैन्य गठबंधन है. इसे NATO के नाम से जाना जाता है. NATO की स्थापना 1949 में हुई थी. इसका मकसद सोवियत संघ के विस्तार को रोकना था. इसका मुख्यालय बेल्जियम के ब्रुसेल्स में है.

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