31 जनवरी की शाम चांद बहुत खास नज़र आने वाला है. इस दिन चांद को सिर्फ़ मून नहीं, बल्कि 'सुपर ब्लू ब्लड मून' कहेंगे. ये कैसा दिखेगा और कितने बजे दिखेगा, ये सब जानने से पहले ज़रूरी है कि ये जानें कि 'सुपर ब्लू ब्लड मून' होता क्या है.
31 जनवरी की शाम इस समय चांद नहीं देखा, तो ज़िंदगीभर खुद को कोसोगे
वो तीन पल, जब लोग चांद देखने को तरसते हैं, एक साथ होने जा रहे हैं.

इसे समझने के लिए आपको नीचे बताई गईं तीनों चीज़ें पता होनी चाहिए, क्योंकि जिस दिन ये तीनों चीज़ें साथ में घटती हैं, उसी दिन 'सुपर ब्लू ब्लड मून' होता है.
1. ब्लू मून
आमतौर पर पूर्णिमा एक महीने में एक बार ही आती है, लेकिन कभी-कभार जब पूर्णिमा महीने की एक या दो तारीख को आती है, तो महीने के आखिर में भी पूर्णिमा आ जाती है. एक महीने के अंदर ये जो दूसरी पूर्णिमा आती है, इसे ही अंग्रेज़ी में ब्लू मून कहते हैं.

पहली तारीख को पूरा चांद निकले तो महीने के आखिर में फिर से चांद पूरा निकलता है.
2. पूर्ण चंद्र ग्रहण (ब्लड मून)
सूरज का चक्कर लगाती है धरती और धरती का चक्कर लगाता है चांद. ऐसे में जब सूरज, धरती और चांद सीधी रेखा में आ जाएं, तो धरती की छाया चांद पर पड़ती है. इसे हम चंद्र ग्रहण कहते हैं. इसमें भी जब छाया की वजह से पूरा चांद छिप जाए, तो उसे पूर्ण चंद्र ग्रहण कहते हैं. अंग्रेजी में ब्लड मून.

चित्र से जानिए कैसे लगता है पूर्ण चंद्र ग्रहण.
3. सुपरमून
चांद धरती के इर्द-गिर्द बिल्कुल गोलाई में नहीं, बल्कि इलिप्टिकली यानी अंडाकार घूमता है. वो भाग, जिसमें चांद धरती के चारों ओर घूमता है, उसे एलिप्स कहते हैं. एलिप्स की छोटी बाजू को पेरिजी कहते हैं, तो बड़ी बाजू को अपोजी कहते हैं.

चांद इस तरह धरती का चक्कर लगाता है. Source: नासा का यूट्यूब चैनल.
जब चंद्रमा पेरिजी पर होता है, तब वो धरती के सबसे पास होता है. वो आम रातों में दिखने वाले चांद से 14% ज़्यादा बड़ा और 30% ज़्यादा चमकता हुआ दिखता है. जिस दिन पूर्णिमा हो और चांद पेरिजी पर हो, उस दिन सुपरमून दिखता है.
अब सोचिए कि ये घटना कितनी रेयर है, जब ब्लू मून, पूर्ण चंद्र ग्रहण और सुपरमून तीनों एक ही दिन होने वाले हैं. इस रात चांद बिल्कुल तांबे जैसा तेज़ लाल दिखने वाला है. पूरे देश में चंद्र ग्रहण 6:21 से शुरू होकर 7:37 तक खत्म हो जाएगा.
'सुपर ब्लू ब्लड मून' को आप नासा के इस वीडियो से भी समझ सकते हैं:
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