'तुम्हें छोड़ दिया जाएगा, अगर तुम दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बयान दे दो.' ये धमकियां अब तक आपने अगवा कर लेने वालों को बोलते हुए सुनी होंगी कि छोड़ दिया जाएगा. अगर इतना पैसा पहुंचा दो. मगर इस बार ये इल्ज़ाम लगा है सीबीआई पर. पता नहीं कितनी सच्चाई है इस इल्ज़ाम में. मगर ये वही सीबीआई है, जब कोई केस उलझ जाता है तो सीबीआई से उम्मीद की जाती है कि ये निष्पक्ष जांच करेगी. लेकिन दूसरी तरफ ये भी सच है कि बार बार उसपर सरकारी तोता होने के भी आरोप लगे हैं.
'केजरीवाल के खिलाफ बयान दे दो, तुम्हें छोड़ दिया जाएगा'
ऐसी धमकियां तो फिल्मों में सुनी होंगी, लेकिन ये इल्ज़ाम सीबीआई पर लगा है.
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फोटो - thelallantop
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सीएम अरविंद केजरीवाल के फॉर्मर प्रिंसिपल सेक्रेट्री रहे राजेंद्र कुमार ने वॉलंटरी रिटायरमेंट मांगा है. साथ ही उन्होंने 12 पेज का लेटर लिखकर सीबीआई पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने लेटर में कहा है कि सीबीआई ने उन पर अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बयान देने के लिए दबाव डाला था. इसके बदले में उन्हें छोड़ देने की बात सीबीआई ने की.
राजेंद्र कुमार को सीबीआई ने करप्शन के इल्ज़ाम में अरेस्ट किया था. घूसखोरी और पद का गलत इस्तेमाल करने का इल्ज़ाम हैं. राजेंद्र कुमार को पिछले साल करप्शन के इल्ज़ाम में गिरफ्तार होने पर जुलाई में सस्पेंड कर दिया गया था. टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक लेटर में राजेंद्र कुमार ने अपने करियर के बारे में लिखा है. लेटर में लिखा है, 'सीबीआई ने उन्हें और सीएम को फंसाने के लिए लोगों पर दबाव डाला और बहुत से लोगों की पिटाई भी की. इस सिस्टम पर बहुत यकीन था, क्योंकि एक गरीब परिवार से आना वाला शख्स भी सिविल सर्विसेज एग्जाम में सफलता पाकर आईएएस बन गया था, लेकिन आज हालात बदल गए हैं.'
राजेंद्र कुमार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के कई आदेशों का उल्लंघन हुआ और उनका सस्पेंशन गैरकानूनी तरीके से 2 अक्टूबर को फिर से 180 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया. उन्होंने लेटर में लिखा है कि उन्हें मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित किया जाता रहा, लेकिन वह अपने मूल्यों से नहीं हटे. कुमार का कहना है कि बंसल सुसाइड केस के बाद वह बार-बार यह सोच रहे हैं कि क्या देश में न्याय है?

जब राजेंद्र कुमार (ब्लैक जैकेट में) को सीबीआई ने अरेस्ट किया.
जानकारी के मुताबिक, मामला जुलाई 2010 से अप्रैल 2011 के बीच का है, जब राजेंद्र कुमार हेल्थ डिपार्टमेंट में थे. आरोप है कि राजेंद्र कुमार ने हेल्थ डिपार्टमेंट में 16 आईटी एम्प्लोई की नई पोस्ट क्रिएट कीं. और संदीप कुमार को प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर नियुक्त किया. सीबीआई के मुताबिक राजेंद्र कुमार को 50 करोड़ रुपये के घोटाले का मुख्य आरोपी बताया जा रहा है. यह पूरी कवायद 2006 से शुरू हुई थी. सच क्या है ये तो जांच का ही विषय है. लेकिन राजेंद्र कुमार ने सीबीआई पर जो इल्ज़ाम लगाए गएहैं वो बेहद गंभीर हैं.
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राजेंद्र कुमार को सीबीआई ने करप्शन के इल्ज़ाम में अरेस्ट किया था. घूसखोरी और पद का गलत इस्तेमाल करने का इल्ज़ाम हैं. राजेंद्र कुमार को पिछले साल करप्शन के इल्ज़ाम में गिरफ्तार होने पर जुलाई में सस्पेंड कर दिया गया था. टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक लेटर में राजेंद्र कुमार ने अपने करियर के बारे में लिखा है. लेटर में लिखा है, 'सीबीआई ने उन्हें और सीएम को फंसाने के लिए लोगों पर दबाव डाला और बहुत से लोगों की पिटाई भी की. इस सिस्टम पर बहुत यकीन था, क्योंकि एक गरीब परिवार से आना वाला शख्स भी सिविल सर्विसेज एग्जाम में सफलता पाकर आईएएस बन गया था, लेकिन आज हालात बदल गए हैं.'
राजेंद्र कुमार के मुताबिक है कि केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के झगड़े में उन्हें मोहरा बनाया गया. उन्हें पब्लिक सर्विसेज में शानदार योगदान के लिए प्राइम मिनिस्टर अवॉर्ड दिया गया, लेकिन अब उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है. सीबीआई उन्हें परेशान कर रही है और झूठे केसों में फंसाया जा रहा है.कुमार ने लिखा, 'एसीबी ने एक महीने तक उन सवालों को लेकर पूछताछ की, जिनका मुझसे कोई लेना-देना ही नहीं था. सीबीआई ने उनसे जबरन मेल का एक्सेस हासिल किया और धमकी भी दी.' लेटर में कुमार ने इलज़ाम लगाया कि सीबीआई ने झूठा केस दर्ज किया और पूछताछ के दौरान बार-बार कहा कि उन्हें छोड़ दिया जाएगा, अगर वह अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ बयान दे दें.
राजेंद्र कुमार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के कई आदेशों का उल्लंघन हुआ और उनका सस्पेंशन गैरकानूनी तरीके से 2 अक्टूबर को फिर से 180 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया. उन्होंने लेटर में लिखा है कि उन्हें मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित किया जाता रहा, लेकिन वह अपने मूल्यों से नहीं हटे. कुमार का कहना है कि बंसल सुसाइड केस के बाद वह बार-बार यह सोच रहे हैं कि क्या देश में न्याय है?
राजेंद्र कुमार पर ये हैं इल्ज़ाम
सीबीआई ने करप्शन और पद का गलत इस्तेमाल करने के इलज़ाममें राजेंद्र कुमार को तो गिरफ्तार किया ही था. साथ ही तरुण शर्मा, संदीप कुमार, दिनेश गुप्ता और अशोक कुमार शामिल को भी अरेस्ट किया था. संदीप और दिनेश प्राइवेट फर्म एंडेवर के डायरेक्टर हैं. राजेंद्र कुमार पर दिल्ली सरकार के काम के लिए ठेकेदारी देने में प्राइवेट कंपनी को लाभ पहुंचाने का भी आरोप है.
जब राजेंद्र कुमार (ब्लैक जैकेट में) को सीबीआई ने अरेस्ट किया.
जानकारी के मुताबिक, मामला जुलाई 2010 से अप्रैल 2011 के बीच का है, जब राजेंद्र कुमार हेल्थ डिपार्टमेंट में थे. आरोप है कि राजेंद्र कुमार ने हेल्थ डिपार्टमेंट में 16 आईटी एम्प्लोई की नई पोस्ट क्रिएट कीं. और संदीप कुमार को प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर नियुक्त किया. सीबीआई के मुताबिक राजेंद्र कुमार को 50 करोड़ रुपये के घोटाले का मुख्य आरोपी बताया जा रहा है. यह पूरी कवायद 2006 से शुरू हुई थी. सच क्या है ये तो जांच का ही विषय है. लेकिन राजेंद्र कुमार ने सीबीआई पर जो इल्ज़ाम लगाए गएहैं वो बेहद गंभीर हैं.
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